Karnataka Heritage: 800 साल पुराना अमृतेश्वर मंदिर
कर्नाटक का चिकमगलूर जिला अपनी हरियाली, कॉफी के बागानों और पहाड़ों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसी जिले के एक छोटे से गांव अमृतपुरा में एक ऐसा मंदिर भी मौजूद है, जिसे होयसल काल की सबसे Heritage धरोहरों में गिना जाता है। इस मंदिर का नाम है अमृतेश्वर मंदिर। अगर आपको पुराने मंदिर, इतिहास और पत्थरों पर की गई शानदार नक्काशी देखना पसंद है, तो यह जगह आपको जरूर पसंद आएगी। अमृतपुरा गांव में बना यह मंदिर करीब 800 साल पुराना है। बाहर से देखने पर यह एक साधारण मंदिर जैसा लग सकता है, लेकिन जैसे ही आप इसके पास जाते हैं, इसकी बारीक नक्काशी आपका ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। मंदिर का हर हिस्सा उस समय के कलाकारों की मेहनत और हुनर की कहानी सुनाता है। यही वजह है कि आज भी इतिहास और Heritage में रुचि रखने वाले लोग इस मंदिर को देखने दूर-दूर से आते हैं। कब और किसने बनवाया था अमृतेश्वर मंदिर? इस मंदिर का निर्माण साल 1196 ईस्वी में होयसल साम्राज्य के समय हुआ था। उस समय राजा वीर बल्लाल द्वितीय का शासन था। माना जाता है कि राजा के सेनापति अमृतेश्वर दंडनायक ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। उनके नाम पर ही इस मंदिर का नाम अमृतेश्वर मंदिर पड़ा। इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर उस समय शैव धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। यहां भगवान शिव की पूजा होती थी और दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते थे। आज भी मंदिर में नियमित पूजा होती है और स्थानीय लोग इसे अपनी आस्था का बड़ा केंद्र मानते हैं। मंदिर की दीवारों पर कई पुराने शिलालेख भी मौजूद हैं। इनमें उस समय के दान, मंदिर के निर्माण और समाज से जुड़ी कई जानकारियां दर्ज हैं। इन शिलालेखों की वजह से इतिहासकारों को उस दौर के बारे में काफी जानकारी मिली है। इस मंदिर की Heritage Architecture क्यों है इतनी खास? अमृतेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी पहचान इसकी शानदार Heritage Architecture है। यह मंदिर सोपस्टोन यानी नरम पत्थर से बनाया गया है। यही कारण है कि कलाकार पत्थरों पर बहुत बारीक डिजाइन बना पाए। मंदिर का आधार तारे के आकार का है, जो होयसल शैली की खास पहचान मानी जाती है। जैसे-जैसे आप मंदिर के चारों तरफ घूमते हैं, आपको हर तरफ अलग-अलग तरह की नक्काशी दिखाई देती है। कहीं देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं, कहीं जानवरों की आकृतियां और कहीं फूल-पत्तियों के सुंदर डिजाइन बने हुए हैं। मंदिर का मुख्य गर्भगृह, मंडप और खुले स्तंभ आज भी अच्छी स्थिति में हैं। इतने साल बीत जाने के बाद भी इसकी सुंदरता लोगों को हैरान कर देती है। यही वजह है कि यह जगह कर्नाटक के सबसे सुंदर Heritage मंदिरों में गिनी जाती है। मंदिर की दीवारों पर दिखती हैं रामायण और महाभारत की कहानियां अगर आप इस मंदिर की दीवारों को ध्यान से देखेंगे, तो आपको कई पौराणिक कहानियां पत्थरों पर उकेरी हुई दिखाई