आखिर क्यों Murthal के पराठे इतने मशहूर हैं? जानें पूरी कहानी
कभी-कभी घूमने के लिए किसी बड़े टूरिस्ट प्लेस की जरूरत नहीं होती। बस गाड़ी उठाइए, दोस्तों या परिवार को साथ लीजिए और किसी ऐसे हाईवे पर निकल जाइए जहां रास्ते में गरमा-गरम खाना आपका इंतजार कर रहा हो। दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए ऐसा ही एक नाम है Murthal। दिल्ली से निकलकर जैसे ही हाईवे का सफर शुरू होता है, कुछ ही देर बाद बड़े-बड़े ढाबों के बोर्ड, पार्किंग में खड़ी गाड़ियां और तंदूर से आती खाने की खुशबू बता देती है कि आप मूरथल पहुंचने वाले हैं। यहां आने का मजा सिर्फ खाना खाने में नहीं है। असली मजा तो उस पूरे माहौल में है—हाईवे की ड्राइव, दोस्तों के साथ बातें, सामने रखा गरमा-गरम पराठा, ऊपर पिघलता सफेद मक्खन और साथ में ठंडी या गाढ़ी लस्सी। Murthal आज सिर्फ सोनीपत के पास मौजूद एक हाईवे पड़ाव नहीं रह गया है। यह दिल्ली से निकलने वाली छोटी रोड ट्रिप का एक ऐसा हिस्सा बन चुका है, जहां लोग कई बार सिर्फ पराठे खाने के लिए भी पहुंच जाते हैं। तो इस बार बात सिर्फ आलू पराठे की नहीं होगी। इस ब्लॉग में जानेंगे कि मूरथल ढाबा कल्चर की शुरुआत कैसे हुई, यहां के पराठों में ऐसा क्या खास है, कौन-कौन से ढाबे चर्चित हैं, कितना बजट रखना चाहिए, कब जाना सही रहेगा और खाने के साथ आसपास क्या देखा जा सकता है। ट्रक ड्राइवरों के पड़ाव से कैसे बना मूरथल का ढाबा हब? आज जिस Murthal को देखकर आपको बड़े-बड़े रेस्टोरेंट और चमकते ढाबे दिखाई देते हैं, उसकी शुरुआत इतनी ग्लैमरस नहीं थी। कई दशक पहले यह इलाका हाईवे से गुजरने वाले ट्रक ड्राइवरों के लिए रुकने की जगहों में से एक था। लंबी दूरी तय करने वाले ड्राइवरों को रास्ते में ऐसा खाना चाहिए होता था जो सादा हो, पेट भर दे और ज्यादा समय भी न लगाए। इसी जरूरत ने सड़क किनारे छोटे ढाबों को जन्म दिया। यहां दाल, रोटी, सब्जी, पराठे, दही और चाय जैसी चीजें मिलती थीं। धीरे-धीरे हाईवे से गुजरने वाले दूसरे यात्रियों ने भी इन ढाबों का स्वाद लेना शुरू किया। समय के साथ दिल्ली और चंडीगढ़ के बीच बढ़ते ट्रैफिक ने इस पूरे इलाके को और लोकप्रिय बना दिया। छोटे ढाबों की जगह बड़े रेस्टोरेंट बनने लगे, लेकिन देसी स्वाद और हाईवे वाला माहौल आज भी इसकी सबसे बड़ी पहचान बना हुआ है। यही वजह है कि Murthal की कहानी सिर्फ खाने की कहानी नहीं है। यह उस सड़क संस्कृति की कहानी भी है जो यात्रियों, ट्रक ड्राइवरों, परिवारों और दोस्तों को एक ही टेबल पर लेकर आती है। आखिर मूरथल के पराठों में ऐसा क्या खास है? मूरथल का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में क्या आता है? तंदूरी पराठा, सफेद मक्खन और लस्सी। यही तीन चीजें यहां के खाने की पहचान बन चुकी हैं। यहां के पराठों में आलू, गोभी, पनीर, प्याज, मूली और सोया जैसी कई तरह की स्टफिंग मिल जाती है। तंदूर की गर्म आंच पर तैयार होने के कारण इनका स्वाद सामान्य तवे वाले पराठे से थोड़ा अलग महसूस होता