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Delhi में 2 अक्टूबर को Rajghat पर होगा श्रद्धांजलि कार्यक्रम

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2 अक्टूबर को दिल्ली का माहौल बाकी दिनों से थोड़ा अलग होता है। सुबह शहर की रफ्तार शुरू होने से पहले ही राजघाट के आसपास हलचल बढ़ जाती है। कहीं सुरक्षा व्यवस्था दिखाई देती है, कहीं श्रद्धांजलि देने आने वाले लोग नजर आते हैं और कहीं गांधी जी के प्रिय भजनों की आवाज सुनाई देती है। यह दिन सिर्फ गांधी जयंती की वजह से खास नहीं होता, बल्कि दिल्ली को थोड़ा अलग अंदाज में देखने का मौका भी देता है। अगर आप 2 अक्टूबर को दिल्ली में हैं या इस दिन राजधानी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो Rajghat को अपनी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। लेकिन यहां जाने से पहले यह समझना जरूरी है कि गांधी जयंती के दिन सुबह का समय सामान्य दिनों जैसा नहीं रहता। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों की वजह से सुरक्षा और आवाजाही में बदलाव हो सकते हैं। और अगर आप सोच रहे हैं कि 2 अक्टूबर के बाद दिल्ली में घूमने का क्या प्लान बनाया जाए, तो इसके लिए अक्टूबर का मौसम भी काफी काम आता है। बारिश का असर कम होने लगता है, गर्मी धीरे-धीरे कम होती है और शाम के समय बाहर निकलना पहले के मुकाबले आरामदायक लगने लगता है। इसलिए इस पूरे गाइड में बात सिर्फ Rajghat की नहीं होगी। हम जानेंगे कि गांधी जयंती पर यहां क्या खास होता है, आसपास क्या देखा जा सकता है, मेट्रो से कैसे पहुंचें, ट्रैफिक को लेकर क्या ध्यान रखें और अक्टूबर की शाम को दिल्ली में कहां घूम सकते हैं। 2 अक्टूबर को Rajghat क्यों खास हो जाता है? महात्मा गांधी की समाधि Rajghat दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्मारकों में से एक है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर यहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस दौरान देश के बड़े संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे लोग गांधी जी को श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं। सामान्य पर्यटक के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि 2 अक्टूबर की सुबह Rajghat का माहौल सामान्य पर्यटक स्थल जैसा नहीं होता। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ी रहती है और कार्यक्रम के समय आम लोगों की आवाजाही पर पाबंदी या सीमाएं लग सकती हैं। इसलिए अगर आपका मकसद शांतिपूर्वक स्मारक देखना है, तो कार्यक्रम के बाद का समय ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है और इस दिन देशभर में गांधी जी को याद किया जाता है। भारत सरकार के गांधी से जुड़े संस्थानों में भी इस दिन उनके जीवन, विचार और काम से संबंधित कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। Rajghat पर प्रार्थना सभा में क्या होता है? गांधी जयंती के दिन Rajghat पर होने वाला श्रद्धांजलि कार्यक्रम काफी शांत और गरिमापूर्ण माहौल में होता है। यहां गांधी जी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की जाती है और प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है। कार्यक्रम के दौरान गांधी जी से जुड़े प्रिय भजन और सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन भी किया जाता है। यही वजह है कि 2 अक्टूबर की सुबह Rajghat का वातावरण बाकी दिनों से बिल्कुल अलग महसूस होता है। हालांकि आम पर्यटक के लिए यह समझना जरूरी है कि राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में प्रवेश आम घूमने वाले पर्यटक की तरह नहीं होता। सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रम की जरूरत के अनुसार प्रवेश व्यवस्था बदल सकती है। इसलिए अगर आप खास तौर पर प्रार्थना सभा देखने के लिए जा रहे हैं, तो निकलने से पहले उस दिन की आधिकारिक जानकारी जरूर देख लें। Rajghat का परिसर कैसा है? पहली बार Rajghat पहुंचने पर आपको यहां की सादगी सबसे ज्यादा ध्यान खींचेगी। यह जगह किसी भव्य महल या ऊंची इमारत जैसी नहीं है। यहां का मुख्य आकर्षण गांधी जी की साधारण समाधि है, जिसके आसपास खुला हरा-भरा परिसर है। समाधि काले पत्थर से बनी है और उसके पास अखंड ज्योति जलती रहती है। चारों तरफ हरियाली होने की वजह से इस जगह का वातावरण काफी शांत महसूस होता है। यही सादगी Rajghat को बाकी कई स्मारकों से अलग बनाती है। यहां घूमते समय लोग आमतौर पर धीमी आवाज में बात करते हैं और कुछ देर बैठकर या परिसर में चलते हुए जगह को महसूस करते हैं। अगर आप फोटो लेने के शौकीन हैं तो भी यहां शांति और स्मारक की गरिमा का ध्यान रखना जरूरी है। कैमरा इस्तेमाल करते समय आसपास के निर्देशों का पालन करें और फ्लैश से बचें। Rajghat जाने से पहले जूते और सुरक्षा का ध्यान रखें Rajghat में मुख्य समाधि के पास जाने से पहले जूते-चप्पल उतारने पड़ सकते हैं। इसलिए यात्रा के दिन ऐसे जूते पहनना बेहतर रहेगा जिन्हें आसानी से उतारा और पहना जा सके। प्रवेश से पहले सुरक्षा जांच भी हो सकती है। बड़े बैग या ऐसी चीजें लेकर जाने से बचें जिनकी वजह से सुरक्षा जांच में ज्यादा समय लगे। गांधी जी की समाधि एक शांत स्मारक है, इसलिए यहां घूमते समय तेज आवाज में बात करना, किसी तरह की अव्यवस्था करना या सिर्फ फोटो खींचने के लिए भीड़ लगाना सही नहीं रहेगा। 