Delhi to Moscow Train की खबर कितनी सही है?
दिल्ली से मॉस्को तक Train से सफर करने की खबर सुनकर शायद आपको पहली बार में यकीन न हो। भारत से रूस तक हजारों किलोमीटर का सफर और वह भी Train से, सुनने में यह किसी बड़े प्रोजेक्ट जैसा लगता है। पिछले कुछ समय से रूस की तरफ से भारत और हिंद महासागर तक संभावित रेल कनेक्शन को लेकर चर्चा जरूर हुई है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि अभी दिल्ली से मॉस्को के बीच कोई सीधी यात्री Train शुरू नहीं हुई है। न ही इस रूट के लिए कोई टिकट बुकिंग, आधिकारिक टाइमटेबल या यात्रा की तारीख जारी की गई है। इसलिए सोशल मीडिया पर अगर आपको यह दावा दिखाई दे कि दिल्ली से मॉस्को जाने वाली Train जल्द शुरू हो रही है, तो उसे फिलहाल पक्की खबर मानना सही नहीं होगा। दरअसल, जिस प्रोजेक्ट की चर्चा हो रही है, उसका मुख्य संबंध यात्री सेवा से ज्यादा व्यापार और माल ढुलाई से है। इसका उद्देश्य ऐसा जमीन आधारित परिवहन मार्ग तैयार करना है, जिसके जरिए रूस से भारत तक सामान समुद्री रास्ते के अलावा दूसरे मार्ग से पहुंचाया जा सके। रूस ने भारत तक जमीन के रास्ते पहुंचने की बात क्यों की? रूस के उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन की ओर से भारत और हिंद महासागर तक संभावित रेल कनेक्शन को लेकर विचार सामने आया है। प्रस्तावित रास्ता मध्य एशिया और ईरान की तरफ से भारत तक पहुंचने की संभावना पर आधारित है। कुछ संभावित विकल्पों में तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते भारत तक पहुंचने की बात कही गई है। इस तरह के कनेक्शन की चर्चा का सबसे बड़ा कारण व्यापार है। आज भारत और रूस के बीच बड़ी मात्रा में सामान समुद्री रास्ते से आता-जाता है। समुद्री मार्ग लंबा होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, समुद्री सुरक्षा और प्रमुख जलडमरूमध्य पर भी निर्भर करता है। अगर भविष्य में एक मजबूत जमीन आधारित कॉरिडोर तैयार होता है, तो रूस को भारत तक सामान पहुंचाने के लिए एक अतिरिक्त रास्ता मिल सकता है। इसी वजह से इस पूरे विचार को सिर्फ Train चलाने की योजना के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह एक बड़े परिवहन नेटवर्क की कल्पना है, जिसमें रेल, सड़क और समुद्री रास्तों को आपस में जोड़ा जा सकता है। भारत और रूस के बीच कौन-सा रूट हो सकता है? प्रस्तावित कनेक्शन को लेकर जो रास्ता चर्चा में आया है, वह काफी लंबा और जटिल है। संभावित रूट रूस से शुरू होकर मध्य एशिया के देशों की तरफ बढ़ सकता है। इसके बाद तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होते हुए भारत या हिंद महासागर तक पहुंचने की संभावना बताई गई है। लेकिन यह बात समझना जरूरी है कि यह कोई तैयार Train रूट नहीं है। कई जगहों पर नए इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी और कई देशों के बीच समझौते भी करने पड़ेंगे। अगर भविष्य में यह योजना आगे बढ़ती है, तो इसके पीछे हजारों किलोमीटर लंबा रेल नेटवर्क, सीमा पर सुविधाएं, कस्टम व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और अलग-अलग देशों के रेलवे सिस्टम के बीच तालमेल की जरूरत होगी। यही कारण है कि इस तरह के प्रोजेक्ट को पूरा होने में कई साल लग सकते हैं। दिल्ली से मॉस्को तक कितना लंबा होगा सफर? अब सबसे दिलचस्प सवाल आता है कि अगर कभी दिल्ली और मॉस्को के बीच सीधी ट्रेन चलती है, तो सफर कितना लंबा होगा? दिल्ली और मॉस्को के बीच हवाई दूरी करीब 4,300 किलोमीटर के आसपास है। लेकिन रेल से दूरी इससे काफी ज्यादा होगी, क्योंकि ट्रेन को सीधी लाइन में नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों और उनके रेल नेटवर्क से होकर गुजरना पड़ेगा। संभावित रूट के आधार पर यह दूरी लगभग 6,000 से 7,500 किलोमीटर या उससे भी अधिक हो सकती है। हालांकि अभी आधिकारिक रेल रूट तय नहीं हुआ है, इसलिए इसे अंतिम दूरी नहीं माना जा सकता। अगर केवल गणित के हिसाब से देखें और Train लगातार तेज रफ्तार से चलती रहे, तो इतनी दूरी कुछ दिनों में पूरी की जा सकती है। लेकिन वास्तविक अंतरराष्ट्रीय रेल यात्रा में ऐसा संभव नहीं होता। Train को कई जगह रुकना पड़ेगा। सीमा पर पासपोर्ट और वीजा की जांच होगी। कस्टम प्रक्रिया पूरी करनी होगी और अलग-अलग देशों के रेलवे नियमों का पालन करना पड़ेगा। इसलिए अगर कभी दिल्ली से मॉस्को तक सीधी Train सेवा शुरू होती भी है, तो सफर का समय केवल Train की रफ्तार देखकर तय नहीं किया जा सकता। सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती है रेलवे Gauge भारत से रूस तक रेल कनेक्शन बनाने में सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक रेलवे Gauge भी है। आसान भाषा में समझें तो Gauge का मतलब रेलवे की दो पटरियों के बीच की दूरी होता है। दुनिया के अलग-अलग देशों में रेलवे Gauge अलग-अलग आकार का होता है। भारत में इस्तेमाल होने वाला Broad Gauge और रूस में इस्तेमाल होने वाला रेल Gauge एक जैसा नहीं है। रास्ते में आने वाले दूसरे देशों के रेलवे नेटवर्क में भी अलग-अलग Gauge मिल सकते हैं। इसका मतलब यह है कि एक ही ट्रेन पूरी यात्रा के दौरान हर जगह सामान्य तरीके से नहीं चल पाएगी। ऐसे मामलों में या तोTrain के पहियों को बदलने की व्यवस्था करनी पड़ती है या फिर यात्रियों और सामान को दूसरे रेलवे सिस्टम में ट्रांसफर करना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क में इस समस्या को दूर करने के लिए अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन भारत से रूस तक इतने लंबे रूट पर इसे लागू करना बड़ी चुनौती होगी। क्या आम यात्री इस Train में बैठ पाएगा? यही सवाल इस पूरी खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उससे यह नहीं कहा जा सकता कि भारत और रूस के बीच बनने वाला संभावित रेल कॉरिडोर आम यात्रियों के लिए शुरू होने जा रहा है। इस चर्चा का मुख्य फोकस व्यापार और माल ढुलाई पर है। यानी रूस से भारत और भारत से रूस तक सामान पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक जमीन आधारित रास्ता तैयार करना इसका बड़ा उद्देश्य हो सकता है। इसलिए अगर आप यह सोच रहे हैं कि जल्द ही दिल्ली रेलवे स्टेशन से मॉस्को जाने वाली ट्रेन की टिकट बुक कर पाएंगे, तो फिलहाल ऐसा नहीं है। अभी इसके लिए