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जयपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन: ये है भारत का सबसे क्लीन स्टेशन!

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जयपुर, राजस्थान की राजधानी, अपनी रंगीन संस्कृति, भव्य महलों और बाजारों के लिए तो मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस गुलाबी नगरी का दिल कहां धड़कता है? खैर, यह स्टेशन सिर्फ ट्रेनों का ठिकाना नहीं है बल्कि जयपुर की आत्मा का प्रतीक है। यह शहर का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है, जो हर दिन लाखों यात्रियों को उनके ठिकानों तक ले जाता है। जयपुर जंक्शन न सिर्फ एक रेलवे स्टेशन है बल्कि यह 2002 से उत्तर पश्चिम रेलवे का मुख्यालय भी है। यह स्टेशन 1895 से काम कर रहा है, यानी 130 साल पुराना है। इतने पुराने होने के बावजूद यह आज भी आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यह स्टेशन दिल्ली, अहमदाबाद, जोधपुर जैसे बड़े शहरों को जोड़ता है। चाहे आप पर्यटक हों या स्थानीय, जयपुर जंक्शन आपके सफर को आसान और यादगार बनाता ही है। तो क्या आपने कभी सोचा कि कोई रेलवे स्टेशन इतना खास क्यों हो सकता है? वैसे यह सिर्फ ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं है। यहां की सुंदरता, सुविधाएं, खाना और इतिहास इसे अनोखा बनाते हैं। मैंने एक बार जयपुर जंक्शन से ट्रेन पकड़ी थी। स्टेशन की रौनक, भीड़ और चाय की खुशबू ने मुझे यहां बांध लिया था। जयपुर जंक्शन का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह शहर का प्रवेश द्वार है। अगर आप जयपुर घूमने आ रहे हैं, तो शायद यहीं उतरेंगे। स्टेशन से हवा महल, जंतर मंतर और आमेर किला ज्यादा दूर नहीं है। यह स्टेशन पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक सेतु की तरह काम करता है। ऐतिहासिक महत्व और इसकी सुंदर डिजाइन इसे बनाती है देखने योग्य जयपुर जंक्शन की शुरुआत 1895 में हुई थी। उस समय रेलवे ब्रिटिश शासन के अधीन थी। स्टेशन को जयपुर रियासत के लिए बनाया गया था, ताकि व्यापार और यात्रा आसान हो सके। तब से यह लगातार बढ़ता गया। आज यह उत्तर पश्चिम रेलवे का मुख्यालय है, जहां से जयपुर मंडल का संचालन होता है। इस स्टेशन की इमारत पुराने और नए का मिश्रण है। इसका बाहरी हिस्सा गुलाबी रंग का है, जो जयपुर की पहचान से मेल खाता है। अंदर आपको आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, जैसे वाई-फाई, लिफ्ट और स्वच्छ वेटिंग रूम। स्टेशन में सात प्लेटफॉर्म हैं, जो हर दिन सैकड़ों ट्रेनों को संभालते हैं। इसका डिजाइन इतना खूबसूरत है कि कई बार फिल्मों में भी इसे दिखाया गया है। जब मैं यहां पहुंचा तो मैंने स्टेशन पर एक पुराने रेलवे कर्मचारी से बात की। उन्होंने बताया कि पहले यहां भाप से चलने वाली ट्रेनें आती थीं। लोग घोड़े पर स्टेशन पहुंचते थे। आज वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें यहां रुकती हैं। यह बदलाव जयपुर जंक्शन की ताकत दिखाता है। स्टेशन की दीवारों पर राजस्थानी कला के नमूने भी देखे जा सकते हैं, जो इसे और आकर्षक बनाते हैं। दरअसल, यहां का मेट्रो स्टेशन भी पास में है, जो पिंक लाइन से जुड़ा है। इससे पर्यटक आसानी से शहर घूम सकते हैं। स्टेशन की साफ-सफाई भी कमाल की है। 