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20 Most Famous National Parks in India

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बरसात का सीजन खत्म हो गया है और धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, ऐसे में नेशनल पार्क्स भी जंगल सफारी और टूर के लिए खुल गए हैं। अगर आप अभी किसी अच्छे से वीकेंड टूर की प्लानिंग कर रहे हैं तो जंगल सफारी और टूर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं भारत के कुछ चुनिंदा नेशनल पार्क्स के बारे में, जहां आप अच्छे से बायोडायवर्सिटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं और अपना वीकेंड एंजॉय कर सकते हैं। 1. गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के घूम रहे बब्बर शेर, गुजरात के सोमनाथ जिले में स्थित गिर नेशनल पार्क की पहचान हैं। यहां मैमल्स (mammals) के 38 प्रजाति पक्षियों (birds) के 300 से अधिक प्रजाति रेप्टाइल्स (reptiles) के साथ इस प्रजाति और इनसेक्टस (insects) के 2,000 से भी ज्यादा प्रजाति पाए जाते हैं। यह नेशनल पार्क सिर्फ जानवरों के लिए नहीं बल्कि यहां पाए जाने वाले पौधों के विविधता के लिए भी मशहूर है। 2. पेरियार नेशनल पार्क (Periyar National Park) पेरियार नेशनल पार्क 350 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ एक ऐसा नेशनल पार्क है जो हाथियों और बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। पेरियार नेशनल पार्क को दो नदियों का पानी उपलब्ध होता है। जिसमें से पहली नदी का नाम है पेरियार और दूसरी नदी का नाम है पांबा। यह नेशनल पार्क 1934 में नीली कक्कांपेट्टी गेम सेंचुरी के नाम से स्थापित किया गया था। इस नेशनल पार्क का नाम 1950 में बदलकर पेरियार वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रखा गया। इस पार्क के देखरेख का काम डिपार्मेंट आफ फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ केरल और साथ ही गवर्नमेंट आफ इंडिया द्वारा संभाला जाता है। 3. बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है। वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 4. दुधवा नेशनल पार्क (Dudhwa National Park) दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश का सबसे प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 490 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1977 में हुई थी। इस राष्ट्रीय उद्यान का उद्देश्य बारहसिंघा का संरक्षण करना है। यहां पर बाघ, बारहसिंघा, सुस्त भालू, एक सींग वाले गैंडे और 400 से अधिक पक्षी प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। सुहेली नदी और मोहाना नदी इस उद्यान की जीवन रेखा का कार्य करती है। इन नदियों में गंगेटिक डॉल्फिन भी निवास करती है। 5. सुंदरवन नेशनल पार्क (Sundarban National Park) सुंदरवन नेशनल पार्क विश्व के सबसे बड़े डेल्टाई क्षेत्र (सुंदरवन डेल्टा) में स्थित है। यह नेशनल पार्क अपने रॉयल बंगाल टाइगरों (Royal Bengal Tigers) के लिए प्रसिद्ध है। यह नेशनल पार्क लगभग 1330 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। सर्वप्रथम सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान को 1973 में मूल सुंदरवन बाघ रिज़र्व क्षेत्र का कोर क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। इसके पश्चात 1977 में इसे वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया। तथा बाद में 4 मई 1984 को इसे नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। सुंदरवन नेशनल पार्क में रॉयल बंगाल टाइगरों के अलावा भी कई प्रकार के वन्य जीव निवास करते है जिनमे बर्ड्स (Birds), रेप्टाइल्स (Reptiles) और इनवर्टेब्रेट्स (Invertebrates) शामिल है। इसके अलावा यहाँ साल्ट वाटर (Salt Water) में रहने वाले मगरमच्छ भी पाए जाते है। 6. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। 7. पेंच नेशनल पार्क (Pench National Park) पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का एक प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 758 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1975 में हुई थी। यहां पर पीफोल, कोपीजेन्ट, रेड जंगल फोल, रेड वेन्टेड बुलबुल, बेस्ट डबारबेट, क्रीमसन, मेंगपाई राबिन, रॉकेट टेल डोगों, व्हिस्टल टील, लेसर आदि पक्षियों की प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। पेंच नदी इस उद्यान को दो भागों में बाँटती है। पेंच टाइगर रिज़र्व को भारत का सर्वश्रेष्ठ टाइगर रिज़र्व होने का गौरव प्राप्त है। रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध कहानियों में से एक ‘द जंगल बुक’ इसी पार्क पर आधारित है। 8. राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है। हाथियों, तेंदुओं, बाघों और हिरनों जैसे जानवरों को अपने में पनाह देने वाला यह पार्क पर्यटकों के मन को भी काफी लुभाता है। सुहाने मौसम, हरे भरे पेड़ और पहाड़ियों के बीच खुले में घूम रहे जानवर को देखना अपने आप में ही अविस्मरणीय दृश्य होता है। 9. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (Valmiki Tiger Reserve) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के रह रहे जंगली जानवर!  वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की यही खासियत लोगों

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एक ऐसा राष्ट्रीय उद्यान जो भारत और भूटान दोनों देशों में फैला हुआ है

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असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है।मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। यहां आप शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप प्लान कर सकते हैं। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। ब्रह्मपुत्र नदी इस नेशनल पार्क की जीवन दायिनी नदी है। मानस नेशनल पार्क का इतिहास (History of Manas National Park) सबसे पहले मानस नेशनल पार्क को वर्ष 1928 में एक सेंचुरी डिक्लेयर किया गया था। 1973 ई. में इसे बायो रिजर्व क्षेत्र घोषित कर दिया गया। 1990 में इस क्षेत्र को नेशनल पार्क की उपाधि दी गई और इस वन क्षेत्र का नाम मानस नेशनल पार्क पड़ गया। मानस नेशनल पार्क में जंगल सफारी (Jungle safari in manas national park)मानस नेशनल पार्क में अगर आप जंगल सफारी करना चाहते हैं तो यहां जंगल सफारी के दो ऑप्शन उपलब्ध हैं। पहला जीप सफारी और दूसरा एलिफेंट सफारी। जीप सफारी (Jeep Safari)अगर आप भारतीय हैं और बाँसबाड़ी जोन में जंगल सफारी करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको 4500 रुपए पर जीप खर्च करना होगा। वहीं भुईयांपाड़ा जॉन के लिए आपको ₹5500 पर जीप पे करना होगा। अगर बात किया जाए विदेशी पर्यटकों की तो विदेशी पर्यटकों को बाँसबाड़ी जोन में जंगल सफारी करने के लिए ₹8000 पर जीप पे करना होता है। वहीं भुईयांपाड़ा जोन में उनकाे ₹9000 पर जीप पे करना होता है। एक जीप को एक बार में पांच आदमी के लिए बुक किया जा सकता है।