Latest Travel

Binsar: उत्तराखंड का Hidden Gem,हिमालय का सबसे शानदार नज़ारा

  • 0 Comments

क्या आपने कभी ऐसी जगह की कल्पना की है, जहाँ सुबह आँख खुलते ही सामने बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियाँ दिखाई दें, चारों तरफ घने जंगल हों और हवा में सिर्फ पक्षियों की आवाज़ सुनाई दे? अगर हाँ, तो उत्तराखंड का खूबसूरत हिल स्टेशन Binsar आपके लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन हो सकता है। अल्मोड़ा जिले में स्थित बिनसर लगभग 2,400 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है। प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफी पसंद करने वाले यात्रियों और शांत वातावरण की तलाश करने वालों के बीच बिनसर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में पर्यटक भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशनों की बजाय Binsar की ओर रुख कर रहे हैं। Binsar क्यों है खास? बिनसर की सबसे बड़ी पहचान इसकी शांति और प्राकृतिक सुंदरता है। यहाँ न तो शहरों जैसा शोर सुनाई देता है और न ही अत्यधिक पर्यटक भीड़ दिखाई देती है। देवदार, ओक और बुरांश के घने जंगलों से घिरा Binsar ऐसा अनुभव देता है, जैसे प्रकृति खुद आपके साथ बातचीत कर रही हो। यही वजह है कि इसे उत्तराखंड के सबसे शांत और सुंदर हिल स्टेशनों में गिना जाता है। Zero Point क्यों है Binsar का सबसे बड़ा आकर्षण? Binsar की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक आप यहाँ के प्रसिद्ध Zero Point नहीं पहुँचते। यह बिनसर का सबसे ऊँचा व्यू पॉइंट है। यहाँ से केदारनाथ, नंदा देवी, त्रिशूल, चौखंबा और हिमालय की 50 से अधिक चोटियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है। यहाँ पहुँचने के लिए लगभग 2 किलोमीटर का छोटा ट्रेक करना पड़ता है। जंगल के बीच से गुजरने वाला यह रास्ता अपने आप में एक यादगार अनुभव बन जाता है। Binsar Wildlife Sanctuary में क्या खास है? बिनसर Wildlife Sanctuary लगभग 47 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। यह सेंचुरी अपने घने जंगलों और जैव विविधता के लिए जानी जाती है। यह भारत की उन चुनिंदा वन्यजीव अभयारण्यों में शामिल है, जहाँ आप तय किए गए रास्तों पर पैदल घूम सकते हैं। यदि किस्मत अच्छी हो, तो यहाँ तेंदुआ, हिमालयी काला भालू, काकड़ और कई दुर्लभ वन्यजीव भी देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा यहाँ 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जिसके कारण बिनसर अब Bird Watching के लिए भी लोकप्रिय हो रहा है। Bineshwar Mahadev Temple क्यों देखें? Binsar का नाम ही यहाँ स्थित Bineshwar Mahadev Temple के नाम पर पड़ा है। भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन मंदिर घने देवदार के पेड़ों के बीच स्थित है। मंदिर परिसर का शांत वातावरण और ठंडी पहाड़ी हवा मन को एक अलग ही सुकून देती है। यदि आप प्रकृति के साथ कुछ शांत पल बिताना चाहते हैं, तो यह जगह जरूर देखनी चाहिए। Kasar Devi Temple क्यों है दुनियाभर में प्रसिद्ध? बिनसर से कुछ दूरी पर स्थित Kasar Devi Temple अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। स्वामी विवेकानंद और कई विदेशी कलाकार भी यहाँ आ चुके हैं। मंदिर परिसर से अल्मोड़ा और हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं का शानदार दृश्य दिखाई देता है, जो यात्रियों को लंबे समय तक याद रहता है। Pariyadeva Pashan में क्या देखें? यदि आपको इतिहास में रुचि है, तो Pariyadeva Pashan जरूर देखना चाहिए। अल्मोड़ा-बिनसर मार्ग पर स्थित यह स्थान प्राचीन मेगालिथिक काल के पत्थरों के लिए जाना जाता है। यहाँ बने पुराने निशान और आसपास का प्राकृतिक दृश्य इसे एक अलग पहचान देते हैं। Binsar घूमने का सबसे अच्छा समय वैसे तो बिनसर पूरे साल घूमने योग्य डेस्टिनेशन है, लेकिन अलग-अलग मौसम यहाँ अलग अनुभव लेकर आते हैं। मार्च से जून के दौरान मौसम काफी सुहावना रहता है और ट्रेकिंग तथा घूमने-फिरने के लिए यह समय सबसे लोकप्रिय माना जाता है। जुलाई से सितंबर के बीच बिनसर हरियाली से भर जाता है। बादलों के बीच दिखाई देने वाले जंगल और घाटियाँ मानसून में बेहद आकर्षक लगते हैं। यदि आप ठंड और साफ हिमालयी दृश्य पसंद करते हैं, तो अक्टूबर से फरवरी के बीच की यात्रा भी शानदार अनुभव दे सकती है। Binsar में कहाँ ठहरें? Binsar में कई होमस्टे, जंगल रिसॉर्ट्स और व्यू वाले होटल उपलब्ध हैं। स्थानीय होमस्टे में ठहरने से आपको पहाड़ी भोजन, स्थानीय संस्कृति और शांत वातावरण को करीब से महसूस करने का अवसर मिलता है। कई होमस्टे ऐसे हैं, जहाँ कमरे की खिड़की से सीधे हिमालय की चोटियाँ दिखाई देती हैं। Five Colors of Travel की ओर से 5 खास सुझाव सुबह जल्दी Zero Point पहुँचने की कोशिश करें, क्योंकि इस समय हिमालय का दृश्य सबसे साफ दिखाई देता है। Binsar Wildlife Sanctuary में पैदल घूमने के लिए आरामदायक जूते जरूर पहनें। यदि आप पक्षियों की फोटोग्राफी पसंद करते हैं, तो दूरबीन और कैमरा साथ रखें। स्थानीय पहाड़ी व्यंजन और पारंपरिक भोजन का स्वाद जरूर लें। मार्च और अप्रैल के दौरान यात्रा करें, क्योंकि इस समय बुरांश के लाल फूल पूरे जंगल को बेहद खूबसूरत बना देते हैं। अगर आप ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहाँ जंगल, हिमालय और सुकून एक साथ मिल जाएँ, तो Binsar आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए। उत्तराखंड का यह शांत हिल स्टेशन केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि प्रकृति को करीब से महसूस करने का एक यादगार अनुभव है।

