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नीलगिरी तहर का आशियाना है तो एराविकुलम नेशनल पार्क

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एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (Eravikulam National Park) जिसे राजमलाई नेशनल पार्क भी कहा जाता है, केरल के इडुक्की और एर्नाकुलम जिले में स्थित है। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान केरल का सबसे पुराना और बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। यह नेशनल पार्क पश्चिमी घाट के पहाड़ियों में अवस्थित है। एराविकुलम नेशनल पार्क लगभग 97 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1978 में हुई थी। एराविकुलम नेशनल पार्क की स्थापना नीलगिरी तहर के संरक्षण के लिए की गयी थी जो इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुत अधिक संख्या में निवास करती है। अनामुडी (2695 मीटर) जो दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी है, एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में ही है। यह राष्ट्रीय उद्यान पूयमकुट्टी और इदमलयार जंगलों से घिरा हुआ है। इस राष्ट्रीय उद्यान में दो नदियां बहती है जो चिन्नार और पम्बर है। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास (History of Eravikulam National Park) सर्वप्रथम, 1971 से पहले तक इस राष्ट्रीय का संरक्षण ‘कानन देवन हिल्स प्रोड्यूस कंपनी’ (Kanan Devan Hills Produce Company) करती थी। 1971 के पश्चात इस कंपनी से संरक्षण का अधिकार केरल सरकार ने ले लिया। 1975 में केरल सरकार द्वारा इस उद्यान को एराविकुलम-राजमाला वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद 1978 में इसे नेशनल पार्क बना दिया गया। एराविकुलम नेशनल पार्क में फॉउना (Fauna in Eravikulam National Park) एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं जिनमें मैमल्स की 26 प्रजातियाँ, एम्फीबियन की 19 प्रजातियाँ, तितलियों की 101 प्रजातियाँ और बर्ड्स की 132 प्रजातियाँ शामिल है। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में सर्वाधिक रूप से नीलगिरि तहर निवास करते है जिनकी संख्या इस उद्यान में 750 के करीब है। नीलगिरि तहर के अलावा यहाँ पाए जाने वाले जीवों में ब्लैक एंड ऑरेंज फ्लाईकैचर (Black and Orange Flycatcher), नीलगिरि पिपिट (Nilgiri Pipit), नीलगिरि वुड पिजन (Nilgiri Wood Pigeon), सफेद बेलदार शॉर्टविंग (White-bellied Shortwing), केरल लाफिंगथ्रश (Kerala Laughingthrush) आदि शामिल है। वही यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में बाघ (Tiger), हाथी (Elephant), तेंदुआ (Leopard), लायन-टेल्ड मकाक (Lion-tailed Macaque), सांभर (Sambhar), गौर (Gaur), भारतीय मंटजेक (Indian Muntjac), सुनहरा सियार (Golden Jackal), वाइल्ड कैट (Wild Cat), वाइल्ड डॉग (Wild Dog), ढोल (Dhole), नीलगिरि लंगूर (Nilgiri Langur), धारीदार गर्दन वाला नेवला (Striped-necked Mongoose), भारतीय साही (Indian Porcupine), नीलगिरि मार्टन (Nilgiri Marten), नीलगिरि फ्लाईकैचर (Nilgiri Flycatcher), छोटे पंजे वाला ऊदबिलाव (Short-toed Beaver), सुर्ख नेवला (Ruddy Mongoose), डस्की पाम गिलहरी (Dusky Palm Squirrel), पालनी फोररिंग (Palani Four-ringed), रेड डिस्क बुशब्राउन (Red Disc Bushbrown) आदि है। एराविकुलम नेशनल पार्क में फ्लोरा (Flora in Eravikulam National Park) अगर बात की जाए एराविकुलम नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पाए जाने वाले वनस्पतियों की कुछ प्रमुख प्रजातियाँ में एक्टिनोडाफेन बॉर्डिलोनी (Actinodaphne Bordiloni), माइक्रोट्रोपिस रामिफ्लोरा (Microtropis Ramiflora), पिटोस्पोरम टेट्रास्पर्मियम (Pittosporum Tetraspermium), सिसिजियम अरोनोटियानम (Syzygium Auronotianum), क्राइसोपोगोन ज़ेलानियस (Chrysopogon Zelanius), यूपेटोरियम एडेनोफोरम (Uupatorium Adenoforam), स्ट्रोबिलेंथस कुंथियानस (Strobilanthus Kunthianus), यूलिया फियोथ्रिक्स (Eulea Phaeothrix), ट्रिपोजेन ब्रोमोड्स (Trypogena Bromodes) और अरुंडिनेला फस्काटा (Arundinella Fuscata) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट एराविकुलम नेशनल पार्क (Best time to visit Eravikulam National Park) अगर आप एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से फरवरी) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। फरवरी से लेकर मार्च महीने तक यह राष्ट्रीय उद्यान बंद रहता है। कैसे पहुंचे एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Eravikulam National Park)?

