Railway Yatra: 9 दिन में दक्षिण भारत के 7 प्रमुख तीर्थ
एक ही सफर में अरुणाचलम से कन्याकुमारी तक के प्रसिद्ध मंदिर, ट्रेन यात्रा, होटल, खाना और लोकल ट्रांसफर — जानिए भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन की इस खास Yatra का पूरा रूट, किराया, सुविधाएं और बुकिंग का तरीका। दक्षिण भारत का नाम सुनते ही मन में बड़े-बड़े गोपुरम, प्राचीन मंदिर, समुद्र के किनारे बसे तीर्थ और सदियों पुरानी संस्कृति की तस्वीर आने लगती है। यहां का हर शहर अपने साथ कोई न कोई धार्मिक और ऐतिहासिक कहानी लेकर चलता है। लेकिन अगर आप एक साथ इतने सारे तीर्थ स्थलों की यात्रा का प्लान बनाएं, तो ट्रेन, होटल, खाना, लोकल ट्रांसपोर्ट और हर जगह की बुकिंग अलग-अलग करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। ऐसे में अगर आपको कम बजट में एक साथ कई बड़े तीर्थ स्थलों के दर्शन करने का मौका मिल जाए और यात्रा की ज्यादातर जरूरी चीजें एक ही पैकेज में मिल जाएं, तो सफर काफी आसान हो जाता है। इसी तरह की Yatra के लिए आईआरसीटीसी की ‘दिव्य दक्षिण यात्रा’ एक दिलचस्प विकल्प है। भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन के जरिए कराई जाने वाली यह Yatra 8 रात और 9 दिनों की है। इसमें दक्षिण भारत के सात प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को शामिल किया गया है। शुरुआती इकोनॉमी पैकेज ₹15,800 प्रति व्यक्ति से शुरू होता है। इस पैकेज में ट्रेन यात्रा के साथ होटल, शाकाहारी भोजन, लोकल ट्रांसफर, ट्रैवल इंश्योरेंस और टूर एस्कॉर्ट जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। तो अगर आप दक्षिण भारत की धार्मिक Yatra का सपना देख रहे हैं, लेकिन अलग-अलग बुकिंग और प्लानिंग के झंझट से बचना चाहते हैं, तो यह पैकेज आपके लिए काम का हो सकता है। आइए जानते हैं इस पूरी Yatra की एक-एक जानकारी। दिव्य दक्षिण Yatra आखिर है क्या? आईआरसीटीसी की दिव्य दक्षिण Yatra भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन के जरिए कराई जाने वाली एक खास धार्मिक यात्रा है। यह पहल देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जाने वाली भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन योजना का हिस्सा है। इस Yatra में आपको दक्षिण भारत के अलग-अलग शहरों में स्थित प्रसिद्ध मंदिरों और धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाते हैं। खास बात यह है कि यात्रियों को हर जगह की यात्रा अलग से प्लान नहीं करनी पड़ती। ट्रेन, होटल, भोजन और स्थानीय आने-जाने की व्यवस्था पैकेज में ही शामिल रहती है। यह Yatra कुल 8 रात और 9 दिनों की है। यानी नौ दिनों में आप कई प्रमुख तीर्थ स्थलों को कवर कर सकते हैं और दक्षिण भारत की संस्कृति को करीब से देख सकते हैं। ₹15,800 में क्या-क्या मिलेगा? इस Yatra की सबसे ज्यादा चर्चा इसके शुरुआती ₹15,800 वाले किराए को लेकर होती है। यह इकोनॉमी श्रेणी का किराया है, जिसमें स्लीपर क्लास में ट्रेन यात्रा और बजट होटल में ठहरने की व्यवस्था दी जाती है। इसके अलावा पैकेज में लोकल ट्रांसफर और शाकाहारी भोजन भी शामिल है। यात्रा के दौरान यात्रियों की मदद के लिए टूर एस्कॉर्ट और आईआरसीटीसी की टीम भी रहती है। इस तरह अगर आप खुद से ऐसी Yatra प्लान करते हैं, तो जिन अलग-अलग चीजों की व्यवस्था करनी पड़ती है, उनमें