2 अक्टूबर को Rajghat जाने का सही समय कौन-सा है? अगर आपका मकसद राष्ट्रीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होना नहीं बल्कि Rajghat को सामान्य पर्यटक की तरह देखना है, तो सुबह के कार्यक्रम के आसपास जाने से बचना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। 2 अक्टूबर की सुबह सुरक्षा व्यवस्था ज्यादा कड़ी हो सकती है और आसपास के रास्तों पर भी आवाजाही प्रभावित हो सकती है। आम पर्यटक के लिए कार्यक्रम खत्म होने के बाद का समय बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन उस दिन के वास्तविक प्रवेश नियम और खुलने का समय पहले जांच लेना जरूरी है। यह बात खास तौर पर बाहर से दिल्ली आने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। सिर्फ यह सोचकर घर से न निकलें कि स्मारक रोज की तरह खुला ही मिलेगा। गांधी जयंती के दिन व्यवस्था अलग हो सकती है। 2 अक्टूबर को दिल्ली में ट्रैफिक का क्या हाल रह सकता है? गांधी जयंती के राष्ट्रीय कार्यक्रमों की वजह से Rajghat और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ सकती है। ऐसे मौकों पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अलग से यातायात सलाह और मार्ग परिवर्तन जारी करती है। इसलिए 2 अक्टूबर को अगर आप कार या बाइक से Rajghat जाने

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Monastery Market दिल्ली के बीचों-बीच तिब्बती संस्कृति की झलक

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कश्मीरी गेट के पास बसा वो बाजार, जहां शॉपिंग के साथ मिलेगा तिब्बती संस्कृति का अलग अनुभव। दिल्ली में ऐसी जगहों की कमी नहीं है जहां आप कुछ घंटे घूमकर, थोड़ा-बहुत खाकर और शॉपिंग करके वापस आ जाएं। लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां पहुंचते ही आपको लगता है कि आप दिल्ली में होते हुए भी किसी दूसरी दुनिया में आ गए हैं। उत्तर दिल्ली का मोनेस्ट्री मार्केट भी ऐसी ही जगह है। कश्मीरी गेट और सिविल लाइंस के आसपास स्थित यह Market बाहर से देखने पर बिल्कुल सामान्य लग सकता है। आसपास ट्रैफिक, फ्लाइओवर और दिल्ली की रोज वाली भागदौड़ दिखाई देती है, लेकिन जैसे ही आप बाजार के अंदर जाते हैं, माहौल थोड़ा बदल जाता है। रंग-बिरंगी दुकानों, कपड़ों, जूतों, एक्सेसरीज और तिब्बती सामान के बीच आपको एक अलग तरह की वाइब महसूस होती है। यहां खास बात सिर्फ कम कीमत में खरीदारी करना नहीं है। Market के आसपास तिब्बती और बौद्ध संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। पास ही लद्दाख बौद्ध विहार है, जहां कुछ देर बैठकर आप बाजार की भीड़ से बिल्कुल अलग शांत माहौल महसूस कर सकते हैं। और अगर आप खाने के शौकीन हैं, तो यहां मोमोज, थुकपा और दूसरे तिब्बती स्वाद भी आपका इंतजार कर रहे होते हैं। यानी एक ही जगह पर शॉपिंग, खाना और थोड़ा सा सुकून—तीनों मिल जाते हैं। मोनेस्ट्री मार्केट आखिर इतना खास क्यों है? मोनेस्ट्री Market किसी बड़े मॉल की तरह चमकदार या व्यवस्थित दुकानों वाला बाजार नहीं है। इसकी खूबसूरती इसकी छोटी-छोटी दुकानों, गलियों और वहां मिलने वाली अलग तरह की चीजों में है। यह बाजार खासतौर पर कॉलेज स्टूडेंट्स, युवाओं और बजट में फैशन शॉपिंग करने वाले लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। यहां आपको जैकेट, स्वेटर, हुडी, टी-शर्ट, शर्ट, जूते, बैग और कई तरह की एक्सेसरीज मिल जाती हैं। सर्दियों में तो यह Market खासतौर पर काफी व्यस्त हो जाता है। जैसे ही दिल्ली में ठंड बढ़ती है, लोग जैकेट, स्वेटर, बूट्स और दूसरे विंटर कपड़े लेने यहां पहुंचने लगते हैं। लेकिन इस जगह को सिर्फ कपड़ों की खरीदारी तक सीमित करना सही नहीं होगा। बाजार के आसपास का माहौल आपको दिल्ली में मौजूद अलग-अलग संस्कृतियों की झलक भी दिखाता है। यही वजह है कि अगर आप दिल्ली को सिर्फ बड़े पर्यटन स्थलों के बजाय उसके छोटे और स्थानीय बाजारों के जरिए देखना चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए दिलचस्प हो सकती है। सर्दियों में क्यों बदल जाता है मोनेस्ट्री मार्केट का पूरा माहौल? अगर आप विंटर शॉपिंग के लिए यह Market देखने जा रहे हैं, तो नवंबर से जनवरी या फरवरी तक का समय सबसे ज्यादा हलचल वाला रहता है। दिल्ली की ठंड शुरू होते ही यहां दुकानों के बाहर जैकेट और गर्म कपड़ों की पूरी रेंज दिखाई देने लगती है। पफर जैकेट, हुडी, स्वेटर, मफलर, कैप, थर्मल, बूट्स और कई तरह के कोट यहां मिल सकते हैं। कई दुकानों पर कपड़े ढेर में रखे होते हैं, इसलिए आपको थोड़ा समय निकालकर चीजें देखनी पड़ती हैं। यही इस Market की खासियत भी है। यहां शॉपिंग करते समय आपको थोड़ा घूमना, अलग-अलग दुकानों पर कीमत पूछना और फिर सामान पसंद करना पड़ता है। अगर आपको बाजार में घूमकर चीजें तलाशना पसंद है, तो यह अनुभव आपको अच्छा लगेगा। दिसंबर और जनवरी में दोपहर के समय मौसम भी काफी आरामदायक रहता है। शाम के समय ठंड बढ़ जाती है, लेकिन उसी समय बाजार का माहौल भी ज्यादा रंगीन दिखाई देता है। गर्मियों में यहां क्या मिलेगा? मोनेस्ट्री Market को सिर्फ विंटर शॉपिंग की जगह समझना ठीक नहीं होगा। गर्मियों में भी यहां कपड़ों की काफी वैरायटी मिलती है। मार्च से जून के बीच आप कॉटन टी-शर्ट, शर्ट, हल्की डेनिम, शॉर्ट्स और समर वियर देख सकते हैं। इस दौरान सर्दियों के मुकाबले विंटर कपड़ों वाली भीड़ कम रहती है, इसलिए शॉपिंग थोड़ी आराम