अगर बात करें जीप सफारी की टाइमिंग की तो यहां हर दिन तीन टाइम जीप सफारी करवाई जाती है। पहला सुबह के 6:30 से 9:30 तक, दूसरा सुबह के 10:00 से दोपहर के 1:00 तक और तीसरा दोपहर के 2:00 से शाम के 5:00 बजे तक। अगर आप यहां जंगल सफारी करने आ रहे हैं तो आप अपने हिसाब से जंगल सफारी की टाइमिंग सेट कर सकते हैं। एलिफेंट सफारी (Elephant Safari) मानस नेशनल पार्क में एलिफेंट सफारी सिर्फ बाँसबाड़ी जोन में करवाई जाती है अगर आप एलिफेंट सफारी करना चाह रहे हैं तो इसके लिए टिकट की प्राइस भारतीय पर्यटकों के लिए 1450 रुपए प्रति व्यक्ति और विदेशियों के लिए ₹3200 प्रति व्यक्ति होता है। एलिफेंट सफारी का यह टिकट 1 घंटे के लिए मान्य होता है। मानस नेशनल पार्क में एलिफेंट सफारी की टाइमिंग सुबह के समय ही होती है। आप यहां सुबह के 6:00 बजे से 7:00 बजे तक और 7:00 बजे से 8:00 बजे तक इस एलिफेंट सफारी का लुफ्त उठा सकते हैं।मानस नेशनल पार्क में चार तरह के टूर पैकेज उपलब्ध करवाए जाते हैं। अगर आप मानस नेशनल पार्क घूमना चाहते हैं तो आप अपनी सुविधा अनुसार इन टूर पैकेज में से किसी एक टूर पैकेज का चयन कर सकते हैं। मानस नेशनल पार्क के टूर पैकेजों के बारे में जानकारी निम्नांकित है : मानस नेशनल पार्क जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Manas National Park) अगर आप वाइल्डलाइफ को पसंद करते हैं और वाइल्डलाइफ को एक्सप्लोर करने के लिए अगर आप मानस नेशनल पार्क जा रहे हैं तो मानसून के समय जाने से बचें। क्योंकि मानसून के समय पूर्वोत्तर भारत में बहुत अधिक बारिश होने के कारण बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। जिसके कारण आपका पूरा का पूरा टूर प्लान खराब हो सकता है। इससे बचने के लिए आप अक्टूबर से मार्च तक के समय का चयन कर सकते हैं। क्योंकि इस समय बारिश की संभावना कम होती है और मौसम भी ठंडा होता है। कैसे पहुंचे मानस नेशनल पार्क (How to reach Manas National Park) मानस नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आप सड़क रेल और हवाई तीनों ही मार्गों का उपयोग कर सकते हैं। अगर आप हवाई मार्ग से मानस नेशनल पार्क पहुंचना चाह रहे हैं तो आपको सबसे पहले गुवाहाटी एयरपोर्ट पहुंचना होगा। जो कि असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित है और देश के प्रमुख शहरों से बहुत ही अच्छे तरीके से फ्लाइट से कनेक्टेड है। अगर आपके शहर से यहां की डायरेक्ट फ्लाइट नहीं मिल रही है तो आप कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिए अभी यहां पहुंच सकते हैं।रेल मार्ग से यहां पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन बरपेटा रेलवे स्टेशन है जो मानस नेशनल पार्क से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से आप बहुत ही आसानी से मानस नेशनल पार्क पहुँच सकते हैं। बरपेटा रेलवे स्टेशन देश के अन्य राज्यों के रेलवे स्टेशनों से बहुत ही अच्छे तरीके से जुड़ा है।अगर आप मानस नेशनल पार्क जाने के लिए सड़क मार्ग का उपयोग करना चाहते हैं तो आसपास के शहरों से यहां आप आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा दूर के शहरों से भी आप यहां अपनी पर्सनल गाड़ी या कैब का उपयोग करके आ सकते हैं। सिलीगुड़ी गलियारा के द्वारा बड़े ही आसानी से मानस नेशनल पार्क तक पहुंचा जा सकता है।

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Mussoorie : The Best Tourist Place