Culture International Travel Villages

Rural Tourism- गाँव की सादगी में छुपा है यात्रा का असली मज़ा!

  • 0 Comments

आजकल यात्रा केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रही। पर्यटक अब गाँव आधारित अनुभव अपनाने लगे हैं, जहां वे स्थानीय जीवन, संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के करीब जा सकते हैं। यह अनुभव मनोरंजन के साथ-साथ नई संस्कृति को समझने, लोगों से संवाद करने और जीवन की सरलता को महसूस करने का भी अवसर देता है। गाँव आधारित Rural Tourism शहर की भागदौड़ और तकनीकी दुनिया से दूर जाकर शांति, स्वच्छ हवा और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कराती है। स्थानीय जीवन का नजदीकी अनुभव गाँवों में घूमते समय पर्यटक को स्थानीय जीवन की सच्चाई और सादगी देखने को मिलती है। किसान अपने खेतों में मेहनत करते हैं, महिलाएं पारंपरिक तरीके से रसोई और हस्तशिल्प में व्यस्त रहती हैं, और बच्चे खुले मैदान में खेलते हैं। यह अनुभव पर्यटकों को सिर्फ देखने वाला नहीं, बल्कि भाग लेने वाला बनाता है, जैसे खेतों में हल चलाना, गाय चराना या हस्तशिल्प में हाथ आजमाना। स्थानीय लोगों से जुड़ना गाँव आधारित यात्रा का सबसे बड़ा फायदा है स्थानीय लोगों के साथ संवाद। गाँव के लोग पर्यटकों को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज और त्यौहारों के बारे में बताते हैं।पर्यटक इन बातचीतों के माध्यम से स्थानीय भाषा, परंपरा और जीवन के छोटे पहलुओं को समझ पाते हैं। साथ ही, हस्तशिल्प कला, देसी खाना बनाना और लोक गीतों का अनुभव यात्रा को असली और यादगार बना देता है। पारंपरिक भोजन का अनुभव गाँव में पर्यटक को स्थानीय स्वाद और भोजन का असली अनुभव मिलता है। हाथ से बने पराठे, देसी घी में पकाया गया भोजन, ताजी सब्जियां और फल – ये न केवल स्वादिष्ट बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होते हैं। इसके अलावा, पर्यटक स्थानीय त्यौहारों और सांस्कृतिक उत्सवों में भाग लेकर गाँव की संस्कृति और जीवनशैली को करीब से महसूस कर सकते हैं। यह अनुभव शहर की यात्रा में कभी नहीं मिलता। प्राकृतिक सुंदरता और जीवनशैली का मेल गाँव आधारित यात्रा पर्यटकों को हरी-भरी घाटियों, नदी किनारे, घास के मैदान, पहाड़ और खेत के बीच ले जाती है। यह अनुभव मानसिक शांति के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझने का अवसर भी देता है। सूर्योदय के समय खेतों में धुंध और नदियों का पानी, शाम के समय पहाड़ों पर ढलता सूरज – ये सब दृश्य यात्रा को एक अविस्मरणीय अनुभव बना देते हैं। भारत के विशेष गाँव और उनके अनुभव भारत में कई छोटे गाँव हैं, जो अपने लोक जीवन, हस्तशिल्प और पारंपरिक संस्कृति के लिए प्रसिद्ध हैं। हर गाँव अपने अनोखे रंग और संस्कृति के साथ यात्रा को और यादगार बना देता है। गाँव यात्रा सिर्फ पर्यटन नहीं, एक अनुभव है गाँव आधारित यात्रा केवल पर्यटन नहीं है, बल्कि यह एक जीवन शैली का अनुभव है। यह पर्यटक को स्थानीय जीवन, संस्कृति और प्रकृति के करीब ले जाती है।यदि आप अपनी अगली यात्रा को यादगार बनाना चाहते हैं, तो शहर की भीड़ छोड़कर गाँव की सादगी और जीवन के असली रंगों के बीच समय बिताएं। यह अनुभव आपकी यात्रा को अनोखा बनाने के साथ-साथ आपको नई समझ, सरलता और शांति भी देगा।

