Gibraltar of the East: भारत के 5 सबसे अभेद्य Fortresses
भारत का इतिहास सिर्फ राजाओं और युद्धों की कहानियों तक सीमित नहीं है। इस देश के अलग-अलग हिस्सों में बने किले आज भी अपने अंदर कई सदियों का इतिहास समेटे हुए हैं। कुछ किले ऊंची पहाड़ियों पर बने हैं, कुछ समुद्र के बीच खड़े हैं और कुछ ऐसे हैं जिन्हें जीतना कभी किसी भी दुश्मन के लिए आसान नहीं था। इनकी मजबूत दीवारें, ऊंची चट्टानें और शानदार बनावट देखकर कई विदेशी यात्रियों और इतिहासकारों ने इनकी तुलना दुनिया की सबसे मजबूत जगहों से की। (Gibraltar of the East) इन्हीं किलों में से कुछ को ‘Gibraltar of the East’ यानी ‘पूर्व का जिब्राल्टर’ कहा गया। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि यह नाम भारत के सिर्फ एक किले के लिए इस्तेमाल नहीं हुआ। अलग-अलग समय में भारत के कई मजबूत किलों की तुलना जिब्राल्टर से की गई। हर Fortress की अपनी अलग कहानी है और हर किले की मजबूती के पीछे उसकी खास भौगोलिक स्थिति और शानदार निर्माण छिपा हुआ है। Gibraltar of the East का मतलब क्या है? सबसे पहले यह समझते हैं कि Gibraltar आखिर है क्या। जिब्राल्टर यूरोप के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक विशाल और मजबूत चट्टानी क्षेत्र है। समुद्र के किनारे इसकी ऊंची चट्टान और रणनीतिक स्थिति के कारण इसे जीतना बेहद मुश्किल माना जाता था। यही वजह है कि जब यूरोपीय यात्री भारत आए और उन्होंने यहां के कुछ किलों को देखा, तो उनकी ऊंचाई, मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था देखकर उन्होंने उनकी तुलना जिब्राल्टर से कर दी। किसी किले को Gibraltar of the East कहना सिर्फ उसकी ऊंची दीवारों की तारीफ नहीं थी। इसका मतलब था कि वह Fortress इतना मजबूत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है कि उसे जीतना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल होगा। भारत के कई किलों ने सदियों तक हमलों का सामना किया और अपनी मजबूती के कारण इस नाम से पहचाने गए। रायगढ़ किला: मराठा साम्राज्य की मजबूत राजधानी महाराष्ट्र के सह्याद्रि पर्वतों में स्थित रायगढ़ किला भारत के सबसे प्रसिद्ध पहाड़ी किलों में से एक है। कई इतिहासकारों ने इसकी तुलना जिब्राल्टर से की है। ब्रिटिश इतिहासकार ग्रांट डफ ने भी रायगढ़ की मजबूती और ऊंचाई से प्रभावित होकर इसकी तुलना जिब्राल्टर की चट्टान से की थी। यह Fortress समुद्र तल से करीब 2,851 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। रायगढ़ को छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी राजधानी बनाया था। किले की प्राकृतिक स्थिति ऐसी थी कि दुश्मन के लिए यहां तक पहुंचना ही बहुत मुश्किल था। चारों ओर खड़ी पहाड़ियां और कठिन रास्ते इस किले को प्राकृतिक सुरक्षा देते थे। रायगढ़ का इतिहास मराठा साम्राज्य के लिए बहुत खास है। 6 जून 1674 को इसी किले पर छत्रपति शिवाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक हुआ था। इसी दिन उन्होंने छत्रपति की उपाधि धारण की थी। आज भी रायगढ़ के खंडहरों में राजदरबार, बाजार और पुराने महलों के अवशेष देखे जा सकते हैं। किले के अंदर मौजूद नगाड़ा खाना, पालकी दरवाजा और महादरवाजा इसकी शानदार वास्तुकला की कहानी बताते हैं। इस Fortress की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि यहां पहुंचने वाला दुश्मन खुले मैदान में नहीं, बल्कि लगातार चढ़ाई और कठिन रास्तों से होकर आता था। ग्वालियर किला: हिंद के किलों का मोती मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में स्थित ग्वालियर किला भारत के सबसे शानदार किलों में से एक है। यह किला एक ऊंची बलुआ पत्थर की पहाड़ी पर बना हुआ है और शहर से काफी ऊंचाई पर दिखाई देता है। अपनी मजबूती और शानदार बनावट के कारण इसे भी कई बार Gibraltar of the East से जोड़ा गया है। मुगल बादशाह बाबर इस किले की मजबूती और सुंदरता से इतना प्रभावित हुआ था कि उसने इसे ‘हिंद के किलों का मोती’ कहा था। ग्वालियर किला केवल एक Fortress नहीं है, बल्कि यह भारत के अलग-अलग राजवंशों के इतिहास का गवाह भी है। (Gibraltar of the East) इस किले पर कई शासकों का अधिकार रहा। तोमर राजाओं से लेकर मुगलों और मराठों तक, इस किले ने इतिहास के कई दौर देखे हैं। किले के अंदर मौजूद मान मंदिर महल इसकी सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक है। इसके अलावा सास-बहू मंदिर और तेली का मंदिर भी यहां की वास्तुकला को खास बनाते हैं। किले की ऊंची दीवारें और पहाड़ी पर इसकी स्थिति इसे युद्ध के समय बेहद मजबूत बनाती थीं। यही कारण है कि ग्वालियर का यह Fortress लंबे समय तक उत्तर और मध्य भारत की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण रहा। विजयदुर्ग: समुद्र के बीच खड़ा मजबूत किला महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में स्थित विजयदुर्ग समुद्री किलों का शानदार उदाहरण है। इसे कई इतिहासकारों ने Eastern Gibraltar यानी पूर्व का जिब्राल्टर कहा है। यह Fortress तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है और इसकी प्राकृतिक स्थिति ही इसकी सबसे बड़ी सुरक्षा थी। विजयदुर्ग का निर्माण राजा भोज द्वितीय के समय हुआ था। बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस किले को और मजबूत बनाया। मराठा नौसेना के लिए विजयदुर्ग का बहुत बड़ा महत्व था। इस किले की सबसे खास बात इसकी समुद्री सुरक्षा व्यवस्था थी। समुद्र के अंदर बनी एक छिपी हुई दीवार दुश्मन के जहाजों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती थी। बाहर से आने वाले जहाजों को किले के आसपास के पानी की गहराई और छिपी हुई संरचनाओं का अंदाजा नहीं होता था। (Gibraltar of the East) मराठा नौसेना के प्रसिद्ध सेनापति कान्होजी आंग्रे ने भी विजयदुर्ग को अपने महत्वपूर्ण नौसैनिक केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया था। कई विदेशी जहाजों को इस इलाके में रोकने में मराठा नौसेना सफल रही। आज जब आप इस Fortress को देखते हैं, तो इसकी दीवारों से समुद्र का शानदार नजारा दिखाई देता है। यहां खड़े होकर आसानी से समझा जा सकता है कि पुराने समय में यह किला समुद्र से आने वाले दुश्मनों के लिए कितना बड़ा खतरा रहा होगा। तारागढ़ किला: अरावली की पहाड़ियों का प्रहरी राजस्थान के अजमेर में स्थित तारागढ़ किला भी भारत के उन ऐतिहासिक किलों में शामिल है जिनकी तुलना Gibraltar of the East से की गई। इसे अजयराज चौहान ने बनवाया था और यह अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है। तारागढ़ को गढ़ बीठली के नाम से भी जाना जाता है। ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यह