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रक्श से लेकर राज तक,विवादों से भरा था कुदसिया बाग की बेगम कुदसिया का सफर

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क्या कहता है इतिहास?(What is the history of Qudsia Bagh?)इतिहासकारों और दिल्ली सरकार के डिपार्मेंट ऑफ़ आर्कियोलॉजी (Department of archaeology) के हिसाब से इस बगीचे का निर्माण 1748 में करवाया गया था। बताया जाता है कि कुदसिया बेगम एक नर्तकी थीं जो मुगल बादशाह (Mughal Emperror) मोहम्मद शाह के दरबार में रक्श पेश किया करती थीं। उनकी खूबसूरती और नृत्य कला से मुगल बादशाह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कुदसिया बेगम से निकाह कर लिया। बताया जाता है कि कुदसिया बेगम लाल किले के चहल पहल वाली जिंदगी से दूर सुकून से रहना चाहती थीं और उनकी इसी इच्छा को ध्यान में रखते हुए उनके बेटे अहमद शाह ने इस बाग का निर्माण करवाया था। यह बाग कश्मीरी गेट के पास सिविल लाइंस के इलाके में पड़ता है। जहां उस समय यमुना नदी की धारा बहती थी। इस बगीचे में एक प्रवेश द्वार, एक मस्जिद और एक बावड़ी के अतिरिक्त कई सारी मेहराबें हैं। इतिहासकारों के मुताबिक यहां कई सारी इमारतें थी जिन्हें स्वतंत्रता संग्राम के समय अंग्रेजों द्वारा ध्वस्त किया कर दिया गया था। यहां के मस्जिदों में आज भी नियमित तौर पर नमाज अदा किया जाता है। अब इस पार्क का नाम बदल कर महाराणा प्रताप वाटिका(Maharana Pratap Vatiika) रख दिया गया है। कुदसिया बेगम का व्यक्तिगत जीवन : अगर बात करें कुदसिया बेगम के व्यक्तिगत जीवन के बारे में तो बताया जाता है कि उनका जन्म मूल रूप से एक हिंदू परिवार में हुआ था और उनका नाम उधम बाई था। कुदसिया बेगम को अपने जीवन काल में बाई-जू साहिबा, नवाब कुदसिया, साहिबा-उज़-ज़मानी और मुमताज महल जैसे कई प्रकार के उपनामों से भी नवाजा गया था। हालांकि कुदसिया बेगम का जीवन बहुत विवादित माना जाता है, क्योंकि बताया जाता है कि उनका संबंध उन्हीं के हरम के प्रबंधक जावेद खान नवाब बहादुर के साथ था जो एक किन्नर था। उनके इस संबंध के बारे में यह भी कहा जाता है कि जब 1752 में जावेद खान नवाब बहादुर को सफदर जंग ने मार दिया तो कुदसिया बेगम ने उनकी हत्या पर न सिर्फ शोक जताया बल्कि अपने गहनों को भी त्याग दिया और सफेद वस्त्र को धारण कर लिया।कुदसिया बेगम बहुत हीं खर्चीली और उदार किस्म की व्यक्ति थीं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब महल में सैनिकों के तनख्वाह के बकाया को भुगतान करने के लिए दो लाख रुपए भी इकट्ठा नहीं किए जा सके, तब उन्होंने सिर्फ अपना जन्मदिन मनाने के लिए दो करोड़ रुपए खर्च कर दिए। 26 मई 1754 को मल्हार राव होल्कर ने अहमद शाह बहादुर को हरा दिया था। इसके बाद कुदसिया बेगम सिकंदराबाद छोड़कर दिल्ली भाग कर आ गईं। लेकिन मल्हार राव होलकर ने दिल्ली तक उनका पीछा किया और अहमद शाह बहादुर के साथ-साथ कुदसिया बेगम की भी आंखें निकलवा दी। क्या है इस बाग की खासियत?(What is the specialty of this garden?) अगर बात करें इस बाग के खासियतों के बारे में तो आपको इस बाग में न सिर्फ मुगल इतिहास देखने को मिलेगा, बल्कि पारसी स्थापत्य कला के नमूने भी देखने को मिल जाएंगे। इस बाग में एक बारहद्वार वाला महल है जो इसका सबसे मुख्य आकर्षण माना जाता है। इसके अतिरिक्त इस बाग में एक मस्जिद भी है जहां प्रतिदिन नियमित तौर पर नमाज अदा किया जाता है। यहां के मस्जिद में नमाज की टाइम टेबल भी लगाई गई है। हालांकि अंग्रेजी सरकार के बमबारियों के कारण इस मस्जिद का काफी नुकसान हो चुका है, लेकिन अभी भी आप यहां उस समय के स्थापत्य कला के नमूने देख सकते हैं। यहां की मेहराबों पर की गई महीन नक्काशियां लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम हैं।इस बाग के दरवाजे इतने बड़े-बड़े हैं कि उनमें से हाथी भी गुजर सकते हैं। बताया जाता है कि इन दरवाजों को हाथियों के गुजरने के लिए हीं बनाया गया था। आपको इस बाग में एक ऐसा स्थान भी देखने को मिलेगा, जहां पर हाथियों को बांधा जाता था।इस बाग में एक ओपन जिम भी है। जहां पर आप एक्सरसाइज कर सकते हैं। साथ हीं इस बाग में बच्चों के लिए एक छोटे से पार्क की व्यवस्था भी है। जहां बहुत से अलग-अलग प्रकार के झूले लगाए गए हैं। यहां बैठने की भी बहुत ही अच्छी व्यवस्था की गई है और इस पार्क के साफ-सफाई का भी बहुत हीं अच्छे से ध्यान रखा जाता है। क्या है कुदसिया बाग की टाइमिंग?(What is the timing of Qudsiya Bagh?) जहां अधिकतर हॉन्टेड जगहों की टाइमिंग फिक्स होती है और वहां 5:00 के बाद लोगों को जाने नहीं दिया जाता है, वहीं कुदसिया बाग उन सभी हॉन्टेड जगहों से थोड़ा अलग है।अगर बात करें कुदसिया बाग के टाइमिंग (Qudsia Bagh timings) की तो यह चौबीसो घंटे खुला रहता है। यानी कि यहां पर आप कभी भी आ जा सकते हैं। इस बाग में आने जाने की कोई पाबंदी नहीं है और ना हीं आपको इस बाग में आने के लिए किसी भी प्रकार के टिकट (Qudsia Bagh ticket price) की आवश्यकता होगी। कैसे पहुंचे कुदसिया बाग?(How to reach Qudsia Bagh?)अगर आप कुदसिया बाग आना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले कश्मीरी गेट पहुंचना होगा। आप अपनी इच्छा अनुसार बस या फिर मेट्रो से कश्मीरी गेट (Which metro station is near to Qudsiya Bagh) पहुंच सकते हैं। कश्मीरी गेट पहुंचने के बाद आप वहां से 700 मीटर पैदल चलकर इस बाग तक पहुंच जाएंगे। आप चाहे तो कश्मीरी गेट से ई-रिक्शा भी ले सकते हैं। आपको इस बाग में अपनी गाड़ी से भी आ सकते हैं। यहां पार्किंग की बहुत अच्छी व्यवस्था की गई है। जब हमने इस बाग को एक्सप्लोर किया और पूरी तरह से छानबीन की तो हमें इस बाग में ऐसा कुछ हाउंटेड नहीं दिखा। बल्कि हमें इस बाग में आकर बहुत हीं सुकून का अनुभव हुआ और हमारे हिसाब से आप भी बिना डरे इस बाग में घूमने जा सकते हैं। यकीनन आपको भी यहां पर बहुत हीं अच्छा महसूस होगा।

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ये हैं दिल्ली की वो जगहें जहां से जुड़ी हैं कई डरावनी और दिल दहला देने वाली कहानियां –

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अगर आप हिम्मती हैं और हांटेड प्लेस घूमने में दिलचस्पी रखते हैं,तो आपको दिल्ली की इन जगहों पर जरूर जाना चाहिए। जहां आपको मिलेंगे कई ऐसे सुलझे-अनसुलझे राज़ जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। ऐसी जगह बेहद खूबसूरत होती हैं लेकिन इन जगहों के बारे में कुछ न कुछ कहानियां ऐसी बुन दी जाती हैं जहाँ आप उत्सुकतावश जरुर जाना चाहते हैं. लेकिन कोशिश कीजिए की आप यहां अकेले न आए क्योंकि डर सिर्फ रात के अँधेरे में ही फैलता है. ऐसी ही कुछ तथाकथित डरावनी जगहों के बारे में हम इस ब्लॉग में आपको बता रहे हैं — 1.दिल्ली छावनी (Delhi Cant)- ये जगह दिन में टहलने के लिए जितनी शानदार है, रात में ये उतनी ही भयानक भी हो जाती है। सड़क पर फैले घने पेड़ों बीच एक डरावनी सी फिलिंग (Scary Feeling) आती है। ऐसा लगता है मानो बॉलीवुड की किसी डरावनी फिल्म सीन देख रहें हों। देर शाम इन रास्तों पर ट्रैवल (Travel) करने वाले लोगों ने बताया है कि उन्होंने सफ़ेद कपड़े पहने एक औरत(Lady) को देखा है जो उनसे उसे सवारी देने की रिक्वेस्ट (Request) करती है। इसके अलावा यहाँ कि कुछ कहानियां हैं जो इसे डरावना बना देती हैं, यहाँ के लोकल लोगों का कहना है कि यहां एक महिला का मर्डर (Murder) हुआ था, जब वो इस एरिया में अकेली वॉक (Walk) कर रही थी। इसलिए जितना हो सके अंधेरा होने के बाद यहां आने से बचें। 2. दिल्ली में डीडीए कॉम्प्लेक्स (DDA Flats in Qutub enclave)-जिसे सबसे डरावने घर के रूप में भी जाना जाता है, वैसे तो ये कब्रिस्तान के ऊपर बनाया गया था, जिसे अब वहां देखे जाने वाले भूतों का कारण बताया जाता है। लोगो का मानना है यहां कई अजीबो गरीब चीजों को महसूस किया गया है । एब्नॉर्मल सी चीखें, टेंपरेचर में एक दम से चेंज आ जाना और भी बहुत कुछ । लोगों ने यह भी कहा है कि उन्होंने भूत देखे हैं और अजीब सी परछाइयां भी यहाँ दिखाई देती हैं जो कि यहाँ आने वालों का पीछा करती हैं। 3. अग्रसेन की बावली (Agrsen Ki Baoli)- वैसे तो इस जगह से पहचान करवाने की कोई खास जरूरत है नही, लेकिन फिर भी अगर आप यहां आने का प्लान बना रहें हैं तो आपके लिए कुछ बातों को जानना बेहद जरूरी हो जाता है। स्थानीय लोककथाओं के हिसाब से, इस बावली (जिसे बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है) में पहले रहस्यमयी रूप से गहरे पानी का एक कुंड था, जो लोगों को अपनी जान लेने के लिए मजबूर करता था। यहां आस पास रहने वाले लोगो का कहना है, जैसे ही आप सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं, आपको अहसास होने लगता है कि कोई आपका पीछा कर रहा है। 4. खूनी दरवाजा (Khooni Drwaza)- वैसे तो ये एक बहुत ही सुंदर हिस्टोरिकल प्लेस (Beautiful Historical place) है, लेकिन इस दरवाज़े से जुड़ी कहानियां आपको दंग कर देंगी। ये जगह दिल्ली के मोस्ट हॉन्टेड प्लेस (Most Haunted Place) में से एक है। ऐसा कहा जाता है कि जब मानसून (Monsoon) आता है, तो इस मोन्यूमेंट (Monument) की छत से खून की धारा बहती है।