Destination Lifestyle Travel Villages

Eco Tourism क्या है इको-टूरिज़्म? होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन!

  • 0 Comments

अगर आप शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और शोर से परेशान हो चुके हैं और आपका मन शहर से दूर कहीं शांत, हरी-भरी जगह पर जाने का करता है जहां आपको शहर के अशांत माहौल के मुकाबले थोड़ा सुकून मिल सके। तो इको-टूरिज़्म आपके लिए बिल्कुल सही चीज़ है। इको-टूरिज़्म का मतलब सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि उन जगहों पर जाना है जहाँ आप एनवायरनमेंट को बिना नुकसान पहुँचाए मज़ा लेते हैं और साथ ही गाँव के लोगों की रोज़ी-रोटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। यह ऐसा तरीका है जिससे नेचर भी बची रहती है और गाँव वाले भी कमाई कर लेते हैं जिससे दोनों का फायदा होता है। Eco Tourism गाँव की संस्कृति- Eco Tourism इको-टूरिज़्म का सीधा सा मतलब है नेचर के बीच घूमना, पर इस यात्रा के दौरान कुछ बातों का खास ध्यान रखना होता है जैसे जंगल, पहाड़, झरने या किसी भी गाँव में जाएँ तो वहाँ गंदगी न करें, कचरा इधर-उधर न फेंकें, पानी-बिजली बेवजह खराब न करें और जो भी स्थानीय नियम हों, उन्हें मानें। इसके साथ गाँव वालों की संस्कृति, उनका खाना-पीना, पहनावा और रीति-रिवाज़ को भी सम्मान दें। ऐसी यात्राओं में न केवल आपको शहर के अशांत माहौल से छुटकारा मिलेगा बल्कि गांव वालों को भी रोजगार मिलेगा। साफ हवा, शांति, नेचर का मजा यही तो इन गांवों की खासियत होती है। गांव वालों होमस्टे चला कर, गाइड बनकर, लोकल खाना खिलाकर या अपने हाथ के बनाए सामान को बेचकर ये लोग अपनी कमाई करते है। इसलिए इको-टूरिज़्म नेचर को भी बचाता है और गाँव वालों की जेब भी मजबूत करता है। मतलब मज़ा भी पूरा और भलाई भी पूरी। उत्तराखंड का होमस्टे मॉडल: महिलाएँ बदल रहीं अपनी दुनिया उत्तराखंड का होमस्टे मॉडल सच में एक ऐसी कहानी है जहाँ गाँव की महिलाएँ अपनी ज़िंदगी खुद बदल रही हैं। मुनस्यारी के पास सरमोली गाँव में 2004 में मल्लिका विर्दी ने हिमालयन आर्क होमस्टे कार्यक्रम शुरू किया, और खास बात ये है कि पूरा होमस्टे सिस्टम गाँव की महिलाएँ ही संभालती हैं। यहाँ आने वाले मेहमान मडुआ की रोटी, पहाड़ी राजमा जैसे बिल्कुल देसी और स्वादिष्ट खाने का मज़ा लेते हैं, खेतों में मदद करते हैं और गाँव की असली ज़िंदगी को करीब से महसूस करते हैं। इस मॉडल से सरमोली की महिलाएँ साल में करीब 1.5 लाख रुपये तक कमा लेती हैं, जो उनके लिए बहुत बड़ी बात है और इससे उनकी पहचान और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी ‘दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना’ के ज़रिए पुराने पहाड़ी घरों को लकड़ी और पत्थर से बने सुंदर, पारंपरिक होमस्टे में बदलने में मदद की है। सरकार ट्रेनिंग, लोन और मार्केटिंग का पूरा सपोर्ट देती है, और आज लगभग 5,000 घर इस योजना से जुड़ चुके हैं। इससे गाँव में रोजगार बढ़ा है और लोग शहरों की ओर कम जा रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें अपने ही गाँव में अच्छी