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Bengaluru Metro Pink Line: स्टेशनों के नाम बदलने की मांग

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बेंगलुरु में मेट्रो का सफर अब सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का जरिया नहीं रह गया है। शहर के लाखों लोग रोजाना काम, पढ़ाई और दूसरे जरूरी कामों के लिए नम्मा मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में मेट्रो स्टेशन का नाम भी काफी मायने रखता है। स्टेशन का नाम सुनकर ही यात्री अंदाजा लगाते हैं कि उन्हें किस इलाके में उतरना है और वहां से आगे कैसे जाना है। लेकिन इन दिनों बेंगलुरु की निर्माणाधीन Bengaluru Metro Pink Line अपनी रफ्तार और निर्माण कार्य से ज्यादा स्टेशनों के नाम को लेकर चर्चा में है। खासकर काडूगोंडनहल्ली स्टेशन का नाम बदलकर ‘अरेबिक कॉलेज मेट्रो स्टेशन’ रखने की मांग ने एक नई बहस शुरू कर दी है। यह मांग कर्नाटक के आवास मंत्री बी. जेड. ज़मीर अहमद खान ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के सामने रखी है। दूसरी ओर, कुछ कन्नड़ समर्थक संगठनों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए स्टेशन के लिए एक अलग नाम सुझाया है। दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ काडूगोंडनहल्ली ही नहीं, बल्कि Bengaluru Metro Pink Line के IIMB, तावरकेरे और कुछ दूसरे स्टेशनों के नाम बदलने के प्रस्ताव भी सामने आए हैं। काडूगोंडनहल्ली स्टेशन का नाम ‘अरेबिक कॉलेज’ रखने की मांग क्यों उठी? Bengaluru Metro Pink Line के उत्तर दिशा वाले भूमिगत हिस्से में काडूगोंडनहल्ली एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। इस स्टेशन का मौजूदा प्रस्तावित नाम काडूगोंडनहल्ली है, लेकिन अब इसे बदलकर अरेबिक कॉलेज मेट्रो स्टेशन रखने की मांग की जा रही है। यह मांग आवास मंत्री बी. जेड. ज़मीर अहमद खान ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को एक ज्ञापन सौंपकर रखी है। उनका कहना है कि स्टेशन का नाम ऐसा होना चाहिए, जो उस इलाके की पहचान और स्थानीय महत्व को सही तरीके से दिखाए। इसी मांग को लेकर यूनाइटेड कर्नाटक चैरिटेबल ट्रस्ट ने भी बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी BMRCL के प्रबंध निदेशक पी. सी. जाफर से मुलाकात की है। ट्रस्ट ने भी स्टेशन का नाम अरेबिक कॉलेज रखने का अनुरोध किया है। अरेबिक कॉलेज को ही नाम बनाने के पीछे क्या वजह है? इस मांग के पीछे सबसे बड़ा तर्क स्टेशन के ठीक सामने मौजूद एक प्रमुख संस्थान का है। अरेबिक कॉलेज, जिसका औपचारिक नाम दार-उल-उलूम सबीलुर रशाद है, प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन के सामने स्थित है। ट्रस्ट का कहना है कि काडूगोंडनहल्ली का मुख्य इलाका स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर दूर है। ऐसे में अगर स्टेशन का नाम काडूगोंडनहल्ली रखा जाता है, तो बाहर से आने वाले यात्रियों को इलाके की सही जगह समझने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में पहले से ही अरेबिक कॉलेज नाम का इस्तेमाल होता है। बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम यानी BMTC के बस स्टॉप का नाम भी अरेबिक कॉलेज है। वहीं, पॉटरी टाउन से थानिसांद्रा तक के इस हिस्से को अरेबिक कॉलेज पोस्ट के नाम से भी पहचाना जाता है। यही वजह है कि इस प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि Bengaluru Metro Pink Line के इस स्टेशन का नाम अरेबिक कॉलेज रखने से यात्रियों को जगह पहचानने में आसानी होगी। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी यह केवल नाम बदलने की मांग है। स्टेशन का नाम आधिकारिक तौर पर नहीं बदला गया है। कन्नड़ संगठनों ने क्यों जताया विरोध? सामने आया ‘रमज़ान साब’ का नाम जैसे ही काडूगोंडनहल्ली स्टेशन का नाम बदलकर अरेबिक कॉलेज रखने की मांग सामने आई, कुछ कन्नड़ समर्थक संगठनों ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि इलाके के पुराने और स्थानीय नाम को हटाना सही नहीं होगा। Bengaluru Metro Pink Line इन संगठनों का मानना है कि काडूगोंडनहल्ली नाम उस क्षेत्र की अपनी पहचान से जुड़ा हुआ है। अगर स्टेशन का नाम बदलने पर विचार किया जा रहा है, तो स्थानीय इतिहास और वहां के लोगों के योगदान को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसी दौरान संगठनों की ओर से एक दूसरा सुझाव भी सामने आया। उन्होंने कहा कि अगर स्टेशन का नाम बदलना ही है, तो इसे कन्नड़ एकीकरण आंदोलन में शहीद हुए रमज़ान साब के नाम पर रखा जा सकता है। इस तरह एक ही स्टेशन के लिए अलग-अलग नामों की मांग सामने आ गई है। एक पक्ष अरेबिक कॉलेज नाम को स्थानीय पहचान और यात्रियों की सुविधा से जोड़ रहा है, जबकि दूसरा पक्ष पुराने नाम और क्षेत्र के इतिहास को अहमियत दे रहा है। Bengaluru Metro Pink Line का यह मामला अब सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए यह सवाल भी उठ रहा है कि किसी सार्वजनिक जगह का नाम तय करते समय स्थानीय लोगों की राय, ऐतिहासिक पहचान और यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। BMRCL ने अभी क्या फैसला लिया है? नाम बदलने की मांगों के बीच सबसे जरूरी सवाल यही है कि क्या BMRCL ने अरेबिक कॉलेज नाम को मंजूरी दे दी है? फिलहाल ऐसा नहीं है। BMRCL के प्रबंध निदेशक पी. सी. जाफर के अनुसार, भूमिगत पिंक लाइन के स्टेशनों के नाम को लेकर अभी तुरंत कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा रहा है। इस पर उचित समय पर विचार किया जाएगा। इसका मतलब है कि काडूगोंडनहल्ली स्टेशन का नाम बदलने की मांग अभी विचार के स्तर पर है। जब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक इसे अरेबिक कॉलेज स्टेशन कहना सही नहीं होगा। स्टेशन का नाम बदलना सिर्फ एक बोर्ड पर नया नाम लिखने का काम नहीं है। इससे मेट्रो के नक्शे, यात्रियों की जानकारी, स्टेशन के साइनबोर्ड और सार्वजनिक घोषणाओं पर भी असर पड़ता है। इसलिए किसी भी प्रस्ताव पर फैसला लेने से पहले अलग-अलग पहलुओं को देखना जरूरी होता है। Bengaluru Metro Pink Line के मामले में भी अभी यही स्थिति है। अलग-अलग लोगों और संगठनों ने अपने सुझाव दिए हैं, लेकिन अंतिम नाम तय होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सिर्फ काडूगोंडनहल्ली नहीं, इन स्टेशनों के नाम बदलने की भी मांग पिंक लाइन के नामकरण को लेकर चर्चा केवल एक स्टेशन तक सीमित नहीं है। इससे पहले भी IIMB और तावरकेरे जैसे स्टेशनों के नाम बदलने की मांग सामने आ चुकी है। स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मेट्रो स्टेशन का नाम उस इलाके की पहचान के हिसाब से होना चाहिए, जहां वह