से की जा सकती है। अगर आपको भीड़ में शॉपिंग करना पसंद नहीं है, तो गर्मियों में किसी कामकाजी दिन इस Market में जाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। आप अलग-अलग दुकानों पर कीमत पूछ सकते हैं और मोल-भाव के लिए भी थोड़ा समय निकाल सकते हैं। हालांकि गर्मियों में दोपहर के समय दिल्ली की गर्मी को देखते हुए सुबह या शाम का समय ज्यादा आरामदायक रहेगा। मोनेस्ट्री मार्केट जाने का सही समय कौन सा है? इस Market की टाइमिंग अलग-अलग स्रोतों में थोड़ी अलग बताई जाती है, इसलिए जाने से पहले मौजूदा दुकान और बाजार की स्थिति जांच लेना अच्छा रहेगा। आमतौर पर दिन के समय से शाम तक यहां दुकानें खुली मिलती हैं। अगर आपका मकसद आराम से घूमना और शॉपिंग करना है, तो सप्ताह के कामकाजी दिनों में जाना बेहतर रहेगा। शनिवार और रविवार को युवाओं और शॉपिंग करने वाले लोगों की भीड़ बढ़ सकती है। सुबह या दोपहर के शुरुआती समय में बाजार अपेक्षाकृत शांत मिल सकता है। वहीं शाम के समय यहां ज्यादा चहल-पहल रहती है और खाने-पीने के लिए भी ज्यादा विकल्प सक्रिय मिलते हैं। अगर पहली बार आ रहे हैं, तो कम से कम दो से तीन घंटे का समय लेकर आएं। क्योंकि इस Market में सिर्फ एक-दो दुकानों को देखकर वापस आने के बजाय अलग-अलग दुकानों में घूमना ज्यादा मजेदार है। मोनेस्ट्री मार्केट तक मेट्रो से कैसे पहुंचें? इस Market तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका दिल्ली मेट्रो है। कश्मीरी गेट और सिविल लाइंस मेट्रो स्टेशन इसके आसपास के प्रमुख विकल्प हैं। सिविल लाइंस येलो लाइन पर आता है। स्टेशन से बाहर निकलने के बाद आगे की दूरी ई-रिक्शा या ऑटो से पूरी की जा सकती है। दूसरा विकल्प कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन है, जो रेड, येलो और वायलेट लाइन से जुड़ा हुआ है। अगर आप दिल्ली के किसी दूसरे हिस्से से आ रहे हैं, तो कश्मीरी गेट पहुंचना काफी आसान हो सकता है। वहां से आगे ई-रिक्शा या पैदल रास्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है। मेट्रो से आने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको पार्किंग की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। इस Market के आसपास सड़कें व्यस्त रहती हैं और निजी वाहन लेकर आने पर पार्किंग ढूंढने में समय लग सकता है। बस और सड़क से आने वालों के लिए क्या ध्यान रखें? अगर आप बस से

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BRICS Summit के कारण Delhi में कौन-सी ट्रेनें नहीं चलेंगी?

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अगर आप 11 सितंबर से 13 सितंबर 2026 के बीच Delhi आने वाले हैं या Delhi होकर किसी दूसरे शहर की यात्रा करने वाले हैं, तो घर से निकलने से पहले एक बार पूरा ट्रैवल प्लान जरूर देख लें। इन तीन दिनों के दौरान Delhi के कई रास्तों और ट्रेनों के संचालन में बदलाव रहने वाला है। ऐसे में बिना जानकारी के घर से निकलना आपको परेशानी में डाल सकता है। राजधानी Delhi में 18वां BRICS Summit 2026 आयोजित होने जा रहा है। यह सम्मेलन प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में होगा। सम्मेलन में वीवीआईपी मूवमेंट और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए Delhi के कई हिस्सों में ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाएगा। इसका असर सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, बल्कि रेलवे ट्रैफिक पर भी देखने को मिलेगा। इसी वजह से Delhi Travel Alert को ध्यान में रखना इस समय जरूरी है। उत्तर रेलवे और Delhi ट्रैफिक पुलिस की ओर से ट्रेन और सड़क यातायात को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। Delhi डिवीजन में 120 से ज्यादा ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ा है। इनमें कुछ ट्रेनें रद्द की गई हैं, कुछ ट्रेनों के रूट बदले गए हैं और कुछ ट्रेनों को देरी से चलाया जाएगा। BRICS Summit इसलिए अगर आपकी यात्रा इन तारीखों के बीच है, तो Delhi Travel Alert को हल्के में न लें। खासकर अगर आपको नई Delhi रेलवे स्टेशन, पुरानी Delhi रेलवे स्टेशन, हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन या आईजीआई एयरपोर्ट जाना है, तो निकलने से पहले रास्ते की जानकारी जरूर रखें। 11 से 13 सितंबर के बीच क्यों बदला है पूरा प्लान? Delhi में होने वाला BRICS Summit 2026 एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है। इसका आयोजन भारत मंडपम, प्रगति मैदान में किया जा रहा है। सम्मेलन के दौरान कई वीवीआईपी लोगों की आवाजाही होगी। BRICS Summit इसी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। सुरक्षा के कारण नई Delhi के कई प्रमुख इलाकों में आम वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही Delhi के कई महत्वपूर्ण रास्तों पर डायवर्जन भी लागू रहेंगे। रेलवे की तरफ से भी यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बदलाव किए गए हैं। कुछ ईएमयू ट्रेनें पूरी तरह रद्द रहेंगी, जबकि कई लंबी दूरी की ट्रेनों के रास्ते बदल दिए गए हैं। यानी इन दिनों Delhi से यात्रा करने वालों के लिए Delhi Travel Alert जानना उतना ही जरूरी है जितना टिकट और ट्रेन का समय देखना। नई Delhi से चलने वाली 5 ईएमयू ट्रेनें रद्द BRICS Summit 2026 के दौरान नई Delhi रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पांच प्रमुख ईएमयू ट्रेनों को पूरी तरह रद्द किया गया है। इनमें पहली ट्रेन संख्या 64015 पलवल–शकूरबस्ती ईएमयू है। दूसरी ट्रेन संख्या 64429 गाजियाबाद–नई Delhi ईएमयू है। तीसरी ट्रेन संख्या 64433 गाजियाबाद–नई Delhi ईएमयू है। इसके अलावा ट्रेन संख्या 64492 नई Delhi–पलवल लेडीज ईएमयू और ट्रेन संख्या 64491 नई Delhi/Delhi जंक्शन–शामली ईएमयू भी रद्द रहेंगी। अगर आप रोजाना Delhi-एनसीआर के बीच लोकल ट्रेन से सफर करते हैं, तो इन बदलावों को खास तौर पर ध्यान में रखें। 