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देहरादून के करीब ये ब्यूटीफुल डेस्टिनेशन आपको अपना दीवाना बना देगा। जिंदगी की तरह ये वादियां भी कितनी हसीन हैं,आसमान नीला और ज़मीं रंगीन है..!रुकावटें तो बहुत आएंगी परना मंजिलों के लिए ना ही रास्तों के लिएमेरा ये सफर है खुद की पहचान के लिए। (Mussoorie: Best Tourist Place) और ऐसे ही हंसते- मुस्कुराते पहाड़ों के इस सफर में आज फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल की टीम आ पहुंची है दिल्ली वालों की फेवरेट और करीबी डेस्टिनेशन पहाड़ों की रानी मसूरी में। जहां हर मौसम घूमने वालों का तांता लगा रहता है। कुछ स्नोफॉल के मजे लेने यहां आ पहुँचते हैं, तो कुछ चिलचिलाती गर्मी से राहत पाते यहां दिखाई देते हैं। ठण्ड के मौसम में तो “पहाड़ों की रानी” बेशक ही किसी हैवन से कम नहीं। यहाँ पहाड़ों में बादल नीचे और आप ऊपर होंगे, चारों तरफ फॉग, और ठण्ड से काँपते हाथों में चाय। ये छोटे-छोटे अहसास ही हमें पहाड़ों के करीब ले आते हैं। (Mussoorie) क्वीन ऑफ़ हिल्सदेहरादून से मसूरी का सफर काफी शानदार है, पेड़ों से घिरी सड़कें और हर मोड़ ठहरने और नेचर का लुत्फ़ उठाने के लिए बने कैफ़ेज़ इस सफर में चार चाँद लगा देते हैं। मसूरी के इस सफर में रास्ते में आपको दिखाई देगा एक बहुत ही सुन्दर शिव मंदिर। खूबसूरत वादियों बीच स्थित इस मंदिर की खास बात यह है, कि यहां दर्शन करने वालों को दान करने पर सख्त मनाही है। यहां दान पात्र जैसी कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। MUSSOORIE : Best Tourist Place चलेंगे अकेले तो सफर में हैरानियां भी आएंगीजुड़ेंगे नए किस्से, नई जगह, नए किरदारऔर बदलेंगे मौसम तो दुश्वारियां भी आएंगीघुमक्कड़ हो तो बचपन साथ लेकर चलना फिर नादानियों, शैतानियों के साथ दिलचस्प कहानियां भी आएंगी। Mussoorie Lake कुछ दूर चलने पर मसूरी से थोड़ा पहले आपको मसूरी लेक जाने का रास्ता दिखाई देगा और मसूरी लेक गए बिना शायद ही आपका मसूरी ट्रिप मुकम्मल हो। इस ब्यूटीफुल डेस्टिनेशन में जाना बिलकुल न भूलें क्योंकि यहां होने वाले एडवेंचर आपको शायद ही मेन मसूरी में करने को मिले। पहाड़ों के बीचों-बीच लेक में बोटिंग करने का भी अलग ही मज़ा है। इसके साथ -साथ लेक के किनारे छोटी सी मार्केट इस जगह को और भी खूबसूरत बना देती है। जहां आप अपने मन-पसंद की खरीदारी कर सकते है। इसके अलावा इस मार्केट में थोड़ा आगे बढ़कर आपको पहाड़ी ड्रेस में फोटोशूट करने का मौका भी मिलेगा। जिसमें विथ फोटो आपको 80 रुपए चार्ज पड़ता है और विथाउट फोटो 50 तो पहाड़ों में आकर पहाड़ी वाइब्स का आनंद जरूर उठाएं। मसूरी लेक में आकर आप कई तरह की एडवेंचर एक्टिविटीज भी कर सकते हैं जैसे ज़िप लाइन, क्लाइम्बिंग, पैराग्लाइडिंग। माल रोड जैसे ही आप मसूरी लेक से आगे चलेंगे तो थोड़ी ही देर में आप पहुँच जायेंगे मेन मसूरी की सबसे चहल-पहल वाली जगह जो है, मसूरी का माल रोड। जहां रोड के एक तरफ शॉपिंग के लिए दुकानें मिल जाएंगी और वहीं दूसरी तरफ कुदरत के खूबसूरत नज़ारे आपको दिखाई देंगे। वहीं मॉल रोड में आपको तुर्किश आइसक्रीम की शॉप भी दिखाई देगी। जहां आप न सिर्फ आइसक्रीम बल्कि तुर्किश अंदाज़ में पेश किए मनोरंजन का आनंद भी ले सकते हैं। क्राइस्ट चर्च मॉल रोड जाकर क्राइस्ट चर्च को एक्स्प्लोर करना बिलकुल न भूलें। इस चर्च को 1836 में अंग्रेजों के द्वारा बनवाया गया था, जो हिमालय पर्वतमाला का सबसे पुराना चर्च माना जाता है। 