देंगी। रामायण के कई दृश्य बहुत सुंदर तरीके से बनाए गए हैं। भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान से जुड़े कई प्रसंग यहां देखने को मिलते हैं। इसी तरह महाभारत की घटनाओं को भी अलग-अलग हिस्सों में उकेरा गया है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े दृश्य भी मंदिर की दीवारों पर बने हुए हैं। इन मूर्तियों की सबसे खास बात यह है कि हर चेहरे के भाव अलग दिखाई देते हैं। कलाकारों ने पत्थर में भी भावनाओं को जीवंत बनाने की कोशिश की थी। यही कारण है कि यह मंदिर सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि कला प्रेमियों के लिए भी बहुत खास माना जाता है। 140 से ज्यादा नक्काशीदार पैनल देखते ही बनते हैं मंदिर के खुले मंडप में लगभग 140 से ज्यादा सुंदर पैनल बने हुए हैं। हर पैनल पर अलग कहानी दिखाई देती है। किसी में युद्ध का दृश्य है, किसी में नृत्य करती हुई आकृतियां और कहीं देवी-देवताओं की मूर्तियां बनी हुई हैं। मंदिर के खंभे भी बेहद खास हैं। इन्हें इतनी सफाई से तराशा गया है कि आज भी इनकी चमक बनी हुई है। कई लोग पहली बार इन्हें देखकर यकीन ही नहीं कर पाते कि यह काम करीब आठ सौ साल पहले बिना किसी आधुनिक मशीन के किया गया होगा। यही वजह है कि अमृतेश्वर मंदिर को होयसल काल की सबसे बेहतरीन Heritage इमारतों में गिना जाता है। मंदिर के पीछे छिपी हैं कई दिलचस्प बातें अमृतेश्वर मंदिर सिर्फ अपनी नक्काशी की वजह से ही नहीं, बल्कि कई रोचक बातों की वजह से भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में एक ऐसा दीपक है जो कई पीढ़ियों से लगातार जलता आ रहा है। स्थानीय लोग इसकी देखभाल करते हैं और इसे मंदिर की परंपरा का हिस्सा मानते हैं। मंदिर के परिसर में पुराने कन्नड़ भाषा के कई शिलालेख भी मौजूद हैं। इनमें उस समय के दानदाताओं, मंदिर के निर्माण और समाज से जुड़ी जानकारी मिलती है। इतिहास की पढ़ाई करने वाले लोग इन शिलालेखों को आज भी काफी महत्वपूर्ण मानते हैं। (Heritage) यहां प्रसिद्ध कवि जन्ना से जुड़ी जानकारी भी मिलती है। माना जाता है कि उनका संबंध इसी इलाके से था और होयसल राजाओं के समय उन्होंने कई प्रसिद्ध रचनाएं लिखीं। मंदिर के आसपास आज भी उस दौर की झलक साफ दिखाई देती है। मंदिर के अंदर क्या-क्या देखना चाहिए? अगर आप अमृतेश्वर मंदिर घूमने जा रहे हैं, तो सिर्फ भगवान शिव के दर्शन करके वापस न लौटें। थोड़ा समय निकालकर पूरे मंदिर को ध्यान से देखें। सबसे पहले मंदिर के सामने बने सुंदर मंडप को देखें। इसके बाद चारों तरफ घूमकर दीवारों पर बनी मूर्तियों को ध्यान से देखें। हर दीवार पर अलग-अलग डिजाइन दिखाई देंगे। (Heritage) मंदिर के खंभे भी देखने लायक हैं। इन पर इतनी बारीक नक्काशी की गई है कि हर खंभा दूसरे से अलग दिखाई देता है। मंदिर की छत पर बने डिजाइन भी बहुत सुंदर हैं। अगर आप फोटोग्राफी पसंद करते हैं, तो यहां आपको कई शानदार एंगल मिल जाएंगे। मंदिर के आसपास का माहौल भी काफी शांत रहता है। शहर की भीड़-भाड़ से दूर यह जगह कुछ समय सुकून से बिताने के लिए भी अच्छी मानी जाती है। अमृतेश्वर मंदिर