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नवंबर में पहाड़ों की सैर हल्की बर्फबारी और ट्रेकिंग का असली मज़ा तभी ले पाएंगे! जब जान लेंगे यह ट्रैवल टिप्स..

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नवंबर का महीना और बर्फ का शुरुआती दस्तूर नवंबर भारत में पहाड़ों की सैर के लिए सबसे बेहतरीन महीनों में से एक माना जाता है। इस वक्त गर्मी पूरी तरह खत्म हो जाती है और हल्की सर्दी हवा में ताजगी ले आती है। दिन में कोमल धूप मिलती है और सुबह–शाम हल्की ठंड शरीर और दिमाग को रिलैक्स कर देती है। नवंबर में पहाड़ों पर धुंध तैरती है, आसमान साफ रहता है और कई जगहों पर शुरुआती बर्फ की हल्की परत भी दिखने लगती है। इस महीने में हिल स्टेशनों की भीड़ भी कम होती है, जिससे यात्रा आरामदायक बनती है। पर्यटक बिना जल्दबाज़ी के घूम सकते हैं, फोटोग्राफी कर सकते हैं और नेचर के असली रंगों को महसूस कर सकते हैं। कैफे, छोटे गेस्टहाउस, लोकल ढाबे और गांव की सादगी सब मिलकर नवंबर का महीना खास बना देते हैं। पहाड़ों की सुगंध और ठंडी हवा मिलकर ऐसा माहौल बनाती है कि कोई भी यहां कुछ दिन बिताकर खुद को तरोताज़ा कर सकता है। नवंबर में पहाड़ क्यों मोहते हैं? नवंबर का असली जादू उसके मौसम में छुपा है। बारिश पूरी तरह खत्म हो जाती है, जिससे रास्ते साफ हो जाते हैं और हवा में नमी कम हो जाती है। तापमान 5°C से 15°C के बीच रहता है, जो घूमने और ट्रेकिंग के लिए परफेक्ट माना जाता है। पहाड़ों पर धूप हल्की और सुकून देने वाली होती है। यह न तेज होती है और न जलन वाली। सुबह की धुंध और शाम की गुलाबी ठंड मन को बेहद खुश कर देती है। नवंबर में पहाड़ों के पेड़ अपने असली हरे रंग में दिखते हैं। साफ आसमान के कारण दूर की चोटियां भी आसानी से दिखाई देती हैं। यह महीना नेचर फोटोग्राफी के लिए भी सबसे अच्छा माना जाता है। कम भीड़ होने की वजह से सुनसान वादियां, शांत सड़कें और धीमी–धीमी चलती हवा एक अनोखा अनुभव देती है। ट्रैवलर्स को यहां शोर-शराबे से दूर असली सुकून मिलता है। यही वजह है कि नवंबर पहाड़ प्रेमियों का पसंदीदा महीना बन गया है।(कैफे, छोटे गेस्टहाउस, लोकल ढाबे और गांव की सादगी सब मिलकर नवंबर का महीना खास बना देते हैं।) हल्की बर्फबारी का आनंद लें नवंबर का सबसे खूबसूरत हिस्सा है हल्की बर्फबारी का अनुभव। यह न तो बहुत भारी होती है और न ही खतरनाक। शुरुआती बर्फबारी बेहद रोमांटिक और सुकून देने वाली होती है। मनाली की सोलंग वैली, अटल टनल के बाद के इलाके, औली, गुलमर्ग, सोनमर्ग, उत्तर सिक्किम के लाचुंग–युमथांग–जीरो पॉइंट और उत्तराखंड के केदारकांठा बेस कैंप में नवंबर से बर्फ गिरना शुरू हो जाता है। पहाड़ों की चोटियों पर सफेद परत, पेड़ों पर हल्की बर्फ और जमीन पर चमकते बर्फ के कण एक सपनों जैसा दृश्य बनाते हैं। इस समय ली गई तस्वीरें बेहद शानदार आती हैं। बर्फ गिरते हुए पहाड़ी गांवों में बैठकर अदरक वाली चाय पीने का मजा ही कुछ और है। ट्रेकिंग करते हुए जब इंसान पहली बार बर्फ को हाथ में पकड़ता है तो वह पल हमेशा दिल में बस जाता है। शुरुआती बर्फबारी ठंड तो देती है, लेकिन खतरनाक बर्फीले तूफान वाला वातावरण नहीं बनाती, इसलिए परिवार, कपल