कमाई का मौका मिल रहा है। इको-स्टे: नेचर के बीच एक ‘ग्रीन’ ठहराव Eco Tourism इको-स्टे असल में ऐसे ठहरने की जगह होती हैं, जहाँ आप नेचर के बीच आराम से रहते हैं और साथ ही पर्यावरण का ख्याल भी रखते है। यहाँ ज़्यादातर बिजली सोलर से आती है, बारिश का पानी इकट्ठा करके इस्तेमाल किया जाता है, और घर भी मिट्टी, लकड़ी या दूसरे इको-फ्रेंडली तरीक़े से बनाए जाते हैं। कचरा अलग करके कम्पोस्ट बनाया जाता है, पानी दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है मतलब हर काम सोच-समझकर किया जाता है। जैसे जिम कॉर्बेट के पास क्यारी गाँव में बने इको-स्टे बिल्कुल पुराने पहाड़ी घरों की तरह दिखते हैं। यहाँ रहने पर आप शांत माहौल का मज़ा लेते हैं, जंगल सफारी और एडवेंचर एक्टिविटी भी कर सकते हैं। कुल मिलाकर, ऐसा लगता है जैसे आप नेचर की गोद में आराम कर रहे हों। क्यारी गाँव की चुनौती: इको-टूरिज़्म और बाघों का संघर्ष क्यारी गाँव का इलाका अपनी खूबसूरती की वजह से और भी खास बन जाता है। क्योंकि जिम कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व बिलकुल पास में होने से यहाँ का जंगल घना है, हवा बिल्कुल ताज़ा लगती है और वाइल्डलाइफ़ का असली मज़ा मिलता है। यहाँ बाघों की अच्छी-खासी संख्या मिलती है, जो ये दिखाता है कि जंगल कितना हेल्दी और समृद्ध है। इसी वजह से क्यारी और उसके आस-पास का इलाका नेचर और वाइल्डलाइफ़ पसंद करने वालों के लिए एकदम परफेक्ट जगह है। यहाँ कई बढ़िया इको-स्टे और रिसॉर्ट भी बने हुए हैं, जो जिम कॉर्बेट के नेचर वाइब से मैच करते हैं लकड़ी और पत्थर के कमरे, चारों तरफ हरियाली, पंछियों की आवाज़ें और पूरा शांत माहौल सब मिलकर स्टे का अनुभव और भी खास बना देते हैं। गाँव वाले इको-टूरिज़्म को पूरी तरह सपोर्ट करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें होमस्टे, लोकल गाइड, खेती और कारीगरी जैसे कामों में अच्छी कमाई मिलती है। लोग चाहते हैं कि इको-टूरिज़्म बढ़े, लेकिन ऐसे कि जंगल भी सुरक्षित रहे और गाँव वालों की खुशी और रोज़गार भी बना रहें। राष्ट्रीय रणनीति: ग्रामीण होमस्टे को बढ़ावा भारत सरकार भी अब ग्रामीण इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने में लगी है। कोशिश ये है कि गाँवों में बने होमस्टे भी पर्यटन का बड़ा हिस्सा बनें और वहाँ के लोगों को अच्छा रोज़गार मिले। सरकार चाहती है कि होमस्टे चलाने वालों को बिजली-पानी की वही दरें मिलें जो सामान्य घरों को मिलती हैं, ताकि उनका खर्च कम हो सके। NIDHI पोर्टल के ज़रिए हर होमस्टे की एक डिजिटल पहचान बनाई जा रही है, जिससे ऑनलाइन बुकिंग भी आसान हो जाएगी। आखिर में बात यही है कि इको-टूरिज़्म तभी सफल है जब तीनों चीज़ें एक साथ खुश रहें प्रकृति सुरक्षित रहे, गाँव वालों की कमाई और रोजगार बढ़े और पर्यटकों को अच्छा अनुभव मिले। क्यारी गाँव जैसी जगहें यही दिखाती हैं कि इको-टूरिज़्म सिर्फ कमाई का ज़रिया नहीं, बल्कि एक संतुलन है जहाँ नेचर, लोग और टूरिज़्म तीनों को बराबर महत्व दिया जाता है। अगर ये बैलेंस बना रहे, तो ग्रामीण भारत में इको-टूरिज़्म सच में कमाल कर सकता है।

