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चारधाम यात्रा होगी आसान- 5 KM लंबी सुरंग से अब 2 घंटे का सफर सिर्फ 15 मिनट में

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उत्तराखंड की चारधाम यात्रा करना हर किसी के दिल में होता है, क्योंकि ये सिर्फ घूमने वाली ट्रिप नहीं होती, बल्कि एक तरह से आस्था और सुकून वाली यात्रा होती है। लेकिन सच ये भी है कि पहाड़ों का रास्ता इतना आसान नहीं होता। कहीं सड़कें बहुत संकरी होती हैं, कहीं तेज मोड़ आते हैं और ऊपर से मौसम का कोई भरोसा नहीं कभी बारिश, कभी बर्फबारी और कई बार भूस्खलन की वजह से रास्ता बंद तक हो जाता है। यही कारण है कि बहुत से लोग चारधाम जाने का प्लान बनाते तो हैं, लेकिन फिर ये सोचकर डर जाते हैं कि रास्ता बहुत मुश्किल होगा या सफर में ज्यादा परेशानी हो जाएगी। कई बार तो लोग टिकट देखकर भी बाद में प्लान कैंसिल कर देते हैं। लेकिन अब चारधाम यात्रियों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। हिमालय के अंदर से सिलक्यारा से पोलगांव तक एक लंबी सुरंग बनाई जा रही है, जिससे यात्रा काफी आसान और आरामदायक हो जाएगी। इस सुरंग के बनने के बाद जो सफर अभी डेढ़-दो घंटे में पूरा होता है, वो आगे चलकर सिर्फ 15 मिनट में हो जाएगा। यानी ना सिर्फ समय बचेगा, बल्कि रास्ते की टेंशन भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी और चारधाम यात्रा पहले से ज्यादा आसान लगने लगेगी। Silkyara- Polgaon Tunnel क्या है और कहां बन रही है? सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग को कई लोग सिलक्यारा बेंड–बारकोट सुरंग के नाम से भी जानते हैं। ये सुरंग उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बन रही है और चारधाम महामार्ग परियोजना का एक बहुत ही जरूरी हिस्सा है। इसका मुख्य मकसद गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी को कम करना है ताकि यात्रियों को पहाड़ों के कठिन मोड़ों और ऊंचे रास्तों से बार-बार ना गुजरना पड़े। ये सुरंग हिमालयी इलाके में बनाई जा रही है, जहां काम करना वैसे भी बहुत मुश्किल होता है, इसलिए इसे बनाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। सुरंग बनाना इतना मुश्किल क्यों था? हिमालय जैसे पहाड़ी इलाके में सुरंग बनाना आसान काम नहीं होता। यहां जमीन की बनावट अलग होती है, कहीं चट्टानें बहुत सख्त होती हैं तो कहीं मिट्टी कमजोर होती है। ऊपर से ये इलाका भूकंप के लिहाज से भी संवेदनशील माना जाता है। इसी वजह से इस सुरंग को आर-पार निकालना सबसे बड़ी चुनौती थी। हैरानी की बात ये है कि सिर्फ 4.5 किलोमीटर खुदाई करने में करीब 3 साल लग गए। खुदाई का काम साल 2023 में शुरू हुआ था और अब जाकर सुरंग को आर-पार खोदा जा सका है। मतलब साफ है—ये सुरंग बनाना जितना दिखने में आसान लगता है, असल में उतना ही मुश्किल और मेहनत वाला काम था। 2023 में हुआ हादसा, जब 41 मजदूर सुरंग में फंस गए थे इस सुरंग का नाम सुनते ही लोगों को नवंबर 2023 का वो बड़ा हादसा भी याद आता है, जब खुदाई के दौरान सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था। उस समय अंदर करीब 41 मजदूर फंस गए थे, और पूरे देश की नजरें उसी रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई थीं। करीब 17 दिन तक लगातार बचाव अभियान चला और फिर जाकर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। ये घटना बहुत बड़ी थी और इसके बाद सुरंग की सुरक्षा और निर्माण प्रक्रिया पर और ज्यादा ध्यान दिया गया, ताकि आगे ऐसा कोई खतरा ना हो। सुरंग कितनी लंबी है और कब तक तैयार होगी? सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग की कुल लंबाई 4.53 किलोमीटर बताई जा रही है और अभी इसका काम अंतिम चरण में चल रहा है। उम्मीद है कि 2025 के अंत तक ये सुरंग पूरी तरह तैयार हो जाएगी और फिर इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। सुरंग के अंदर डबल लेन सड़क होगी, जिससे दोनों तरफ से आवाजाही हो सकेगी। यानी पहाड़ों के संकरे रास्तों में फंसने वाली परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इसके अलावा सुरंग का आकार घोड़े की नाल जैसा रखा गया है और इसे ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से बनाया गया है, ताकि हिमालयी इलाके में आने वाले झटकों और दबाव को ये झेल सके। चारधाम यात्रियों को कितना फायदा होगा? चारधाम यात्रा करने वालों के लिए ये सुरंग किसी वरदान से कम नहीं होगी। अभी तक चारधाम यात्रा ज्यादातर गर्मियों में ही होती है, क्योंकि सर्दियों में बर्फबारी और खराब मौसम के कारण कई रास्ते बंद हो जाते हैं। लेकिन सुरंग बन जाने के बाद ऑल वेदर कनेक्टिविटी मिल जाएगी, यानी हर मौसम में यात्रा ज्यादा आसान हो सकती है। अभी राड़ी क्षेत्र में सड़कें संकरी हैं, जहां अक्सर घंटों जाम लग जाता है और बारिश-बर्फबारी में हादसों का खतरा भी बना रहता है। कई बार तो सर्दियों में रास्ता कई दिनों तक बंद रहता है। सुरंग बनने के बाद ये परेशानी बहुत कम हो जाएगी और यात्रा ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी। 2 घंटे का रास्ता 15 मिनट में कैसे होगा पूरा? अभी सिलक्यारा से पोलगांव तक जाने के लिए लोगों को राड़ी टॉप से होकर गुजरना पड़ता है, जिसमें करीब डेढ़ से 2 घंटे लग जाते हैं। लेकिन जब सुरंग पूरी तरह चालू हो जाएगी, तो ये दूरी करीब 26 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसका मतलब ये है कि अब पहाड़ के ऊपर-ऊपर घूमकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सुरंग के जरिए सीधा रास्ता मिल जाएगा। इसी वजह से यात्रा का समय घटकर सिर्फ 15 मिनट रह जाएगा। इससे समय तो बचेगा ही, साथ ही ईंधन की भी बचत होगी और सफर ज्यादा आरामदायक हो जाएगा। लोकल लोगों के लिए भी बड़ी राहत इस सुरंग का फायदा सिर्फ चारधाम यात्रियों को नहीं होगा, बल्कि आसपास के गांवों और कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए भी ये एक बड़ी राहत बनेगी। जब आवाजाही आसान होगी, तो लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए दूर तक जाने में परेशानी नहीं होगी। स्कूल, अस्पताल, बाजार जैसी जरूरी जगहों तक पहुंच आसान हो जाएगी। साथ ही जब पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, तो होटल, होमस्टे, ढाबे, टैक्सी और दूसरे छोटे कारोबार भी बढ़ेंगे। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों की कमाई और रोजगार पर पड़ेगा और इलाके का विकास तेजी से होगा। कितना खर्च आया है इस सुरंग पर? खबरों के मुताबिक इस सुरंग को बनाने की