12 और 13 सितंबर को भी Delhi-एनसीआर नेटवर्क में कई दूसरी लोकल ईएमयू और मेमू ट्रेनें रद्द हो सकती हैं या उन्हें रास्ते में ही समाप्त किया जा सकता है। इसलिए Delhi Travel Alert के दौरान सिर्फ टिकट देखकर स्टेशन के लिए निकलना सही नहीं होगा। ट्रेन का ताजा स्टेटस जरूर देखना होगा। लंबी दूरी की ट्रेनों पर भी असर यह बदलाव केवल लोकल ट्रेनों तक सीमित नहीं हैं। Delhi को देश के अलग-अलग हिस्सों से जोड़ने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनें भी प्रभावित रहेंगी। BRICS Summit 2026 के दौरान सुरक्षा कारणों से कई ट्रेनों को नई Delhi या तिलक ब्रिज के बजाय दूसरे रास्तों से चलाया जाएगा। कुछ ट्रेनों को Delhi जंक्शन, Delhi शाहदरा, साहिबाबाद और हजरत निजामुद्दीन की तरफ डायवर्ट किया गया है। इसमें कई राजधानी एक्सप्रेस भी शामिल हैं। रांची राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 20840, डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 12424 और 20503, सियालदह राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 12314, हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 12306 और 12302 और भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 22812 और 20817 के रूट में बदलाव किया गया है। यात्रियों के लिए इसका मतलब साफ है कि जिस स्टेशन या रास्ते से ट्रेन रोजाना चलती है, जरूरी नहीं कि इन दिनों वही रूट इस्तेमाल हो। इसलिए Delhi Travel Alert को ध्यान में रखकर अपनी ट्रेन का अपडेट जरूर चेक करें। BRICS Summit इन एक्सप्रेस ट्रेनों के रास्ते भी बदले राजधानी एक्सप्रेस के अलावा कई दूसरी सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनें भी प्रभावित हुई हैं। इनमें संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस 12394, गोमती एक्सप्रेस 12420, श्रमजीवी एक्सप्रेस 12392, शिवगंगा एक्सप्रेस 12559, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस 12562, मगध एक्सप्रेस 20802 और वैशाली एक्सप्रेस 15566 शामिल हैं। इन ट्रेनों के रूट में भी बदलाव किया गया है। इसलिए अगर आपका टिकट इन ट्रेनों में है, तो Delhi Travel Alert के दौरान यात्रा से पहले ट्रेन के नए रूट की जानकारी जरूर लें। कई बार यात्री सिर्फ ट्रेन नंबर देखकर स्टेशन पहुंच जाते हैं और वहां जाकर पता चलता है कि ट्रेन का समय या रास्ता बदल गया है। इस बार ऐसी परेशानी से बचने के लिए पहले से जानकारी लेना ज्यादा सही रहेगा। BRICS Summit कुछ ट्रेनें दो घंटे तक देरी से चलेंगी रूट बदलने के साथ-साथ कुछ ट्रेनों के समय में भी बदलाव किया गया है। नई Delhi–हैदराबाद एक्सप्रेस 12724 और ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस 12616 को नई Delhi से 120 मिनट यानी दो घंटे की देरी से चलाया जाएगा। वहीं पश्चिम एक्सप्रेस 12926 को 90 मिनट के लिए री-शेड्यूल किया गया है। इंटरसिटी एक्सप्रेस 15304 को 75 मिनट री-शेड्यूल किया गया है। इसके अलावा तेजस राजधानी 12952 और तेजस राज एक्सप्रेस 12310 भी 15 से 50 मिनट की देरी से रवाना होंगी। बनारस–नई Delhi वंदे भारत एक्सप्रेस 22415 को एनसीआर सेक्शन में लगभग 35 मिनट के लिए रेगुलेट किया जाएगा। ऐसे में अगर आपको किसी दूसरी ट्रेन, बस, फ्लाइट या जरूरी काम के लिए आगे जाना है, तो अपने प्लान में थोड़ा अतिरिक्त समय जरूर रखें। यही Delhi Travel Alert का सबसे जरूरी हिस्सा है। ट्रेन का लाइव स्टेटस कैसे चेक करें? उत्तर रेलवे की ओर

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Hazrat Nizamuddin Dargah: कैसे जाएं, क्या देखें और क्या खाएं

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दिल्ली को अगर सिर्फ बड़ी-बड़ी इमारतों, बाजारों और भीड़ के लिए जाना जाए तो इसकी असली तस्वीर अधूरी रह जाएगी। इस शहर की अलग पहचान पुरानी गलियों, दरगाहों, खान-पान और सदियों पुरानी मिली-जुली संस्कृति से भी बनती है। इन्हीं जगहों में एक नाम है हज़रत निज़ामुद्दीन Dargah। दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके में मौजूद यह जगह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, रूहानियत, संगीत और खाने का ऐसा अनुभव देती है जिसे एक बार महसूस करने के बाद लंबे समय तक याद रखा जा सकता है। अगर आपने अब तक Dargah की तंग गलियों में घूमते हुए वहां की खुशबू महसूस नहीं की, शाम की कव्वाली नहीं सुनी और निज़ामुद्दीन बस्ती के मशहूर कबाब या निहारी का स्वाद नहीं लिया, तो दिल्ली के इस खास रंग से आपकी मुलाकात अभी बाकी है। Dargah में आने वाले लोगों में हर तरह के लोग दिखाई देते हैं। कोई दुआ मांगने आता है, कोई इतिहास देखने, कोई कव्वाली सुनने और कोई इस पूरे माहौल को करीब से महसूस करने। हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया को समर्पित यह Dargah चिश्ती सिलसिले