2019 में इसे एयरपोर्ट जैसा फील देने के लिए सुधार किया गया था। अगर आप इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखते हैं, तो जयपुर जंक्शन आपको निराश कर ही नहीं सकता है। आधुनिक सुविधाओं से लैस और यात्रियों का ध्यान खींचने में अव्वल  जयपुर जंक्शन सिर्फ पुराना नहीं है, बल्कि बहुत आधुनिक भी है। यहां की सुविधाएं यात्रियों की जिंदगी आसान बनाती हैं। स्टेशन पर मुफ्त वाई-फाई है, ताकि आप ट्रेन का इंतजार करते हुए इंटरनेट चला सकें। साफ-सुथरे वेटिंग रूम हैं, जहां आप आराम कर सकते हैं। महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए अलग से व्यवस्था है। पार्किंग की सुविधा भी शानदार है। अगर आप कार या बाइक से आते हैं, तो आसानी से जगह मिल जाएगी। स्टेशन पर लिफ्ट और एस्केलेटर हैं, जिससे बुजुर्गों और सामान वाले यात्रियों को आसानी होती है। टिकट काउंटर पर लंबी लाइन से बचने के लिए ऑटोमैटिक टिकट मशीनें हैं। इसके अलावा आप UTS ऐप से भी टिकट बुक कर सकते हैं। एक खास बात जयपुर जंक्शन पर भारत की पहली रेलवे चौपाटी शुरू हुई है। यह 24 घंटे खुली रहती है। यहां साउथ इंडियन, चाइनीज और इटैलियन खाना मिलता है। हमने वहां जाकर सबसे पहले पाव भाजी खाई थी, स्वाद तो यह मानिए की लाजवाब था। चौपाटी में बैठने के लिए टेबल-कुर्सियां, टीवी और साफ शौचालय हैं। यह यात्रियों के लिए एक मजेदार अनुभव हो सकता है। हाल ही में स्टेशन पर सेकंड एंट्री गेट बनाया गया है, जो हसनपुरा की तरफ से है। इससे भीड़ कम होगी और लोग आसानी से आ-जा सकेंगे। स्टेशन पर सोलर पैनल भी लगे हैं, जो पर्यावरण के लिए अच्छा है। अगर आप दिव्यांग हैं, तो व्हीलचेयर और सहायता उपलब्ध है। कुल मिलाकर, जयपुर जंक्शन यात्रियों की हर जरूरत का ख्याल रखता है। अमृत स्टेशन योजना और भविष्य की नई तस्वीर का निर्माण जयपुर जंक्शन को और बेहतर बनाने के लिए रेल मंत्रालय ने अमृत स्टेशन योजना शुरू की है। इसके तहत स्टेशन का पुनर्विकास हो रहा है, जिसकी लागत 717 करोड़ रुपये है। इस योजना का मकसद है स्टेशन को विश्व स्तरीय बनाना। लगभग 60% काम पूरा हो चुका है, और जल्द ही यह एयरपोर्ट जैसा दिखेगा। पुनर्विकास में क्या क्या होगा? एक स्काई वॉक बनेगा, जो प्लेटफॉर्म 4 और 5 को जोड़ेगा। यह एयर-कंडीशन्ड होगा, ताकि गर्मी में भी सुकून मिले सके। स्टेशन पर और दुकानें, रेस्टोरेंट और वेटिंग एरिया बन रहे हैं। पार्किंग को और बड़ा किया जा रहा है। 2025 में कुछ ट्रेनों को डायवर्ट किया गया, ताकि काम तेजी से हो सके और परिणाम वही रहे। मैंने सुना कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद स्टेशन का दौरा किया था। उन्होंने कहा कि जयपुर जंक्शन न सिर्फ सुंदर होगा, बल्कि यात्री क्षमता भी तीन गुना बढ़ेगी। नए गेट और बेहतर रास्तों से भीड़ कम होगी। यह सब देखकर लगता है कि जयपुर जंक्शन भविष्य में और चमकेगा। इस योजना का असर ट्रेनों पर भी पड़ा। मई 2025 तक कुछ ट्रेनें खातीपुरा, दुर्गापुरा या सांगानेर तक ही चल रही हैं। लेकिन यह अस्थायी है। काम पूरा होने पर यात्रियों को और सुविधा मिलेगी। अगर आप जयपुर जंक्शन से सफर कर रहे हैं, तो ट्रेनों की जानकारी पहले चेक करें। यह आपके