और नए ट्रैवलर भी इसे आराम से एंजॉय कर सकते हैं। नवंबर में ट्रेकिंग सबसे आरामदायक और रोमांचक लम्हे इस महीने ट्रेकिंग का मज़ा दोगुना हो जाता है। ट्रेल्स पर फिसलन नहीं होती, गर्मी से थकान नहीं होती और भारी बर्फ रास्ता नहीं रोकती। हवा ताजी होती है और शरीर जल्दी थकता नहीं। इसलिए नवंबर को ट्रेकिंग सीज़न का राजा कहा जाता है। उत्तराखंड का केदारकांठा ट्रेक, नाग टिब्बा, दयारा बुग्याल, हिमाचल का त्रियुंड, कारेरी लेक, कुंजर–तोश ट्रेक और सिक्किम का संडकफू ट्रेक इस समय सबसे बेहतरीन होते हैं। इन ट्रेल्स पर नवंबर में घास सुनहरी दिखती है, रास्तों से बादल गुजरते नजर आते हैं और पहाड़ों की चोटियां बेहद साफ दिखती हैं। कैम्पिंग का मजा भी नवंबर में सबसे खास होता है। रात के समय अलाव जलाकर बैठना, तारों भरे आसमान को निहारना, गर्म सूप पीते हुए कहानी सुनना ऐसा अनुभव इंसान सालों तक भूल नहीं पाता। ट्रेकिंग शुरुआती लोगों के लिए भी आसान रहती है, और बजट में फिट भी हो जाती है। नवंबर यात्रा के लिए कुछ ट्रैवल टिप्स ठंड की शुरुआत होने की वजह से नवंबर में पहाड़ों की यात्रा करते समय कुछ एहतियात जरूरी हैं। सबसे पहले गर्म कपड़े पैक करें थर्मल, जैकैट, टोपी, वूलन मोज़े और ग्लव्स जरूर रखें। ट्रेकिंग कर रहे हैं तो अच्छे ग्रिप वाले जूते बहुत जरूरी हैं। धूप को हल्के में न लें सनस्क्रीन और सनग्लासेस साथ रखें। ठंड में पानी पीने की आदत कम हो जाती है, लेकिन शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है। पावर बैंक, टॉर्च और थोड़ा कैश जरूर रखें क्योंकि कई पहाड़ी गांवों में नेटवर्क और ऑनलाइन पेमेंट की दिक्कत आती है। बर्फबारी वाले इलाकों में सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, इसलिए गाड़ी धीरे चलाएं। अगर आप ट्रेकिंग कर रहे हैं तो अपनी यात्रा की जानकारी किसी दोस्त या परिवार वाले को जरूर बताएं। मौसम में अचानक बदलाव की संभावना होती है, इसलिए मौसम अपडेट देखते रहें। इन छोटी–छोटी बातों का ध्यान रखने से आपकी यात्रा आरामदायक, सुरक्षित और बेहद यादगार बन जाएगी। पहाड़ों की यादें जो दिल में हमेशा बस जाएंगी नवंबर में पहाड़ों की यात्रा सिर्फ एक ट्रिप नहीं, बल्कि एक खूबसूरत एहसास होता है। जब सुबह की ठंडी हवा चेहरे को छूती है, जब पहाड़ों पर पहली बर्फ गिरती है, जब जंगलों से धुंध उठने लगती है और जब सूरज की रोशनी सुनहरी हो जाती है तब इंसान खुद को नेचर के और करीब महसूस करता है। हिमाचल के छोटे गांव हों, उत्तराखंड के शांत मंदिर, कश्मीर की वादियां हों या सिक्किम की रंगीन पहाड़ियां हर जगह नवंबर में एक अलग चमक दिखती है। यह मौसम न सिर्फ ट्रैकिंग के लिए अच्छा है, बल्कि रिलैक्स करने, खुद को तलाशने और लाइफ की हलचल से ब्रेक लेने के लिए भी परफेक्ट है। पहाड़ सर्दियों की शुरुआत में शांत और स्वागत करने वाले लगते हैं। कैफे में धीमे संगीत के साथ बैठना, पहाड़ के मोड़ पर गरम चाय पीना, बर्फ के बीच फोटो खींचना और रात में तारों के नीचे चुपचाप बैठना ये सभी पल इंसान के दिल

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सर्दियों में घूमने के लिए 5 बजट फ्रेंडली हिल स्टेशन, ठंड का मज़ा और जेब पर बोझ नहीं!