है। गर्म पराठा प्लेट में आते ही उसके ऊपर रखा सफेद मक्खन धीरे-धीरे पिघलने लगता है। साथ में हरी चटनी, अचार और सिरके वाला प्याज मिल जाए तो पूरा कॉम्बिनेशन तैयार हो जाता है। और अगर इसके साथ एक बड़ी गिलास लस्सी भी आ जाए, तो फिर Murthal की रोड ट्रिप का असली मजा समझ आता है। सफेद मक्खन से लेकर पंचरंगा अचार तक, प्लेट में क्या-क्या मिलता है? मूरथल के पराठे को सिर्फ पराठा समझना थोड़ा कम होगा। यहां उसके साथ मिलने वाली छोटी-छोटी चीजें भी स्वाद को खास बनाती हैं। सफेद मक्खन इसकी सबसे चर्चित चीजों में से एक है। गर्म पराठे पर मक्खन का टुकड़ा रखते ही वह पिघलने लगता है और पराठे के साथ मिलकर अलग ही स्वाद देता है। इसके साथ हरी चटनी, सिरके वाला प्याज और अचार दिया जाता है। कई जगह पानीपत का पंचरंगा अचार भी खाने को मिलता है। अगर आपको तीखा-खट्टा स्वाद पसंद है तो यह अचार पराठे के साथ काफी अच्छा लगता है। खाने के बाद मीठी लस्सी, कुल्हड़ वाली चाय या गरम जलेबी का नंबर आता है। यानी Murthal में एक छोटा-सा नाश्ता भी आसानी से पूरा खाना बन सकता है। अमरीक सुखदेव: मूरथल का सबसे पहचाना जाने वाला नाम अगर पहली बार Murthal जा रहे हैं तो अमरीक सुखदेव का नाम शायद सबसे पहले सुनने को मिलेगा। यह जगह लंबे समय से मूरथल की पहचान से जुड़ी हुई है और हाईवे से गुजरने वाले लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। यहां पराठे, सफेद मक्खन, लस्सी और जलेबी जैसे देसी खाने काफी पसंद किए जाते हैं। इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि खासकर छुट्टी और वीकेंड के दिनों में यहां अच्छी-खासी भीड़ मिल सकती है। इसलिए अगर आप यहां आराम से बैठकर खाना चाहते हैं तो सुबह थोड़ा जल्दी पहुंचना बेहतर हो सकता है। भीड़ देखकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन वीकेंड पर थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। गुलशन ढाबा: पुराने स्वाद के साथ बड़ा ढाबा अनुभव मूरथल के पुराने चर्चित नामों में गुलशन ढाबा भी गिना जाता है। लंबे समय से यहां लोग पराठे और देसी खाना खाने आते रहे हैं। गोभी और पनीर के पराठे जैसे विकल्प यहां खास तौर पर पसंद किए जाते हैं। बड़े हॉल और परिवार के साथ बैठकर खाने की सुविधा इसे उन लोगों के लिए उपयोगी बनाती है जो छोटे सड़क किनारे ढाबे की जगह थोड़ा व्यवस्थित माहौल चाहते हैं। Murthal में ढाबों की यही खासियत है कि आपको एक तरफ बिल्कुल देसी और सादा माहौल मिल सकता है, तो दूसरी तरफ बड़े परिवार के साथ बैठकर खाने वाली जगहें भी मिल जाती हैं। अहूजा ढाबा: सादा खाना और देसी माहौल नंबर 1 अहूजा ढाबा उन जगहों में गिना जाता है जो मूरथल के पुराने ढाबा कल्चर को दिखाते हैं। यहां की खास बात सिर्फ खाना नहीं बल्कि माहौल भी है। एक ही जगह पर आपको अलग-अलग तरह के लोग खाना खाते दिख सकते हैं। कोई ट्रक से आया है, कोई परिवार के साथ रुका है और कोई दोस्तों के साथ रोड ट्रिप पर निकला है। दाल, रोटी, सब्जी और पराठे जैसे सादे खाने के