Delhi Travel

तीस हज़ार बांसों से बना है बांसेरा पार्क, मौजूद है मन मोह लेने वाली खूबसूरती

  • 0 Comments

दिल्ली, भारत की राजधानी, अपने ऐतिहासिक स्मारकों, हलचल भरे बाजारों और स्वादिष्ट खाने के लिए जानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में एक ऐसा पार्क भी है, जो प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का अनमोल उदाहरण है। जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ बांसेरा पार्क की, जो यमुना नदी के किनारे, सराय काले खाँ में स्थित है। पार्क के सामने से हाइवे का शोरशराबा और अंदर माहौल ऐसा है कि आप यह मानिए वहाँ बैठकर आत्मचिंतन कर सकते हैं। यह दिल्ली-एनसीआर का पहला बांस थीम वाला पार्क है, जो अपनी हरियाली, शांति और इको-फ्रेंडली डिज़ाइन के लिए जाना जाता है। सेंतीस एकड़ में फैला यह पार्क न सिर्फ दिल्लीवासियों के लिए, बल्कि आगंतुकों के लिए भी एक आकर्षक जगह है। बांसेरा पार्क के बारे में थोड़ी सी जानकारी बांसेरा पार्क दिल्ली के सराय काले खाँ में यमुना नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसका नाम “बांसेरा” बांस से प्रेरित है, क्योंकि यह पार्क बांस की थीम पर ही बना हुआ है। यहाँ पच्चीस से अधिक प्रजातियों के तीस हजार से ज्यादा बांस के पौधे लगाए गए हैं। जो पार्क को लगभग एक सुन्दर बगीचे का रूप देता है। दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इस पार्क को बनवाया है, और इसे दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने गोद लिया है। 9 अगस्त 2022 को इसका उद्घाटन हुआ, लेकिन 2021 की यमुना की बाढ़ ने इस क्षेत्र को भारी नुकसान पहुँचाया था। इसके बाद डीडीए ने इसे दोबारा जीवंत किया, जिससे आज यह दिल्ली की उम्मीद और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन पाया है । पार्क की खूबसूरती इसकी हरियाली और बांस से बनी संरचनाओं में छुपी है। प्रवेश द्वार, दीवारें, बेंच, और सजावटी सामान- सब कुछ बांस से बना है, जो इसे इको-फ्रेंडली बनाता है। यहाँ का शांत वातावरण दिल्ली की भागदौड़ से राहत देता है। पार्क में सोलर लाइटें लगाई गई हैं, जो रात में अपने आप जल उठती हैं और बिजली की बचत करती हैं। बांस की थीम न सिर्फ सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी फैलाती है। बांसेरा में सिर्फ बांस नहीं, चाँद भी है पार्क में एक विशाल बांस से बना चाँद भी है, जो आप नीचे तस्वीर में देख सकते हैं। इस चांद को आप हुमायूँ के मकबरे से देख सकते हैं और यह रात में बेहद आकर्षक लगता है। यह चाँद दो मंजिल ऊँचे मकान जितना बड़ा है और पर्यटकों के लिए एक खास आकर्षण बना हुआ है। बांसेरा पार्क का इतिहास भले ही नया हो, लेकिन यह दिल्ली के पर्यावरणीय प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पार्क न सिर्फ एक पिकनिक स्थल है, बल्कि बांस के महत्व को समझाने का एक सही उदाहरण भी है। यहाँ की हरियाली, फूलों की क्यारियाँ, और शांत माहौल इसे परिवार, दोस्तों, और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं। झील और म्यूजिकल फव्वारा देख प्रफुल्लित हो उठेंगे आप बांसेरा पार्क की सबसे खास विशेषताओं में से एक है इसकी कृत्रिम झील और उसमें