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सर्दियों की सैर ठंड में घूमने का सबसे सही वक्त सर्दियां भारत में ऐसी ऋतु है जब हर किसी का मन पहाड़ों की ओर भागता है। बर्फ से ढके पहाड़, धुंध से लिपटी सुबहें, गरम चाय की चुस्की और सर्द हवा का स्पर्श इन सब में दिल मचल जाता है। यह माना जाए की इस मौसम में घूमने का मज़ा दोगुना हो जाता है तो ज्यादा नहीं होगा। लेकिन बहुत लोग सोचते हैं कि हिल स्टेशन की ट्रिप जेब पर भारी पड़ती है। जबकि सच्चाई यह है कि अगर आप थोड़ी समझदारी से ट्रिप प्लान करें, तो सर्दियों की खूबसूरत ट्रिप बेहद सस्ते में हो सकती है। भारत में कई ऐसे हिल स्टेशन हैं जो खूबसूरती के साथ-साथ बजट में भी फिट बैठते हैं। यहां आप न सिर्फ नेचर का असली रंग देख सकते हैं, बल्कि लोकल लोगों की संस्कृति, खानपान और सादगी का आनंद भी उठा सकते हैं। सर्दियों की ठंड में पहाड़ों पर घूमना शरीर को तरोताजा कर देता है। ऐसे में अगर आप सर्दियों की छुट्टियों में कम खर्च में यादगार ट्रिप का मज़ा लेना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए ये 5 बजट फ्रेंडली हिल स्टेशन आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए। कसौली, शांति और सादगी का ठिकाना हिमाचल प्रदेश की गोद में बसा कसौली एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह उन लोगों के लिए परफेक्ट जगह है जो शोर-शराबे से दूर, शांति में कुछ दिन बिताना चाहते हैं। सर्दियों में कसौली का तापमान 5 से 10 डिग्री के बीच रहता है, जिससे यहां की ठंड रोमांचक लगती है। सुबह की धुंध और शाम की ठंडी हवा यहां के माहौल को एकदम जादुई बना देती है। कसौली में घूमने के लिए बहुत कुछ है जैसे गिल्बर्ट ट्रेल, क्राइस्ट चर्च, मंकी पॉइंट, और सनसेट व्यू पॉइंट जैसी जगहें यहां की पहचान हैं। इन जगहों पर जाने के लिए किसी बड़े खर्च की जरूरत नहीं पड़ती। लोकल बस से या पैदल घूमना ही यहां का असली आनंद है। अगर बात बजट की करें तो कसौली में ₹700 से ₹1000 तक के अच्छे गेस्टहाउस या छोटे होटल आसानी से मिल जाते हैं। खाना भी काफी सस्ता और स्वादिष्ट है। लोकल ढाबों में राजमा-चावल, परांठे और गरम सूप का स्वाद आपकी ठंड को और मीठा बना देता है। दिल्ली या चंडीगढ़ से बस लेकर कुछ घंटों में यहां पहुंचा जा सकता है। सर्दियों की ठंड में कसौली के पहाड़ों पर टहलना और धुंध के बीच खो जाना, जिंदगी की सबसे सुकून भरी यादों में से एक हो सकती है।(5 बजट फ्रेंडली हिल स्टेशन आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए।) लैंसडाउन, सस्ता, शांत और बेहद खूबसूरत अगर आप भीड़भाड़ से दूर, नेचर की गोद में कुछ दिन बसना चाहते हैं, तो लैंसडाउन आपके लिए सबसे सही जगह है। यह उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में बसा छोटा हिल स्टेशन है, जिसे ब्रिटिश काल में बनाया गया था। यहां की हवा में सादगी है और पहाड़ों में अपनापन। सर्दियों में लैंसडाउन का तापमान 3 से 8 डिग्री के बीच रहता है। कभी-कभी हल्की बर्फबारी भी होती है जो इस जगह को और मनमोहक बना देती है। घूमने के लिए यहां भुल्ला झील, टिप-इन-टॉप व्यू पॉइंट, सेंट मेरी चर्च, और गढ़वाल रेजीमेंट म्यूजियम हैं।