1906 में, वेल्‍स की राजकुमारी जो बाद में इंग्‍लैंड की क्‍वीन मैरी बन गई थी, उन्होंने इस चर्च का दौरा किया था। कहा जाता है कि राजकुमारी ने इस चर्च के आंगन में एक देवदार के पेड़ को लगाया था और यह पेड़ आज तक यहां लगा हुआ है। Mussoorie कैम्पटी फॉल मसूरी के खूबसूरत नज़रों से तो अब आप वाकिफ हो ही गए होंगे। पर यहां के वाटरफॉल्स को देखे बिना आपका यह सफर अधूरा ही माना जाएगा। इसलिए मसूरी आकर यहां के बेस्ट वॉटरफॉल “कैम्पटी फॉल” में जाना बिलकुल न भूलें। कैम्पटी फॉल जाते ही आपको एहसास हो जाएगा मानो कुदरत ने इस जगह को बड़ी फुर्सत से बनाया हो। गर्मियों के लिए यह बेस्ट डेस्टिनेशन है और मुख्य सड़क से आप रोपवे में भी वॉटरफॉल तक आ सकते हैं।

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Best Tourist Places to Visit in Delhi

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मेरे चर्चों की गूँज काफी है, मैं किसी परिचय की मोहताज़ नहीं, मैं दिल्ली हूँ, मेरी नीव रखी किसने, यह तो मुझे भी याद नहीं देश की विरासत को अब तक मैंने संभाला है, ग्रंथ महाभारत में इन्द्रप्रस्थ मेरे बचपन का नाम बताया है। हाँ, मैंने समेटी है, संस्कृति पूरे भारत की और देखी है अपने हर आँगन में कतारें लोगों के अरमानों की। देखा है कैसे उस जमाने में बलशाली राजा का ताज उतर गया और देखा है कितनी बार लोगों का सपना टूट गया।   कैसे गरीबी ने एक इंसान को मार दिया और कैसे किसी की मेहनत ने, दुनिया भर में अपना नाम किया मैंने देखा कैसे राजाओं ने मीनारों का निर्माण किया और चर्चे हो गए देश-विदेशों में, जब मैंने था शासन किया। और सिर्फ इतना ही नहीं  मेरे किस्सों की भरमार है क्योंकि राजधानी का खिताब  तो आज भी मेरे नाम है, पर चलिए फ़िलहाल सुनाती हूँ कहाँ-कहाँ मेरी खूबसूरती आज भी बरकरार है। (Best Tourist Places in Delhi) हां, यही है देश की राजधानी कही जाने वाली दिल्ली। दिल्ली अपने हर अंदाज और अनोखे इतिहास के लिए काफी जानी जाती है और हो भी क्यों ना , ऐतिहासिक इमारतें, अलग-अलग संस्कृतियों के लोग, स्ट्रीट फ़ूड के चर्चे और लाजवाब बाजार। यहां सब कुछ मौजूद है। यहां वो सब है जिनकी कमी आपको शायद देश के दूसरे शहरों में दिखाई पड़ती हो तभी तो इसे देश की शान कहा जाता है। इसके साथ ही दिल वालों की दिल्ली की खूबसूरती वाकई काबिल ए तारीफ है। तो चलिए आपको रूबरू कराते हैं देश की शान की बेस्ट टूरिस्ट प्लेसों से। Best Tourist Places to Visit in Delhi लाल किला देश की आन बान और शान का प्रतीक लाल किला दिल्ली शहर का सबसे फेमस टूरिस्ट प्लेस है। जी हां वो लाल किला जहां की प्राचीर से देश के प्रधानमंत्री हर साल 15 अगस्त के दिन तिरंगा फहराते हैं, और लाखों करोड़ों की आबादी को सम्बोधित करते हैं। वो लाल किला जो तकरीबन दो सौ साल तक मुगलों की राजधानी बना रहा, मुगलों के शासन का प्रमुख केंद्र बना रहा। जहां से तकरीबन दो सौ साल तक मुगलों ने देश पर शासन किया। अगर पर्यटन स्थलों की बात की जाए तो लाल किला दिल्ली का सबसे बड़ा टूरिस्ट प्लेस माना जाता है। इस किले के दो द्वार हैं लाहौर दरवाजा और दिल्ली दरवाजा। लाहौर दरवाजा इसका मुख्य प्रवेश द्वार है, इसके अंदर प्रवेश करते ही आपको एक शानदार और आकर्षित बाजार दिखाई देगा। जिसे छत्ता चौक या छत्ता बाजार भी कहा जाता है। Best Tourist Places in Delhi इसके अंदर जाते ही आपको मुग़ल शासन के अनोखे अंदाज़ से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसके अलावा इस किले के बिलकुल सामने आप दिल्ली की सबसे फेमस चांदनी चौक मार्केट भी एक्स्प्लोर कर सकते हैं। इसका नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन है चांदनी चौक। इंडिया गेट अगर आप इंडिया गेट मेट्रो से आना चाहते हैं तो इसका नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन है केंद्रीय सचिवालय। इंडिया गेट जो कि हमारे देश की आन बान और शान है। इंडिया गेट को फर्स्ट वर्ल्ड वॉर में शहीद हुए हमारे जवानों की याद में बनवाया गया। इसका निर्माण कार्य 1921 में शुरू हुआ और दस साल बाद 1931 में पूरा हुआ।  