से जुड़ी हुई है और सदियों से लोगों के लिए आस्था और सुकून की जगह बनी हुई है। यहां की पुरानी वास्तुकला, मेहराबें, जालियां और आसपास की गलियां आपको दिल्ली के पुराने दौर की याद दिलाती हैं। Dargah रोज सुबह 5 बजे से रात 10:30 बजे तक खुली रहती है। यहां प्रवेश निःशुल्क है और सभी धर्मों के लोग आ सकते हैं। गुरुवार की शाम को मग़रिब की नमाज के बाद कव्वाली की महफिल सजती है। हज़रत निज़ामुद्दीन Dargah का इतिहास हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध सूफी संतों में से एक माने जाते हैं। उनका जीवन 13वीं और 14वीं शताब्दी के दौर से जुड़ा हुआ है। साल 1325 ईस्वी में उनके इंतकाल के बाद यहां उनकी याद में Dargah बनाई गई। समय के साथ यह जगह दिल्ली की महत्वपूर्ण सूफी विरासत का हिस्सा बन गई। आज जब आप Dargah परिसर में पहुंचते हैं तो वहां की वास्तुकला अपने आप ध्यान खींचती है। संगमरमर का काम, खूबसूरत मेहराबें और जालीदार नक्काशी इसे एक अलग पहचान देते हैं। लेकिन इस जगह की खासियत सिर्फ इसकी इमारत नहीं है। इसके आसपास मौजूद कई ऐतिहासिक मज़ारें भी इस जगह को खास बनाती हैं। Dargah परिसर में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के सबसे करीबी शिष्यों में से एक अमीर खुसरो की मज़ार भी है। अमीर खुसरो का नाम भारतीय कविता, संगीत और सूफी परंपरा की दुनिया में बेहद खास है। मुगल राजकुमारी जहांआरा बेगम की मज़ार भी Dargah परिसर में स्थित है। मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की मज़ार निज़ामुद्दीन इलाके में पास ही स्थित है, लेकिन वह मुख्य Dargah परिसर के अंदर नहीं है। यही वजह है कि Dargah का माहौल बाकी ऐतिहासिक जगहों से थोड़ा अलग महसूस होता है। यहां इतिहास सिर्फ दीवारों पर दिखाई नहीं देता, बल्कि कव्वाली, दुआ और लोगों की आस्था में भी नजर आता है। अमीर खुसरो और Dargah का रिश्ता अमीर खुसरो का नाम हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के साथ बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है। वह सूफी संत के प्रिय शिष्य माने जाते हैं। उनका जन्म 1253 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के पटियाली में हुआ था। उन्हें तूतिए-हिंद भी कहा जाता है। अमीर खुसरो को कविता, भाषा और संगीत की दुनिया में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। कव्वाली की परंपरा से भी उनका नाम गहराई से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि जब अमीर खुसरो कम उम्र के थे, तब वे अपने पिता के साथ हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की खानकाह पहुंचे थे। यहीं से दोनों के बीच एक गहरा रूहानी रिश्ता जुड़ा। आज भी Dargah में अमीर खुसरो की मज़ार पर आने वाले लोग उस पुराने रिश्ते को महसूस करने की कोशिश करते हैं। गुरुवार की कव्वाली में जब अमीर खुसरो की रचनाएं और सूफी कलाम गूंजते हैं, तो Dargah का माहौल और भी खास हो जाता है। Dargah जाने का सही समय वैसे तो Dargah साल भर जाया जा सकता है, लेकिन अगर आप आराम से घूमना चाहते हैं तो मौसम का ध्यान रखना जरूरी है। दिल्ली की गर्मी काफी तेज होती है और मई-जून में तापमान बहुत अधिक हो सकता है। ऐसे में पुरानी गलियों में घूमना और काफी देर तक बाहर रहना थका सकता है। अक्टूबर से मार्च तक का समय Dargah घूमने के लिए काफी अच्छा माना जा सकता है। इन महीनों में दिल्ली का मौसम ठंडा और सुहावना रहता है। जनवरी में तापमान काफी नीचे जा सकता है, इसलिए अगर सर्दियों में जा रहे हैं तो हल्के गर्म कपड़े साथ रखना बेहतर रहेगा। अगर आपका मकसद कव्वाली सुनना है तो गुरुवार की शाम को Dargah जाना एक अलग अनुभव देता है। कव्वाली आमतौर पर मग़रिब की नमाज के बाद शुरू होती है और समय मौसम तथा भीड़ के अनुसार बदल सकता है। गुरुवार की शाम Dargah में भीड़ अधिक रहती है। इसलिए अगर आप कव्वाली के लिए जा रहे हैं तो समय से पहले पहुंचना बेहतर रहेगा। उर्स के दौरान Dargah का माहौल उर्स के दौरान Dargah की रौनक और भी बढ़ जाती है। हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया का उर्स इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। सूफी परंपरा में उर्स को संत की आत्मा के खुदा से मिलन के रूप में देखा जाता है। इस मौके पर Dargah में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कव्वाली की महफिलें, लंगर और चादर चढ़ाने की परंपरा इस अवसर को खास बनाती हैं। आसपास की गलियों में भी रौनक बढ़ जाती है। हालांकि उर्स के दिनों में भीड़ काफी ज्यादा हो सकती है। अगर आप शांति से Dargah देखना चाहते हैं तो सामान्य दिन चुनना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। उर्स के समय परिवार के साथ जा रहे हों तो बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। भीड़ में एक-दूसरे से अलग न हों और अपने सामान को संभालकर रखें। Dargah तक कैसे पहुंचें? दिल्ली में होने की वजह से Dargah तक पहुंचना बहुत मुश्किल नहीं है। मेट्रो, बस, ऑटो और कैब जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। मेट्रो से आने वालों के लिए हज़रत निज़ामुद्दीन मेट्रो स्टेशन प्रमुख विकल्प है। यह पिंक लाइन पर स्थित है। जेएलएन स्टेडियम मेट्रो स्टेशन भी एक विकल्प है, लेकिन वहां से Dargah तक

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Monsoon in Delhi: 7 Best places, जहां बारिश का असली मजा मिलेगा

