Stambheshwar Mahadev Temple Travel Guide
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जिनके साथ कोई न कोई चमत्कार, रहस्य या अनोखी मान्यता जुड़ी हुई है। लेकिन अगर किसी मंदिर की बात करें जो हर दिन आपकी आंखों के सामने समुद्र में गायब हो जाए और कुछ घंटों बाद फिर से उसी जगह दिखाई देने लगे, तो शायद यकीन करना मुश्किल हो जाए। यही वजह है कि Stambheshwar Mahadev Temple आज सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के यात्रियों, फोटोग्राफर्स और श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन चुका है। गुजरात के भरूच जिले के पास अरब सागर के किनारे स्थित Stambheshwar Mahadev Temple को लोग “गायब होने वाला मंदिर” भी कहते हैं। यहां हर दिन समुद्र की लहरें भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक करती हैं। हाई टाइड आने पर पूरा मंदिर समुद्र में डूब जाता है और लो टाइड होते ही दोबारा बाहर आ जाता है। यह दृश्य इतना अद्भुत होता है कि पहली बार देखने वाला व्यक्ति कुछ देर तक समझ ही नहीं पाता कि यह प्रकृति का खेल है या कोई चमत्कार। यही कारण है कि हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक सिर्फ इस अनोखे नजारे को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं। कोई इसे भगवान शिव का चमत्कार मानता है तो कोई समुद्र और प्रकृति का अनूठा संतुलन। लेकिन एक बात तय है कि Stambheshwar Mahadev Temple की यात्रा हर किसी के लिए यादगार बन जाती है। अगर आप गुजरात घूमने की योजना बना रहे हैं और किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां इतिहास, आस्था, प्रकृति और रहस्य एक साथ देखने को मिले, तो Stambheshwar Mahadev Temple आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए। Stambheshwar Mahadev Temple कहाँ स्थित है? Stambheshwar Mahadev Temple गुजरात के भरूच जिले के जंबूसर तालुका के कवि कंबोई गांव में स्थित है। यह मंदिर अरब सागर और माही नदी के संगम के बेहद करीब बना हुआ है। इसी वजह से यहां आने वाले ज्वार-भाटा का सीधा असर मंदिर पर दिखाई देता है। मंदिर शहर की भीड़-भाड़ से काफी दूर शांत वातावरण में स्थित है। चारों ओर समुद्र, खुला आसमान और दूर तक फैली लहरें इस जगह को और भी खास बना देती हैं। जब समुद्र शांत रहता है तो श्रद्धालु पैदल चलते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं। लेकिन जैसे ही ज्वार बढ़ना शुरू होता है, धीरे-धीरे पानी मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंच जाता है और कुछ ही समय बाद पूरा मंदिर समुद्र के अंदर गायब हो जाता है। यही दृश्य Stambheshwar Mahadev Temple को भारत के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में शामिल करता है। Stambheshwar Mahadev Temple का पौराणिक इतिहास Stambheshwar Mahadev Temple का उल्लेख स्कंद पुराण के कुमारिका खंड में मिलता है। माना जाता है कि यह स्थान हजारों साल पुराना है और इसका संबंध भगवान शिव के पुत्र भगवान कार्तिकेय से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस था। उसने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसका वध केवल भगवान शिव का छह दिन का पुत्र ही कर सकता था। वरदान मिलने के बाद तारकासुर ने देवताओं और ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया। पूरी सृष्टि में भय का वातावरण बन गया। तब भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय ने केवल छह दिन की आयु में तारकासुर का वध किया। लेकिन युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान कार्तिकेय को यह एहसास हुआ कि उन्होंने भगवान शिव के एक परम भक्त का वध किया है। इस कारण उनके मन में ग्लानि उत्पन्न हुई। कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने उन्हें भगवान शिव की आराधना करने और प्रायश्चित स्वरूप शिवलिंग स्थापित करने की सलाह दी। तब भगवान कार्तिकेय ने तीन अलग-अलग स्थानों पर शिवलिंग स्थापित किए। उन्हीं में से एक स्थान आज Stambheshwar Mahadev Temple के नाम से प्रसिद्ध है। माना जाता है कि भगवान शिव ने स्वयं यहां प्रकट होकर कार्तिकेय को पापमुक्त होने का आशीर्वाद दिया था। तभी से यह स्थान शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। क्यों कहा जाता है गायब होने वाला मंदिर? Stambheshwar Mahadev Temple की सबसे बड़ी पहचान इसका हर दिन समुद्र में गायब हो जाना है। यह दुनिया के उन गिने-चुने मंदिरों में शामिल है जहां श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने से पहले समुद्र के समय का इंतजार करते हैं। जब समुद्र में हाई टाइड आता है तो पानी धीरे-धीरे मंदिर की सीढ़ियों तक पहुंचता है। कुछ ही मिनटों में पूरा मंदिर पानी के अंदर समा जाता है। उस समय केवल मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज कुछ देर तक दिखाई देता है। इसके बाद वह भी लहरों के बीच ओझल हो जाता है। कुछ घंटों बाद जैसे ही समुद्र पीछे हटता है, Stambheshwar Mahadev Temple फिर से उसी भव्यता के साथ सामने आ जाता है। यह पूरा दृश्य हर दिन दो बार देखने को मिलता है। इसी कारण इसे भारत का Disappearing Temple भी कहा जाता है। क्या यह चमत्कार है या विज्ञान? कई लोग पहली बार Stambheshwar Mahadev Temple को देखकर इसे चमत्कार मान लेते हैं। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इसके पीछे समुद्र का ज्वार-भाटा जिम्मेदार है। यह मंदिर खंभात की खाड़ी के पास स्थित है। इस खाड़ी का आकार फनल जैसा है। इसी कारण यहां समुद्र की लहरें सामान्य जगहों की तुलना में काफी ऊंची उठती हैं। हाई टाइड आने पर पानी तेजी से मंदिर को ढक लेता है। लो टाइड शुरू होते ही वही पानी वापस समुद्र में चला जाता है और मंदिर फिर से दिखाई देने लगता है। हालांकि वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक घटना बताते हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की मान्यता बिल्कुल अलग है। उनका विश्वास है कि स्वयं समुद्र देव हर दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। यही आस्था इस मंदिर को करोड़ों लोगों के लिए बेहद खास बनाती है। Stambheshwar Mahadev Temple की वास्तुकला भले ही Stambheshwar Mahadev Temple अपनी रहस्यमयी पहचान के लिए प्रसिद्ध हो, लेकिन इसकी बनावट भी कम आकर्षक नहीं है। मौजूदा मंदिर का निर्माण लगभग 150 वर्ष पहले कराया गया था, हालांकि इस स्थान की धार्मिक मान्यता इससे कहीं अधिक प्राचीन मानी जाती है। मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि यह समुद्र की तेज लहरों का सामना आसानी से कर