यह हमारे जवानों के सहस और शौर्य का प्रतीक है। 26 जनवरी को हर साल महामहिम राष्ट्रपति की मौजूदगी में हमारा देश यहीं से पूरी दुनिया के सामने शक्ति प्रदर्शन करता है। आपको बता दें 8 सितंबर 2022 को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इंडिया गेट के नए लुक यानि की सेंट्रल विस्टा एवेन्यू  का अनावरण किया। इसके साथ ही वर्षों पुराना राजपथ अब कर्तव्य पथ बन गया। देश की इस धरोहर का नया लुक बेहद ही शानदार है। तो अब इसको एक्स्प्लोर करना और भी मजेदार होने वाला है। अगर आप भी आपने देश के ऐतिहासिक और गौरवशाली पलों को सहेजना चाहते हैं तो यकीन मानिये सेंट्रल विस्टा एवेन्यू, इंडिया गेट का यह नया परिसर एक शानदार जगह है और यकीनन इससे दिल्ली के पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। जंतर मंतर : तो चलिए बात करते हैं दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस के बिलकुल सामने स्तिथ जंतर मंतर की। जो शयद अपनी अनोखी कारीगरी के साथ-साथ धरना और प्रदर्शन के कारण भी देश भर में खूब पहचाना जाता है। जंतर अंतर की एंट्री टिकट की बात करें तो यह इंडियंस के लिए 25$ है और फॉरनर्स के लिए 250 सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है और यहां आने का समय सुबह साढ़े नौ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक है। दिल्ली के जंतर मंतर में मुख्यतः चार यंत्र हैं रामयंत्र, सम्राटयंत्र, जयप्रकाश यंत्र,और मिश्र यंत्र। जब आप जंतर मंतर के अंदर प्रवेश करेंगे तो यहां आपको इसका पूरा इतिहास समझ में आ जायेगा। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि किस तरह सैकड़ों साल पहले राजा महाराजा किस तरह सूर्य चंद्रमा और गृहों के समय और गति की सही जानकारी लेते थे तो आपको एक बार जंतर मंतर अवश्य आना चाहिए। क़ुतुब मीनार : वैसे तो दिल्ली घूमने और देखने के लिहाज़ से काफी शानदार है। पर दिल्ली की कुछ बेहद खूबसूरत इमारतों को देखे बिना दिल्ली का दर्शन अधूरा सा लगता है। इसके अंदर आपको एक से एक इतिहास समेटे इमारतें दिखाई देंगी। इस मीनार को बनाने में लाल बलुआ पत्थर और मार्बल का इस्तेमाल किया गया है। और इसके अंदर गोल-गोल करीब 379 सीढ़ियां हैं। मीनार की दीवारों पर सदियों पुराने मंदिरों के अवशेष साफ दिखाई पड़ते हैं। इसमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और मंदिर की वास्तुकला मौजूद है। इसके अंदर जाकर आपको इसकी काफी सारी ऐतिहासिक बातों का पता चलेगा। इसका नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन क़ुतुब मीनार है। भारत दर्शन पार्क : जी हां, दोस्तों हम बात कर रहे हैं दिल्ली में स्तिथ एक बेहद ही शानदार जगह जिसका नाम है भारत दर्शन पार्क। यह पार्क लिंक रोड पर पंजाबी बाग़ में स्तिथ है। भारत दर्शन पार्क से सबसे नेअरेस्ट मेट्रो स्टेशन पंजाबी बाग़ वेस्ट है। आप आराम से मेट्रो स्टेशन से पैदल ही पांच मिनट में यहां पहुंच सकते हैं। इस पार्क की खासियत यह है कि इसे बहुत सारे वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल करके बनाया

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Qutub Minar Delhi – World Heritage Site