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि,जहांगीर ने इस जगह पर बैरम खान के पोते-पोतियों को सार्वजनिक रूप से फांसी देने का आदेश दिया था। जहाँगीर ने अपनी ताकत दिखाने के लिए उनके डेड बॉडीज (Dead Bodies)को कई दिनों तक वहाँ लटकाए रखा था। इसलिए आप जब भी यहां आए जरा सावधानी बरतें। 5. फ़िरोज़ शाह कोटला किला (Feroz Shah Kotla Fort)- दिल्ली में सबसे पॉपुलर हिस्टोरिकल प्लेसिस (Popular Historical Places) में से एक होने के अलावा, इसे शहर के सबसे हॉन्टेड जोन (Haunted Zone) में से एक भी माना जाता है। लोगों की मानें तो इस प्लेस पर जिन्न देखे गए हैं, जो 14 सेंचुरी (Century) के हैं। लोगों ने दावा किया है कि उन्होंने डरावनी आवाज़ें सुनी हैं, किसी बुरे साये (Bad Soul) को महसूस किया है और कई बार नेगेटिव एनर्जी (Negative Energy) को फील (Feel) किया गया है।वैसे किला आम तौर पर एक पीसफुल (peaceful) जगह है, लेकिन हर गुरुवार (Thursday) शाम को लोग, वहां रहने वाले जिन्नों को खुश करने के लिए इकट्ठा होते हैं। उन्हें खुश करने के अनुष्ठान करते है जिस बीच , कई लोगो ने किसी इनविजिबल (Invisible) पॉवर का धक्का महसूस किया है। आप पूरे दिन फ़िरोज़ शाह कोटला किले में जा सकते हैं, लेकिन अगर आपके पास स्ट्रॉन्ग हार्ट (Strong heart) है और आप अपनी क्रायोसिटी (Criosity) को शांत करना है तो मेरी सलाह ये है कि आपको कभी भी यहां अकेले नहीं जाना चाहिए। 6. भूली भटियारी का महल (Bhuli Bhatiyari Ka Mahal)- ये जगह दिल्ली की ऐसी इकलौती जगह है जिसका नाम ही काफ़ी हांटेड है। भूली भटियारी का महल… जिसे कभी तुगलक सम्राटों द्वारा हंटर लॉज (Hunter Laudge) के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। इस जगह पर कई अनबेलिवेबल इंसीडेंट (Unbelivable Incident) की कई रिपोर्टें मिली हैं, जिनमें से कुछ में आगे-पीछे कदमों के चलने, डरावनी हंसी और लोगों के गायब होने के दावे शामिल हैं। कई रीजंस (Reasons) की वजह से फिलहाल इसके पीछे की मिस्ट्री (Mystery) को फिलहाल सॉल्व (Solve) नही किया गया है, और बहुत कम लोगों में आगे की जांच करने की हिम्मत थी। वैसे तो , यह जानकर हैरानी हो सकती है कि भूली भटियारी एक्चुअल (Actual) में एक प्रमुख टूरिस्ट प्लेस (Tourist place) है। अगर आप इस स्थान पर जाना चाहते हैं, तो अपने साथ कुछ दोस्तों को लाएँ ताकि आप खंडहरों को अच्छे से बिना डरे देख सकें। लेकिन ध्यान रखें कि आप ये रिस्क (Risk) दिन के समय ही लें। 7. खूनी नाडी (Khooni Nadi)- तो जैसा की आपको इस नाम को सुनते ही महसूस हो गया होगा की ये जगह कितनी डरावनी है, खूनी नाड़ी (खूनी का मतलब खूनी, और नाड़ी का मतलब नदी)। इस इलाके से जुड़ी दिल दहला देने वाली बात ये है की, जो कोई भी नदी के बहुत करीब आएगा वह उसमें समा जाएगा। इस प्लेस से जुड़े ऐसे कई रयूमर्स (Rumours) ऐसे है ,जो की बताते हैं कि इस पानी में जाने वाले कई लोग अब तक वापस नहीं आए। 8.