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दिल्ली की तपती गर्मी के बाद जब आसमान में काले बादल छाते हैं और पहली बारिश की बूंदें गिरती हैं, तो पूरा शहर एक अलग ही रंग में रंग जाता है। Monsoon in Delhi सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जिसमें मिट्टी की सोंधी खुशबू, ठंडी हवाएँ और चारों तरफ़ फैली हरियाली दिल को मोह लेती है। अगर आप भी इस सुहावने मौसम में घर पर बैठे-बैठे बोर हो रहे हैं, तो यही सही वक़्त है बाहर निकलने का और दिल्ली की खूबसूरती को करीब से देखने का। हमने आपके लिए दिल्ली की 7 ऐसी शानदार जगहों की लिस्ट तैयार की है जहाँ मानसून का मज़ा दोगुना हो जाता है। Sunder Nursery: दिल्ली का अपना ‘सेंट्रल पार्क’ (Monsoon in Delhi) हुमायूँ के मकबरे के ठीक बगल में स्थित Sunder Nursery को अक्सर ‘दिल्ली का सेंट्रल पार्क’ कहा जाता है। यह लगभग 90 एकड़ में फैला एक हेरिटेज पार्क है जहाँ मुगल काल की वास्तुकला और आधुनिक लैंडस्केपिंग का खूबसूरत मेल मिलेगा। मानसून में यहाँ के लिली पॉन्ड, फूलों की क्यारियाँ और बारिश से भीगे रास्ते किसी जादू से कम नहीं लगते। यहाँ 300 से अधिक पेड़-पौधों की प्रजातियाँ हैं, जो बारिश में और भी ताज़ा और हरी-भरी नजर आती हैं। अगर आप शहर की भीड़-भाड़ से दूर सुकून चाहते हैं, तो Monsoon in Delhi में यह जगह बिल्कुल परफेक्ट है। (Monsoon in Delhi)   Lodhi Garden: इतिहास और हरियाली का खूबसूरत मेल साउथ दिल्ली के बीचोंबीच बसा Lodhi Garden मानसून के दौरान शहर की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक बन जाता है। लगभग 90 एकड़ में फैले इस गार्डन में 15वीं शताब्दी के लोधी वंश के मकबरे हैं, और बारिश के बाद ये और भी आकर्षक दिखते हैं। भीगी पगडंडियाँ, घने पेड़, ताज़ी हवा और मिट्टी की सोंधी खुशबू इसे मॉर्निंग वॉक, पिकनिक और फोटोग्राफी के लिए बेस्ट बनाते हैं। Monsoon in Delhi में यहाँ मोर और कई तरह के पक्षियों को देखना भी एक खास अनुभव होता है। Hauz Khas Village: झील और कैफे का शानदार कॉम्बिनेशन (Monsoon in Delhi) Hauz Khas Village अपने ट्रेंडी कैफे, ऐतिहासिक खंडहरों और खूबसूरत झील के लिए मशहूर है। बारिश के मौसम में यहाँ की झील और आसपास का Deer Park पूरी तरह जीवंत हो उठता है। आप पार्क में घूमते हुए हिरण और मोर देख सकते हैं, उसके बाद किसी रूफटॉप कैफे में बैठकर बारिश के बीच झील का नज़ारा और स्वादिष्ट खाने का आनंद ले सकते हैं। खासकर जवानों और नए-नए ट्रेंड्स पसंद करने वालों के बीच यह जगह मानसून में बेहद पॉपुलर रहती है।(Monsoon in Delhi) India Gate: बारिश में और भी शानदार नज़ारा दिल्ली की पहचान India Gate हर मौसम में खूबसूरत दिखता है, पर मानसून में इसका आकर्षण और बढ़ जाता है। काले बादलों के बैकग्राउंड में खड़ा India Gate फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट शॉट देता है। कर्तव्य पथ पर ठंडी हवाओं के बीच टहलना, बारिश महसूस करना और वहाँ की मशहूर आइसक्रीम का स्वाद लेना दिल्ली के मानसून के अनुभव का अहम हिस्सा है। आसपास के खुले मैदान और फव्वारे इस मौसम में और भी ताज़गी का एहसास दे देते हैं। Qutub Minar: बारिश में निखरती ऐतिहासिक विरासत (Monsoon in Delhi) महरौली में स्थित Qutub Minar मानसून के दौरान अपनी अलग ही खूबसूरती दिखाती है। लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर की यह मीनार बारिश के बाद और भी चमकती दिखती है। आसपास फैले हरे-भरे लॉन और ठंडी हवा इस जगह को घूमने के लिए और भी खास बनाते हैं। यदि आपको इतिहास और फोटोग्राफी का शौक है, तो मानसून में यहाँ ज़रूर जाएँ। Purana Qila: इतिहास के बीच बारिश का आनंद दिल्ली का Purana Qila उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिन्हें इतिहास और प्रकृति दोनों पसंद हैं। मानसून में इसकी विशाल दीवारें, हरियाली और झील मिलकर बेहद खूबसूरत नज़ारा बनाते हैं। आप यहाँ बोटिंग का मज़ा ले सकते हैं या फिर शांति से बैठकर बारिश की बूँदों की आवाज़ का आनन्द उठा सकते हैं। यह जगह मानसून में और भी सुकून भरी लगती है। Garden of Five Senses: मानसून में सुकून का एहसास (Monsoon in Delhi) साकेत में स्थित Garden of Five Senses को आपकी पाँचों इंद्रियों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। मानसून में यहाँ रंग-बिरंगे फूल, हरी-भरी जगहें, झरनों की मधुर आवाज़ और भीनी-भीनी खुशबू पूरे माहौल को बेहद ख़ास बना देती हैं। पत्थर की कलाकृतियाँ और बारिश से साफ हुए रास्ते इस जगह की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। अगर आप शांत और रोमांटिक माहौल चाहते हैं, तो यह जगह मिस न करें।  Monsoon in Delhi के कुछ और मजेदार अनुभव दिल्ली का मानसून केवल पार्क और ऐतिहासिक जगहों तक ही सीमित नहीं है। इस मौसम में गरमा-गरम समोसे, पकोड़े, भुट्टा और कसकती चाय का आनंद अलग ही होता है। पुरानी दिल्ली की तंग-सी गलियों में बारिश के बीच घुमना या कनॉट प्लेस के किसी कैफे में बैठकर बारिश देखना यादगार अनुभव बन जाता है। अगर आप लॉन्ग ड्राइव पसंद करते हैं, तो DND फ्लाईओवर के आसपास बारिश का नज़ारा भी काफ़ी खूबसूरत होता है। fivecolorsoftravel की ओर से Monsoon Travel Tips  Monsoon in Delhi में ट्रैफिक से बचने के लिए दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करें। आरामदायक और अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें क्योंकि कई जगह रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं। अपने फोन, कैमरा और जरूरी सामान के लिए वॉटरप्रूफ बैग साथ रखें। स्ट्रीट फूड का आनंद लें, लेकिन हमेशा साफ-सुथरी जगह से ही खाएँ। ऐतिहासिक स्मारकों के ओपनिंग टाइम पहले से चेक कर लें ताकि आपकी यात्रा आरामदायक रहे।