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Qutub Minar: कुतुब मीनार नहीं देखा तो दिल्ली दर्शन अधूरा है सुनहरें लफ़्ज़ों का इतिहास आज भी तेरे हर पत्थर, तेरी हर दीवार पर है जो ख़ूबसूरती उस ज़माने में थी वही क़ातिलाना अदा आज क़ुतुब मीनार पर है। वैसे तो पूरी दिल्ली ही देखने के लिहाज़ से बहुत खास है पर इसकी कुछ नायाब इमारतों को देखे बिना दिल्ली दर्शन अधूरा है। क़ुतुब मीनार इन्हीं खास और नायाब जगहों में से एक है। इस बात में कोई शक नहीं कि मुगलों ने दिल्ली को खूबसूरत बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। शायद इसी का परिणाम है  दिल्ली चारों दिशाओं से बेहद खूबसूरत मुगल इमारतों से सजी हुई है। आज अपने दिल्ली दर्शन में हम निकले हैं क़ुतुब मीनार के दीदार पर। कैसे पहुंचे क़ुतुब मीनार लॉकडाउन के बाद से ही दिल्ली में मेट्रो सेवा कई जगहों पर बदहाल है, मेट्रो स्टेशन के बाहर लम्बी-लम्बी लाइन्स आसानी से देखने को मिल जाएँगी। इसलिए हमें इन सब से बचते हुए  डीटीसी बस यात्रा का आनंद लेना ही मुनासिब लगा। एक लंबी बस यात्रा के बाद हम पहुंचे क़ुतुब मीनार। लेकिन अगर आप मेट्रो से आते हैं तो यहाँ का मेट्रो स्टेशन है क़ुतुब मीनार। सड़क के एक तरफ कुतुब मीनार परिसर है तो दूसरी तरफ टिकट घर। 40 रुपये का टिकट लिया और उत्सुकतावश अपने कदम तेजी से बढ़ा दिए क़ुतुब मीनार की तरफ। भीड़ ठीक-ठाक ही थी, क्योंकि किसी भी ऐतिहासिक इमारत में चहल-पहल के बिना हमारी  दिल्ली अधूरी है जनाब। आपको कुतुबमीनार के परिसर में जहाँ एक तरफ युवा अलग-अलग पोज़ में फोटोशूट करते दिख जायेंगे वहीँ, परिवार के साथ आने वालों के लिए भी यह एक बेहतरीन यादगार जगह है। वैसे तो साल भर यहाँ पर्यटकों का आना लगा रहता है लेकिन फिर भी अक्टूबर से मार्च का महीना यहाँ आने के लिए बेस्ट रहता है। इन दिनों में जो एक चीज आप सभी पर्यटन स्थलों पर सबसे ज्यादा मिस करेंगे वो है विदेशी सैलानी। कोविड महामारी के कारण विदेशी सैलानियों की कमी महसूस हुई और उनके साथ इतिहास का बखान करने वाले ट्यूरिस्ट गाइड भी मीनार में दूर-दूर तक नज़र नहीं आए। बस सब समय का खेल है, उम्मीद करते हैं जल्द ही सब पहले जैसा हो। काली गुबंद वाली मस्जिद पूरा कुतुब मीनार परिसर 13 अलग-अलग व्यूपोइंट्स में बंटा हुआ है। हम में से ज्यादातर लोग मुख्य कुतुब मीनार और लौह स्तम्भ से ही वाकिफ़ हैं पर और भी बहुत कुछ है अपनी नक़्क़ाशी के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध क़ुतुबमीनार के इस परिसर में। परिसर में घुसते ही सबसे पहले नजर आती है काली गुबंद वाली मस्जिद। अंदर आते ही सबसे पहले इस मस्जिद पर ही नजर पड़ती है। आगे बढ़ने पर विशिष्ट मुगल शैली के बगीचें दिखाई देते हैं  जो कि मुगलों की प्रसिद्ध चार बाग की शैली में बने हैं। ये चार बाग शैली किसी भी इमारत में जान डाल देती है। प्रसिद्ध मुगल इमारतों में बागों की इसी शैली का प्रयोग किया जाना आम बात है। मीनार के पास मण्डप जैसी दिखने वाली संरचना को कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद कहा जाता है। ये जानकारी पास लगे सूचना बोर्ड से ही मिली अन्यथा हम तो इसे एक सामान्य मण्डप भर समझ रहे थे। इस मस्जिद की स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1190 के दशक में की थी। इस मस्जिद की खासियत इसकी स्थापत्य कला है। इंडो इस्लामिक शैली से बनी ये मस्जिद और इसकी नक्काशी एक बार तो आपको दीवाना ही बना देगी। नक्काशीदार स्तंभो पर खड़ी यह मस्जिद बनावट के मामले में बेहतरीन है। अगर यूं