से कई चीजें यहां एक ही पैकेज में मिल जाती हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर खर्च पैकेज में शामिल नहीं होता। मंदिरों के विशेष प्रवेश शुल्क, विशेष पूजा, बोटिंग और कुछ व्यक्तिगत खर्चों का भुगतान यात्री को खुद करना पड़ सकता है। इस Yatra में कौन-कौन से 7 तीर्थ स्थल शामिल हैं? इस धार्मिक Yatra में दक्षिण भारत के सात प्रमुख स्थान शामिल हैं। इनमें तिरुवन्नामलाई, चिदंबरम, तिरुचिरापल्ली, तंजावुर, रामेश्वरम, मदुरै और कन्याकुमारी शामिल हैं। हर जगह का अपना धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। कहीं भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिर हैं, कहीं भगवान विष्णु का विशाल मंदिर परिसर है और कहीं समुद्र के किनारे भारत के दक्षिणी छोर का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। यानी यह Yatra सिर्फ मंदिरों के दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत की वास्तुकला, संस्कृति और इतिहास को देखने का भी मौका देती है। तिरुवन्नामलाई: भगवान शिव के अरुणाचलेश्वर मंदिर के दर्शन इस Yatra के प्रमुख पड़ावों में तिरुवन्नामलाई शामिल है। यहां भगवान शिव को समर्पित अरुणाचलेश्वर मंदिर स्थित है। यह मंदिर पंचभूत स्थलों में से एक माना जाता है और इसे अग्नि लिंगम से जोड़ा जाता है। यात्रा के दौरान यहां पहुंचकर यात्रियों को मंदिर के दर्शन कराए जाते हैं और रात का ठहराव भी तिरुवन्नामलाई में रखा जाता है। दक्षिण भारत के बड़े मंदिरों की तरह यहां का मंदिर परिसर और इसकी वास्तुकला भी इस Yatra को खास बनाती है। अगर आपको प्राचीन मंदिरों और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में रुचि है, तो तिरुवन्नामलाई इस पूरी Yatra के सबसे खास पड़ावों में से एक हो सकता है। चिदंबरम: नटराज मंदिर में शिव के तांडव रूप के दर्शन तिरुवन्नामलाई के बाद Yatra चिदंबरम की ओर बढ़ती है। यहां भगवान शिव के नटराज रूप को समर्पित प्रसिद्ध नटराज मंदिर स्थित है। यह मंदिर अपने धार्मिक महत्व के साथ-साथ अपनी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। चिदंबरम रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर बताई गई है। इसलिए यात्रियों के लिए यहां पहुंचना अपेक्षाकृत आसान रहता है। नटराज मंदिर में भगवान शिव को आनंद तांडव करते हुए नटराज के रूप में पूजा जाता है। दक्षिण भारत के मंदिरों की खास शैली और विशाल गोपुरम इस Yatra में एक अलग तरह का अनुभव देते हैं। तिरुचिरापल्ली: श्रीरंगम का भव्य रंगनाथस्वामी मंदिर इसके बाद यह Yatra तिरुचिरापल्ली यानी त्रिची पहुंचती है। यहां श्रीरंगम में स्थित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपने विशाल मंदिर परिसर के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचकर यात्रियों को मंदिर के दर्शन कराए जाते हैं और रात में त्रिची में ठहरने की व्यवस्था रहती है। दक्षिण भारत की धार्मिक Yatra में श्रीरंगम का अपना अलग महत्व है। मंदिर की विशाल संरचना और यहां का धार्मिक माहौल यात्रियों को दक्षिण भारतीय मंदिर परंपरा को करीब से समझने का मौका देता है। तंजावुर: चोलकालीन वास्तुकला का शानदार उदाहरण अगले दिन Yatra तंजावुर की तरफ बढ़ती है। यहां बृहदेश्वर मंदिर के दर्शन कराए जाते हैं। यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप