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ISKCON Vrindavan : ऐसा मंदिर जिसे अंग्रेजों का मंदिर कहा जाता है

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इस्कॉन मंदिर, जिसे कृष्ण बलराम मंदिर भी कहा जाता है, वृन्दावन की सबसे मशहूर और खास जगहों में से एक है। इस मंदिर की स्थापना स्वामी प्रभुपाद ने साल 1975 में राम नवमी के दिन की थी। लोग इसे प्यार से “अंग्रेजों का मंदिर” भी कहते हैं, क्योंकि यहाँ देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी भक्त आते हैं। केसरिया कपड़ों में हरे कृष्ण का जाप करते विदेशी भक्तों को देखना अपने आप में बहुत अलग और अच्छा अनुभव देता है इस ब्लॉग में Five Colors of Travel आपको बताएगा इस्कॉन की खासियत, यहां की खूबसूरती और यहां लगातार बढ़ती भक्तों की भीड़ का राज। इस्कॉन मंदिर की बनावट मंदिर में तीन मुख्य वेदियाँ हैं, जो इसकी सबसे बड़ी खास पहचान मानी जाती हैं। बीच वाली वेदी पर श्री कृष्ण बलराम विराजमान हैं, बाईं तरफ श्री गौर निताई के दर्शन होते हैं और दाईं तरफ श्री राधा श्यामसुंदर ललिता और विशाखा सखी के साथ विराजे हुए हैं। मंदिर में दिन-रात, यानी पूरे 24 घंटे कीर्तन चलता रहता है, जिसकी वजह से यहाँ हर समय एक अलग ही शांति और भक्ति वाला माहौल महसूस होता है। जैसे ही आप अंदर कदम रखते हैं, मन अपने आप हल्का और शांत हो जाता है। मंदिर परिसर में स्वामी प्रभुपाद की बहुत बड़ी समाधि भी है, साथ ही उनका पुराना निवास स्थान भी मौजूद है, जिसे अब एक संग्रहालय में बदल दिया गया है, जहाँ उनकी जिंदगी, विचारों और इस्कॉन की शुरुआत से जुड़ी कई बातें देखने और जानने को मिलती हैं। मंदिर में होने वाले कार्यक्रम इस्कॉन मंदिर में भगवान कृष्ण से जुड़े बड़े-बड़े त्योहार बहुत धूमधाम से मनाए जाते हैं। जन्माष्टमी पर तो पूरा वृन्दावन खुशियों में डूब जाता है और यहाँ की रौनक कई दिन पहले से ही देखने लायक होती है। राधाष्टमी के दिन भक्तों को राधारानी के चरण कमलों के खास दर्शन मिलते हैं, गोवर्धन पूजा या अन्नकूट के मौके पर ढेर सारा प्रसाद बनता है और सबको प्यार से बाँटा जाता है। झूलन यात्रा में भगवान को सजे-धजे झूलों में झुलाया जाता है, जिसे देखने भक्त दूर-दूर से आते हैं। वहीं कार्तिक मास में दामोदर महोत्सव के दौरान पूरे मंदिर में भक्ति और साधना का माहौल और भी ज़्यादा गहरा और सुकून देने वाला हो जाता है। रोज खिचड़ी का प्रसाद बांटने की वजह स्वामी प्रभुपाद की सोच थी कि मंदिर के आसपास कोई भी इंसान भूखा न रहे, इसी वजह से यहाँ रोज़ अन्नदान किया जाता है और प्यार से खिचड़ी का प्रसाद बाँटा जाता है। सुबह से शाम तक ज़रूरतमंद लोग यहाँ आते हैं और बिना किसी भेदभाव के सबको भोजन मिलता है। यह सेवा सिर्फ धार्मिक काम नहीं है, बल्कि इंसानियत और अपनापन दिखाने का एक खूबसूरत तरीका है, जहाँ प्रसाद लेते हुए ऐसा लगता है जैसे कोई अपने घर में बैठकर खाना खिला रहा हो। वृन्दावन यात्रा का सुकून वृन्दावन के मंदिर और यहाँ के रंग-बिरंगे उत्सव ऐसी जगहें हैं जहाँ आते ही मन अपने-आप हल्का और शांत महसूस करने लगता है। यहाँ की गलियों में घूमना, मंदिरों में घंटियों और भजनों की आवाज़ सुनना और भक्तों की श्रद्धा देखना दिल को सुकून दे देता है। ये यात्रा सिर्फ घूमने या फोटो खींचने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आपके मन को अंदर से जोड़ने वाला अनुभव बन जाती है। यहाँ आकर इंसान थोड़ी देर के लिए अपनी भागदौड़ भरी ज़िंदगी भूल जाता है और मन व आत्मा दोनों को एक अलग तरह की शांति मिलती है।