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Delhi Baarish: राहत भी, आफत भी! राजधानी का बदला हुआ चेहरा

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दिल्ली वालों को जिस Baarish का कई दिनों से इंतज़ार था, वो आखिरकार आ गई। गर्मी और उमस से बेहाल लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी Baarish अपने साथ दो चेहरे लेकर आई। कहीं इंडिया गेट और लुटियंस दिल्ली की सड़कें किसी फिल्मी सीन जैसी खूबसूरत नज़र आईं, तो कहीं Waterlogging, Traffic Jam और गिरे हुए पेड़ों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। एक तरफ लोग मौसम का लुत्फ़ उठाते दिखे, दूसरी तरफ ऑफिस जाने वाले और रोज़ सफर करने वालों के लिए ये Baarish किसी इम्तिहान से कम नहीं रही। 1. India Gate बना लोगों का Favourite Hangout Spot दिल्ली में जैसे ही Baarish शुरू हुई, सबसे पहले लोगों का रुख India Gate की तरफ हो गया। ठंडी हवा, भीगी सड़कें और बादलों से घिरा आसमान देखकर हर कोई फोटो और Reels बनाने में मशगूल नज़र आया। शाम के वक्त यहां Family, Couples और Friends की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। कई लोगों ने इसे इस साल की सबसे खूबसूरत Evening बताया। 2. लुटियंस दिल्ली का बदला हुआ नज़ारा राजधानी का VIP इलाका लुटियंस दिल्ली Baarish के बाद बिल्कुल अलग ही अंदाज़ में दिखाई दिया। हरे-भरे पेड़, साफ़ हवा और भीगी चौड़ी सड़कें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे दिल्ली कुछ घंटों के लिए Pollution को भूल गई हो। Photography Lovers के लिए ये मौसम किसी Treat से कम नहीं था। 3. Waterlogging ने बढ़ाई लोगों की परेशानी जहां कुछ लोग मौसम का मज़ा ले रहे थे, वहीं कई इलाकों में Waterlogging ने लोगों का दिन खराब कर दिया। कई सड़कों पर पानी भर गया। गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। ऑफिस जाने वालों को घंटों Traffic में फंसना पड़ा। कुछ जगहों पर बाइक और कारें पानी में बंद भी हो गईं। 4. Traffic Jam बना सबसे बड़ा सिरदर्द दिल्ली की पहचान सिर्फ Traffic नहीं, बल्कि Baarish + Traffic का Combo भी बन चुका है। हल्की सी Baarish के बाद ही कई मुख्य मार्गों पर Slow Moving Traffic देखने को मिला। School Vans, Office Cabs और Public Transport सभी पर इसका असर साफ दिखाई दिया। कई लोगों ने Social Media पर Funny Memes शेयर करते हुए लिखा— “Delhi mein Baarish ka matlab Work From Home ki dua.” 5. पेड़ गिरने और बिजली कटने की घटनाएं तेज़ हवाओं के साथ हुई Baarish की वजह से कई इलाकों में पेड़ गिरने की खबरें भी सामने आईं। कुछ सड़कों पर रास्ता बंद करना पड़ा। कई जगह बिजली सप्लाई कुछ समय के लिए प्रभावित रही। Emergency Teams को तुरंत मौके पर भेजा गया। हालांकि प्रशासन ने हालात को जल्दी कंट्रोल करने की कोशिश की। 6. Social Media पर छाई Delhi Baarish जैसे ही मौसम बदला, Instagram, X और Facebook पर Delhi Baarish Trend करने लगी। किसी ने India Gate की खूबसूरत तस्वीरें पोस्ट कीं, तो किसी ने Waterlogging की Videos डालकर सिस्टम पर तंज कसा। Gen Z ने तो इस मौसम को पूरा Content Opportunity बना दिया। 7. लोगों के लिए राहत भी, कारोबार पर असर भी इस Baarish से Temperature में अच्छी गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को Heatwave से राहत मिली। लेकिन दूसरी तरफ— Delivery Services Delay हुईं। Local Markets में Footfall कम रहा। कई Outdoor Events प्रभावित हुए। यानी मौसम ने खुशी भी दी और कुछ लोगों के काम में रुकावट भी पैदा कर दी। Five Colors of Travel Tips  अगर आप Baarish के बाद दिल्ली घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो ये टिप्स ज़रूर याद रखें— 1. Early Morning या Evening Visit करें India Gate और Central Delhi इस वक्त सबसे ज़्यादा खूबसूरत लगते हैं। 2. Waterproof Gear साथ रखें Umbrella, Raincoat और Phone Waterproof Cover ज़रूर Carry करें। 3. Traffic Update पहले चेक करें Google Maps देखकर ही निकलें ताकि Waterlogging वाले Routes से बच सकें। 4. Comfortable Footwear पहनें Slippery Roads पर अच्छे Grip वाले Shoes सबसे बेहतर रहते हैं। 5. Nature Enjoy करें, लेकिन Safety पहले भीगे पेड़ों के नीचे ज्यादा देर खड़े न रहें और Waterlogged Areas में जाने से बचें। दिल्ली की Baarish हर बार एक नई कहानी लेकर आती है। किसी के लिए ये राहत का पैग़ाम होती है, तो किसी के लिए रोज़मर्रा की मुश्किलों का सबब। लेकिन इतना तय है कि बारिश के बाद दिल्ली का रंग, रौनक और फिज़ा पूरी तरह बदल जाती है। अगर आप भी इस मौसम का मज़ा लेना चाहते हैं, तो थोड़ी Planning और Safety के साथ निकलें और राजधानी के इस खूबसूरत रूप को करीब से महसूस करें।  

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दिल्ली का Bangla Sahib Gurudwara आखिर क्यों है सबसे ज़्यादा Visit की जाने वाली Religious Places में से एक?

