Festival Train Rush: दिवाली-छठ पर ट्रेनों में भारी भीड़
दिवाली हो या छठ, इन त्योहारों के आते ही घर से दूर रहने वाले लोगों के मन में बस एक ही बात चलती है—किसी तरह समय पर घर पहुंच जाएं। Delhi, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद और दूसरे बड़े शहरों में नौकरी या मजदूरी करने वाले हजारों लोग इन दिनों अपने गांव लौटने की तैयारी करते हैं। किसी को मां के हाथ का खाना खाना है, किसी को बच्चों के साथ त्योहार मनाना है, तो कोई पूरे साल इंतजार करने के बाद छठ पूजा में अपने परिवार के साथ शामिल होना चाहता है। लेकिन घर पहुंचने की यह खुशी हर किसी के लिए आसान नहीं होती। टिकट की मारामारी, लंबी वेटिंग लिस्ट, रेलवे स्टेशन पर भीड़ और ट्रेन में चढ़ने की परेशानी कई बार सफर को मुश्किल बना देती है। इस साल भी Festival Train Rush के बीच ऐसी ही तस्वीरें सामने आ रही हैं। उत्तर प्रदेश के वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने को लेकर यात्रियों के बीच मारपीट का वीडियो सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब त्योहारों पर घर जाने वालों की संख्या इतनी बढ़ जाती है, तो रेलवे की तैयारियां यात्रियों के लिए कितनी कारगर साबित हो रही हैं? वाराणसी कैंट स्टेशन पर क्या हुआ? सीट और ट्रेन में चढ़ने को लेकर हुई मारपीट 7 नवंबर 2026 को वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से यात्रियों के बीच मारपीट का एक वीडियो सामने आया। खबरों के मुताबिक, दिवाली पर घर जाने के लिए यात्रियों की भारी भीड़ थी। इसी दौरान पवन एक्सप्रेस में चढ़ने और यात्रा करने को लेकर कुछ युवकों और एक यात्री के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट होने लगी। Festival Train स्टेशन पर मौजूद दूसरे यात्री भी इस घटना को देखने के लिए जमा हो गए। कुछ लोग खड़े होकर सब देखते रहे, जबकि कुछ ने बीच-बचाव करके झगड़ा शांत कराने की कोशिश की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल गया। यह घटना Festival Train Rush के दौरान यात्रियों के सामने आने वाली परेशानियों की एक तस्वीर जरूर दिखाती है। हालांकि, किसी भी तरह की मारपीट को सही नहीं ठहराया जा सकता। सीट को लेकर विवाद हो या ट्रेन में चढ़ने की जल्दबाजी, ऐसी स्थिति में खुद पर काबू रखना जरूरी है। एक छोटी-सी बहस भी किसी यात्री के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। दिवाली और छठ पर ट्रेनों में इतनी भीड़ क्यों बढ़ जाती है? भारत में त्योहारों के समय ट्रेन से सफर करने वालों की संख्या हर साल बढ़ जाती है। इसकी एक बड़ी वजह रोजगार और पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर रहने वाले लोग हैं। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहुत से लोग Delhi, मुंबई, गुजरात, पंजाब और दूसरे राज्यों में काम करते हैं। दिवाली और छठ उनके लिए परिवार के पास लौटने का खास मौका होते हैं। Festival Train खासकर छठ पूजा के समय बिहार और पूर्वांचल जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। कई लोग महीनों पहले से टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें कंफर्म टिकट नहीं मिल पाता। ऐसे में कुछ लोग वेटिंग टिकट के भरोसे रहते हैं, तो कुछ जनरल टिकट लेकर सफर करने का फैसला करते हैं। Festival Train Rush की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि एक ही समय में बहुत बड़ी संख्या में लोग कुछ खास रूटों पर यात्रा करना चाहते हैं। Delhi से पटना, दरभंगा, सहरसा, मुजफ्फरपुर, छपरा और गोरखपुर जाने वाली ट्रेनों पर इसका असर साफ दिखाई देता है। गुजरात और महाराष्ट्र से बिहार आने वाले यात्रियों को भी कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता है। रेलवे स्पेशल ट्रेनें चलाता है, लेकिन यात्रियों की मांग हर रूट और हर तारीख पर एक जैसी नहीं होती। किसी ट्रेन में सीट मिल जाती है, तो दूसरी ट्रेन में लंबी वेटिंग रहती है। इसी वजह से Festival Train Rush के दौरान सफर की योजना बनाना आम दिनों के मुकाबले काफी मुश्किल हो जाता है। जनरल कोच की हालत: बैठने की जगह नहीं, दरवाजे तक भीड़ त्योहारों के समय सबसे ज्यादा परेशानी जनरल और अनारक्षित कोच में सफर करने वाले यात्रियों को होती है। सामान्य दिनों में भी इन डिब्बों में भीड़ रहती है, लेकिन Festival Train Rush के दौरान हालात और मुश्किल हो सकते हैं। कई बार कोच में इतनी भीड़ हो जाती है कि यात्रियों को खड़े होने की जगह भी आसानी से नहीं मिलती। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है। किसी को 10 घंटे सफर करना है, तो किसी को 20 घंटे से भी ज्यादा समय ट्रेन में बिताना पड़ता है। ऐसे में बैठने की जगह न मिलना, सामान रखने की परेशानी और शौचालय तक पहुंचने में दिक्कत यात्रियों को थका देती है। Festival Train भीड़ बढ़ने पर कुछ यात्री ट्रेन के दरवाजे के पास खड़े होकर सफर करते हैं। यह बेहद खतरनाक है। चलती ट्रेन के पायदान पर खड़े रहना या दरवाजे पर लटककर यात्रा करना कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकता है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए ऐसी भीड़ में सफर करना काफी मुश्किल हो जाता है। Festival Train Rush के दौरान यात्रियों को यह समझना जरूरी है कि ट्रेन में किसी तरह जगह बना लेना ही सुरक्षित सफर नहीं है। अगर डिब्बे में बहुत ज्यादा भीड़ है, तो रेलवे स्टाफ या सुरक्षा कर्मियों से मदद मांगनी चाहिए। जान जोखिम में डालकर यात्रा करना किसी भी हालत में सही नहीं है। कंफर्म टिकट मिलना क्यों बन जाता है बड़ी चुनौती? त्योहारों के मौसम में टिकट बुकिंग की परेशानी लगभग हर उस व्यक्ति को होती है जो अपने घर जाने की योजना बना रहा होता है। कई लोकप्रिय रूटों पर टिकट खुलते ही सीटें तेजी से भर जाती हैं। ऐसे में यात्रियों को वेटिंग टिकट मिलता है या फिर उन्हें दूसरी तारीख और ट्रेन तलाशनी पड़ती है। IRCTC की वेबसाइट और ऐप से टिकट बुक करने वाले लोगों को भी कई बार व्यस्त समय में परेशानी हो सकती है। जब बहुत सारे यात्री एक साथ टिकट बुक करने की