बना म्यूजिकल फव्वारा। पार्क में तीन कृत्रिम झीलें हैं, जो इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाने का काम करती हैं। इनमें से एक झील में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने एक शानदार म्यूजिकल फव्वारा स्थापित किया है। यह फव्वारा शाम के समय रंग-बिरंगी रोशनी और संगीत के साथ नाचता है, जो दर्शकों को बेहद रोमांचक बना देता है। म्यूजिकल फव्वारा शो दिन में दो बार आयोजित होता है पहला शो शाम 6:30 से 7:00 बजे तक और दूसरा शो 7:30 बजे से होता है। यह शो रविवार, सोमवार, और मंगलवार को देखा जा सकता है। झील के किनारे बैठकर इस शो का आनंद लेना एक अलग ही अनुभव है। झील का शांत जल और फव्वारे की रंगीन लहरें बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी को लुभाती हैं। झील के आसपास बांस के पौधे और हरे-भरे लॉन इसे और भी खूबसूरत बनाते हैं। यहाँ बैठकर आप प्रकृति की शांति का एहसास कर सकते हैं, जो दिल्ली जैसे व्यस्त शहर में दुर्लभ ही मानिए।झील का जो क्षेत्र है वह सेल्फी पॉइंट के रूप में भी लोकप्रिय है। यहाँ बांस से बने झूले और फूलों से सजाए गए स्थान हैं, जहाँ पर्यटक तस्वीरें लेना पसंद करते हैं। झील का पानी और आसपास की हरियाली पार्क को एक तरोताज़ा और सुकून भरा माहौल देती है। यहाँ आप परिवार या दोस्तों के साथ पिकनिक का आनंद ले सकते हैं और फव्वारे के शो को देखकर अपनी शाम को यादगार बना सकते हैं। बच्चों के लिए एडवेंचर पॉइंट बांसेरा पार्क सिर्फ शांति और हरियाली तक सीमित नहीं है, यहाँ बच्चों और युवाओं के लिए एडवेंचर पॉइंट भी हैं, जो इसे और आकर्षक बनाते हैं। हाल ही में, दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने पार्क में एक चिल्ड्रन प्ले एरिया का उद्घाटन किया है, जो बच्चों के लिए खास तौर पर डिज़ाइन किया गया है। इस क्षेत्र में बांस से बने झूले, स्लाइड्स, और अन्य खेल उपकरण हैं, जो बच्चों को घंटों व्यस्त रखते हैं।एडवेंचर पॉइंट में बांस से बनी संरचनाएँ न सिर्फ सुरक्षित हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। यहाँ का डिज़ाइन बच्चों को प्रकृति के करीब लाता है, क्योंकि सभी उपकरण बांस और प्राकृतिक सामग्रियों से बने हैं। इसके अलावा, पार्क में कुछ खुले क्षेत्र हैं, जहाँ पर बैडमिंटन या अन्य खेल भी खेले जा सकते हैं। यहाँ का शांत और खुला माहौल इसे एक्टिविटीज़ के लिए आदर्श बनाता है। पार्क में भविष्य में और भी एडवेंचर गतिविधियाँ जोड़े जाने की योजना है। उदाहरण के लिए, बांस से बने लाल किला, कुतुब मीनार, और इंडिया गेट जैसे मिनी मॉडल बनाने की बात चल रही है, जो बच्चों और पर्यटकों के लिए एक रोमांचक अनुभव होगा। यह एडवेंचर पॉइंट परिवारों को एक साथ समय बिताने का मौका देता है। जहाँ बच्चे खेल सकते हैं और बड़े प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। पार्क अभी अपनी प्रगति पर है मतलब अभी इस पार्क में और भी शानदार और आनंदित करने वाले बदलाव होने बाकी हैं। कैफेटेरिया का एरिया यहाँ का कैफेटेरिया इतना खूबसूरत है कि आपका ध्यान खींचने में सक्षम है।बांसेरा पार्क में कफेटेरिया की सुविधा भी है, जो पर्यटकों की सुविधा और आनंद को बढ़ाती है। यह कैफेटेरिया