₹800 से ₹1200 के बजट में यहां बढ़िया होटल और होमस्टे मिल जाते हैं। यहां का लोकल खाना बहुत स्वादिष्ट और सस्ता होता है। ₹100 से ₹150 में आप पेटभर पहाड़ी खाना खा सकते हैं। दिल्ली से यह जगह सिर्फ 250 किलोमीटर दूर है और बस या कार से पहुंचना बहुत आसान है। लैंसडाउन उन यात्रियों के लिए परफेक्ट है जो शांत जगह पर बैठकर पहाड़ों की ठंडी हवा के साथ अपने विचारों में खो जाना चाहते हैं। माउंट आबू, राजस्थान की ठंडी गोद में एक अनोखी सैर राजस्थान अपने रेगिस्तानों और गर्म मौसम के लिए मशहूर है, लेकिन माउंट आबू इस सोच को पूरी तरह बदल देता है। अरावली की पहाड़ियों में बसा यह हिल स्टेशन सर्दियों में बेहद खूबसूरत हो जाता है। यहां दिन में हल्की धूप और रात में ठंडी हवाएं सर्दियों का असली एहसास कराती हैं। घूमने के लिए नक्की लेक, दिलवाड़ामंदिर, टॉड रॉक, और सूर्यास्त पॉइंट देखने लायक हैं। झील के किनारे शाम को टहलना या बोटिंग करना बहुत सुकून देता है। दिसंबर से फरवरी तक यहां का तापमान 8 से 15 डिग्री तक रहता है। ₹900 से ₹1300 तक के होटल आराम से मिल जाते हैं। अगर आप ग्रुप में जाते हैं, तो होमस्टे या हॉस्टल में रुकना और सस्ता पड़ सकता है। लोकल फूड बहुत ही स्वादिष्ट और जेब पर हल्का है। राजस्थान की पारंपरिक डिशेज़ जैसे दाल-बाटी और मिर्ची वड़ा यहां के ढाबों में खूब मिलते हैं। माउंट आबू रोड स्टेशन तक ट्रेन से पहुंचना आसान है, वहां से टैक्सी या बस लेकर 30 मिनट में आप इस खूबसूरत जगह पर पहुंच सकते हैं। यकीनन सर्दियों में माउंट आबू आपको ठंड के साथ-साथ गर्मजोशी का अनुभव भी कराएगा। बर्फ, बौद्ध और बजट ट्रैवल का संगम, मैकलोडगंज हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला के पास बसा मैकलोडगंज एक ऐसा हिल स्टेशन है जहां संस्कृति और नेचर को एक साथ लुत्फ उठाया जा सकता है। इसे लिटिल ल्हासा भी कहा जाता है क्योंकि यहां तिब्बती संस्कृति का असर हर कोने में है। सर्दियों में यहां का तापमान 2 से 8 डिग्री तक रहता है। दिसंबर और जनवरी में बर्फबारी से पूरा शहर सफेद चादर में ढक जाता है। घूमने के लिए नामग्याल मठ, भागसू वाटरफॉल, तिब्बतन मार्केट, और दलाई लामा मंदिर हैं। ₹600 से ₹1000 के बजट में होटल और होमस्टे आसानी से मिल जाते हैं। खाने के लिए यहां तिब्बती व्यंजन जैसे मोमोज, थुकपा और बटर टी का स्वाद लाजवाब होता है। लोकल कैफे और छोटी दुकानों में खाना बहुत सस्ता और स्वादिष्ट मिलता है। दिल्ली या चंडीगढ़ से धर्मशाला तक बसें और वहां से टैक्सी या लोकल बस लेकर मैकलोडगंज पहुंच सकते हैं। यहां के लोग बहुत मेहमाननवाज़ हैं और जगह का माहौल दिल को शांति देता है। अगर आप ठंड में बर्फ का मज़ा लेना चाहते हैं तो यह जगह एकदम परफेक्ट है। येरकौड, दक्षिण भारत का ठंडा और सस्ता हिल स्टेशन अगर आप साउथ इंडिया में