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दिल्ली की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी के बीच अगर कोई जगह सुकून, सेवा और श्रद्धा का एहसास एक साथ कराती है, तो वो है Bangla Sahib Gurudwara। हर दिन यहां हज़ारों लोग आते हैं। कोई माथा टेकने, कोई Langar खाने, कोई सिर्फ कुछ पल की शांति महसूस करने। मज़े की बात ये है कि यहां सिर्फ Sikh community ही नहीं, बल्कि हर धर्म और हर उम्र के लोग बिना किसी भेदभाव के आते हैं। यही वजह है कि Bangla Sahib आज सिर्फ एक Gurudwara नहीं, बल्कि दिल्ली की पहचान बन चुका है। Bangla Sahib का इतिहास Bangla Sahib का इतिहास 17वीं सदी से जुड़ा हुआ है। पहले इस जगह पर Raja Jai Singh का एक बंगला हुआ करता था। बाद में Guru Har Krishan Ji, जो Sikh धर्म के आठवें Guru थे, कुछ समय के लिए यहीं ठहरे थे। उस दौर में दिल्ली में चेचक और हैजा जैसी बीमारियां फैली हुई थीं। Guru Har Krishan Ji ने बीमार लोगों की सेवा की और उन्हें पानी पिलाया। माना जाता है कि उनकी सेवा और आशीर्वाद से कई लोगों को राहत मिली। आज भी Gurudwara के अंदर मौजूद Sarovar का पानी श्रद्धालु पवित्र मानते हैं। यहां की सबसे बड़ी पहचान – Langar Bangla Sahib का Langar दुनिया भर में मशहूर है। यहां हर दिन हज़ारों लोगों को बिल्कुल मुफ्त खाना खिलाया जाता है। अमीर-गरीब, Local या Tourist, हर कोई एक ही लाइन में बैठकर खाना खाता है। खाना बनाने और परोसने का ज़्यादातर काम Volunteers यानी Sevadars करते हैं। यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि बराबरी और इंसानियत का सबसे खूबसूरत Example है। Sarovar का सुकून Gurudwara के बीचों-बीच बना बड़ा Sarovar यहां आने वालों को अलग ही सुकून देता है। लोग यहां बैठकर कुछ देर Meditation करते हैं। पानी में Gurudwara की Reflection शाम के वक्त बेहद खूबसूरत लगती है। Photography करने वालों के लिए भी ये Spot काफी पसंदीदा है। Architecture भी है कमाल Bangla Sahib का White Marble, Golden Dome और साफ-सुथरा परिसर हर किसी का ध्यान खींच लेता है। Golden Dome दूर से ही दिखाई देता है। रात में Lighting होने के बाद पूरा Gurudwara और भी शानदार लगता है। अंदर का माहौल इतना शांत होता है कि कुछ मिनट बैठते ही मन हल्का महसूस होने लगता है। हर धर्म के लोगों के लिए खुला है दरवाज़ा Bangla Sahib की सबसे खूबसूरत बात यही है कि यहां किसी से उसका धर्म नहीं पूछा जाता। हर कोई माथा टेक सकता है। Langar में बैठकर खाना खा सकता है। सेवा में हिस्सा ले सकता है। यही Inclusiveness इसे दिल्ली की सबसे खास Religious Places में शामिल करती है। यहां क्या-क्या देखें? Golden Dome Sarovar Langar Hall Main Prayer Hall Museum Library Nishan Sahib Visit करने का Best Time सुबह जल्दी जाएं, तब भीड़ कम रहती है और माहौल बेहद शांत होता है। शाम के वक्त Lighting और Reflection देखने लायक होती है। Gurpurab जैसे Festivals पर यहां अलग ही रौनक देखने को मिलती है, लेकिन भीड़ काफी ज़्यादा होती है। कैसे पहुंचे? सबसे आसान तरीका Metro है। नज़दीकी Metro Station Patel Chowk और Shivaji Stadium हैं। Auto, Cab और Bus से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। Five Colors of Travel Tips 1. सिर ढककर जाएं Gurudwara के अंदर Head Cover करना ज़रूरी होता है। अगर साथ में Scarf नहीं है, तो Entry पर मुफ्त में मिल जाता है। 2. Shoes बाहर उतारें जूते और Socks बाहर जमा कराएं और हाथ-पैर धोकर अंदर जाएं। 3. Silence Maintain करें Prayer Hall के अंदर धीरे बात करें और दूसरों की श्रद्धा का सम्मान करें। 4. Langar Miss मत करें अगर समय हो, तो Langar ज़रूर खाएं। यही Bangla Sahib की असली Spirit है। 5. Cleanliness का ध्यान रखें कूड़ा इधर-उधर न फेंकें और पूरे परिसर की सफाई बनाए रखने में सहयोग करें। Bangla Sahib सिर्फ एक Tourist Spot नहीं है। ये ऐसी जगह है जहां Service, Humanity और Faith एक साथ देखने को मिलते हैं। चाहे आप Spiritual Journey पर हों, Delhi Explore कर रहे हों या बस कुछ देर की Mental Peace चाहते हों, Bangla Sahib आपको खाली हाथ वापस नहीं भेजेगा। यहां की शांति, Langar की गर्मजोशी और लोगों की सेवा शायद वही एहसास है, जिसकी वजह से लाखों लोग बार-बार इस Gurudwara का रुख करते हैं।