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अपने हाथियों के लिए मशहूर है केरल का पेरियार नेशनल पार्क

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केरल राज्य अपने रिच कल्चर और बेहतरीन नेचुरल टूरिस्ट स्पॉट्स के कारण पूरे भारत में फेमस है और यहां दुनिया के कोने कोने से लोग घूमने के लिए आते हैं। ऐसे में यहां के लोगों को यहां का कल्चर जितना पसंद आता है, उससे कहीं ज्यादा यहां के लोगों की सोच और उनका व्यवहार पसंद आता है। इसके पीछे का कारण है यहां रहने वाले मेहनती और पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग। अधिकतर केरल को समुद्री तटों से जोड़कर देखा जाता है लेकिन, केरल में इन बीचों के अलावा बहुत से केले के बागान, नारियल के पेड़ और हाथी भी मौजूद हैं। जो यहां की संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। अगर केरल की बात हो और गजराज का जिक्र ना हो तो केरल का किस्सा अधूरा माना जाएगा। ऐसे में अगर आप केरल घूमने के लिए जा रहे हैं तो आप किसी ऐसी जगह घूमने जरूर जाएं जहां पर आप हाथियों को देख सके और फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं केरल के एक ऐसे नेशनल पार्क के बारे में जहां जाकर आप केरल के हाथियों को देख पाएंगे और उनकी सवारी भी कर पाएंगे। क्यों प्रसिद्ध है पेरियार नेशनल पार्क (Why is Periyar National Park famous)? पेरियार नेशनल पार्क 350 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ एक ऐसा नेशनल पार्क है जो हाथियों और बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। पेरियार नेशनल पार्क को दो नदियों का पानी उपलब्ध होता है। जिसमें से पहली नदी का नाम है पेरियार और दूसरी नदी का नाम है पांबा। यह नेशनल पार्क 1934 में नीली कक्कांपेट्टी गेम सेंचुरी के नाम से स्थापित किया गया था। इस नेशनल पार्क का नाम 1950 में बदलकर पेरियार वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रखा गया। इस पार्क के देखरेख का काम डिपार्मेंट आफ फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ केरल और साथ ही गवर्नमेंट आफ इंडिया द्वारा संभाला जाता है।अगर बात करें यहां मिलने वाले पेड़ों के बारे में तो यहां आपको आम, जामुन, इमली, अंजीर, किनो, बाँस, चंदन और लाल चंदन जैसे पेड़ देखने को मिलेंगे।इस पार्क में स्तनधारियों की 35 प्रजातियां, पक्षियों की 265 प्रजातियां, सरीसृपों की 45 प्रजातियां, मछलियों की 40 प्रजातियां और कीड़े तितलियों की 160 प्रजातियां पाई जाती हैं। कैसे पहुंचे पेरियार नेशनल पार्क (How to reach Periyar National Park)? पेरियार नेशनल पार्क आना बहुत हीं आसान है, क्योंकि यहां तक बाय रोड बहुत अच्छी कनेक्टिविटी मिल जाती है। अगर आप आसपास के शहरों से आ रहे हैं तो आप बहुत ही आसानी से बस के जरिए पेरियार नेशनल पार्क तक पहुंच सकते हैं। वहीं अगर आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं तो मदुरै एयरपोर्ट आ सकते हैं। जहाँ से इस पार्क की दुरी लगभग 140 किलोमीटर है। पार्क से सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन कोट्टायम है जो 110 किमी दूर है। पेरियार सभी प्रमुख शहरों से रोड मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा है। पेरियार नेशनल पार्क आने का सबसे सही समय (Best time to visit Periyar National Park): अगर आप पेरियार नेशनल पार्क आ रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि कहीं भी जाने से पहले वहां के मौसम का पता जरूर लगा ले। क्योंकि मौसम अगर अनुकूल न हो तो आपके ट्रिप का मजा किरकिरा हो सकता है। ऐसे में अगर आप पेरियार नेशनल पार्क आ रहे हैं तो आप यह सुनिश्चित करें कि आप अक्टूबर से मार्च तक के समय में जा रहे हैं। क्योंकि उसे समय यहां का टेंपरेचर सबसे ज्यादा सूटेबल होता है। आप बहुत हीं आराम से नेशनल पार्क में घूम पाएंगे। इस समय ना तो आपको बहुत ज्यादा गर्मी सताएगी ना ही बारिश के कारण आपकी जीप रास्ते में फंसेगी। आप बहुत ही अच्छे से इस समय वाइल्डलाइफ को इंजॉय कर सकते हैं।