Galta Ji: जयपुर के इस मंदिर में कभी नहीं सूखती जलधारा
जयपुर घूमने की बात हो तो ज्यादातर लोगों की लिस्ट में हवा महल, आमेर किला, सिटी पैलेस और नाहरगढ़ जरूर आते हैं। लेकिन जयपुर की पुरानी गलियों और भीड़ से थोड़ा दूर निकलें तो अरावली की पहाड़ियों के बीच एक ऐसी जगह मिलती है, जिसका माहौल बाकी जयपुर से बिल्कुल अलग है। यहां ऊंची पहाड़ियों के बीच मंदिर हैं, पत्थरों से बने पुराने रास्ते हैं, प्राकृतिक जलधारा है और जगह-जगह बंदरों की टोलियां घूमती दिखाई देती हैं। यह जगह है गलता जी मंदिर, जिसे विदेशी पर्यटकों के बीच अक्सर मंकी टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। पहली बार यहां आने पर आपको एक साथ कई चीजें देखने को मिलती हैं—धार्मिक स्थल, पुरानी वास्तुकला, पहाड़, पानी के कुंड और जयपुर का दूर तक फैला हुआ नजारा। Galta Ji की खास बात यही है कि यहां सिर्फ एक मंदिर देखने नहीं जाना पड़ता। मंदिर परिसर में घूमते हुए कभी किसी पुराने भवन की नक्काशी ध्यान खींचती है, कभी कुंड में स्नान करते श्रद्धालु नजर आते हैं और कभी कोई बंदर आपके हाथ में पकड़ा सामान देखकर आपके पास आ जाता है। अगर आप जयपुर में कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो शहर के आम पर्यटन स्थलों से थोड़ा अलग हो, तो Galta Ji आपकी यात्रा में शामिल की जा सकती है। लेकिन यहां जाने से पहले कुछ जरूरी बातें जानना बहुत काम आएगा। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा है गलता जी Galta Ji जयपुर के पुराने हिस्से से ज्यादा दूर नहीं है, लेकिन यहां पहुंचते ही शहर का माहौल काफी बदल जाता है। चारों तरफ अरावली की पहाड़ियां और उनके बीच बनी संकरी घाटी इस जगह को एक अलग ही रूप देती हैं। मंदिर परिसर में कई छोटे-बड़े मंदिर, मंडप, कुंड और धार्मिक स्थल हैं। यही वजह है कि Galta Ji को सिर्फ एक मंदिर कहना थोड़ा कम होगा। यह एक पूरा धार्मिक और ऐतिहासिक परिसर है, जहां प्रकृति भी इसका हिस्सा लगती है। सुबह के समय यहां का माहौल खास तौर पर अच्छा लगता है। पहाड़ियों के बीच आती धूप, पक्षियों की आवाज और मंदिर के आसपास घूमते बंदर मिलकर इस जगह को जयपुर के बाकी हिस्सों से काफी अलग बना देते हैं। संत गालव से जुड़ी है गलता जी की पहचान गलता जी के नाम को लेकर एक प्रसिद्ध धार्मिक मान्यता संत गालव से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि संत गालव ने इसी क्षेत्र में लंबे समय तक तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद मिला और यहां एक ऐसी जलधारा का प्रकट होना माना जाता है जो लगातार बहती रहती है। इसी प्राकृतिक जलधारा की वजह से यहां बने कुंडों का धार्मिक महत्व भी बढ़ गया। श्रद्धालु इन्हें पवित्र मानते हैं और विशेष अवसरों पर यहां स्नान करने आते हैं। हालांकि ऐसी बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं का हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें उसी रूप में समझना चाहिए। Galta Ji की खासियत यह भी है कि यहां इतिहास और धार्मिक परंपराएं एक-दूसरे के साथ जुड़ी हुई दिखाई देती हैं। गलता जी का आज का मंदिर कब बना? जिस विशाल मंदिर परिसर को आज हम Galta Ji के नाम से जानते हैं, उसका वर्तमान स्वरूप मुख्य रूप से 18वीं शताब्दी से जुड़ा माना जाता है। जयपुर के शासक सवाई जयसिंह द्वितीय के दरबार से जुड़े दीवान राव कृपाराम ने इस परिसर के निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इससे पहले भी यह क्षेत्र साधु-संतों और धार्मिक साधना से जुड़ा हुआ माना जाता था। बाद में यहां मंदिरों और मंडपों का निर्माण हुआ और पूरा परिसर एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में विकसित हुआ। आज Galta Ji में घूमते समय इसकी इमारतों में आपको राजस्थानी स्थापत्य के साथ दूसरी वास्तुशैली का प्रभाव भी दिखाई देता है। यही मिश्रण इसे जयपुर के दूसरे मंदिरों से थोड़ा अलग बनाता है। यहां का मंदिर महल जैसा क्यों दिखता है? Galta Ji की वास्तुकला इसकी सबसे दिलचस्प बातों में से एक है। आमतौर पर मंदिर का नाम सुनते ही लोगों के मन में शिखर और गर्भगृह वाली पारंपरिक इमारत की तस्वीर आती है, लेकिन यहां कई हिस्से किसी पुराने महल या हवेली जैसे दिखाई देते हैं। गुलाबी बलुआ पत्थर से बनी इमारतें पहाड़ियों के बीच काफी खूबसूरत लगती हैं। बड़े मेहराब, खंभे, झरोखे और दीवारों पर बने पुराने चित्र परिसर को राजस्थानी महल जैसा रूप देते हैं। कई हिस्सों में रंगीन भित्ति चित्र भी देखने को मिलते हैं। इनमें धार्मिक प्रसंगों और देवी-देवताओं से जुड़ी आकृतियां दिखाई देते हैं। अगर आपको पुरानी इमारतों की बारीकियां देखना पसंद है, तो Galta Ji में सिर्फ मुख्य मंदिर पर ध्यान न देकर आसपास की दीवारों और छतों को भी जरूर देखें। गलता जी के कुंड आखिर इतने खास क्यों हैं? Galta Ji की पहचान यहां मौजूद पवित्र कुंडों से भी होती है। पहाड़ी से आने वाली प्राकृतिक जलधारा को स्थानीय धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व दिया जाता है और इसी पानी से जुड़े कई कुंड परिसर में बने हुए हैं। इनमें गलता कुंड को सबसे प्रमुख माना जाता है। इसके अलावा हनुमान कुंड समेत दूसरे कुंड भी हैं। इन कुंडों के आसपास सीढ़ियां और पुराने पत्थर के निर्माण दिखाई देते हैं। धार्मिक मान्यता के कारण कई श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं। खास त्योहारों के दौरान इन कुंडों के आसपास काफी भीड़ भी हो सकती है। अगर आप Galta Ji घूमने जा रहे हैं, तो कुंडों को देखने के साथ वहां की स्वच्छता और धार्मिक मर्यादा का भी ध्यान रखें। गौमुख से आती है पानी की धारा गलता जी के कुंडों से जुड़ी सबसे चर्चित चीज गौमुख है। पहाड़ी की चट्टान में बनी गाय के मुंह जैसी आकृति से पानी निकलता दिखाई देता है, जिसे गौमुख कहा जाता है। स्थानीय धार्मिक मान्यता में इस जलधारा को बहुत पवित्र माना जाता है। यही पानी नीचे बने कुंडों तक पहुंचता है। Galta Ji में यह जगह देखने पर आपको समझ आता है कि इस परिसर को सिर्फ मंदिर बनाकर नहीं बसाया गया था, बल्कि यहां मौजूद प्राकृतिक भूगोल भी इसकी पहचान का हिस्सा है। पहाड़ी, पानी और मंदिर—तीनों एक साथ दिखाई देते हैं। मकर संक्रांति पर गलता जी का माहौल बदल जाता है मकर संक्रांति के समय Galta Ji में