कहें कि कुतुब मीनार परिसर की शोभा बढ़ाने में इस मस्जिद का भी अमूल्य योगदान है, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। अलाई मीनार आप जैसे-जैसे परिसर में आगे बढ़ते जायेंगे वैसे ही अद्भुत स्थापत्य कला के मुरीद बनते चले जायेंगे। आगे दिखी अजीब-सी बेढ़ंगी चट्टान जैसी दिखने वाली एक इमारत। पास पहुंच कर पता चला ये है अलाई मीनार। जी, ये वही मीनार है जिसे दिल्ली के बाद के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने बनाने की कोशिश की थी। ये खिलजी के अधूरे सपने जैसा है। खिलजी कुतुबमीनार से भी ऊंची इमारत बनाना चाहता था पर किसी कारणवश ये सपना अधूरा ही रह गया। इल्तुतमिश का मकबरा अलाई मीनार से आगे बढ़कर परिसर में एक सफेद और लाल बलुआ पत्थर से बना मकबरा नजर आ रहा था। ये वही मकबरा था जिसमें दिल्ली के दूसरे शासक इल्तुतमिश को दफनाया गया था। ये मकबरा कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के ठीक पीछे ही है। मकबरा अपनी इस्लामिक बनावट के कारण अलग ही नजर आ रहा था। इसकी खूबसूरती को देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल था कि ये एक कब्र है। किसी शाही महल जैसी इसकी बनावट वास्तव में अद्भुत है। बीच-बीच में बने सफेद मेहराब और खुली छत इसे और भी आकर्षक बनाते हैं। इसी के ठीक सामने अलाउद्दीन खिलजी का मदरसा है, जिसे शायद खिलजी ने अपनी छाप छोड़ने के लिए बनवाया था। मेहराबों के समूह जैसा दिखने वाला ये मदरसा शिक्षा का केंद्र रहा होगा, जिसमें छात्रों के लिए कमरें और पुस्तकालय हुआ करते थे। मदरसे का परिसर काफी विशाल है। मार्ग में आगे प्रेमी जोड़े तस्वीरें खिंचवाते दिखे। विचार आया इन्हें इस परिसर के इतिहास से क्या ही लेना देना। इनके लिए ये अब सिर्फ क्वालिटी टाइम बिताने का एक ठिकाना भर है। लौह स्तम्भ परिसर का बारीकी से मुआयना करते हुए हम कुतुब मीनार पास ही स्थित लौह स्तम्भ के करीब पहुंचे। बचपन में अपनी किसी किताब में इस लौह-स्तम्भ का जिक्र पढ़ा था। जो कहता था कि इस स्तम्भ को पीठ के बल खड़े होकर दोनों हाथों से गले लगा सकने वाला व्यक्ति भाग्यशाली होता है। इच्छा मेरी भी थी इस किंवदंती को एक बार आजमाने की। दुर्भाग्य से अब लौह स्तम्भ के चारों तरफ ग्रिल लगा दी गई है ताकि पर्यटक उसके पास न पंहुचे। शायद  अब स्तम्भ को देखना भर ही हमारे भाग्य में था। खैर, इसकी वैज्ञानिक खासियत को जान लेना भी जरूरी है। 550 ईस्वी से भी पहले का ये स्तम्भ आज भी अपने पौराणिक रूप में जस का तस है। आज भी जंग का एक कतरा इस स्तम्भ को छू तक नहीं पाया। स्तम्भ पर संस्कृत के शिलालेख उकेरे हुए हैं। स्तम्भ कुल 7.2

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Taj Mahal-One of Seven Wonders

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Taj Mahal: मोहब्बत और तहज़ीब की अनोखी विरासत – ताज महल by Pardeep Kumar दुनिया में कितनी ही अनगिनत जगह हैं जिन्हें ज़िंदग़ी में एक बार देख लेना भी किसी सपने के मुक़्क़मल होने से कम नहीं लगता। ऐसी ही नायाब जगहों में से एक है ताज महल।(Taj mahal) देश की राजधानी से मात्र 234 किलोमीटर की दूरी पर बसा आगरा शहर न केवल ऐतिहासिक है बल्कि सदैव देश की सियासत का अहम् केंद्र भी रहा है। और आगरा को दुनिया भर में शौहरत दिलाने का काम किया है ताजमहल ने। जब  माँ बाप अपने बच्चों के नाम से जाने जाएँ तब उन्हें बेहद सुखद अहसास होता है और ऐसे ही ताजमहल के नाम से अपनी विशेष पहचान बनाने में निसंदेह आगरा फ़क़्र महसूस करता होगा। दरअसल जब भी हम कहीं घूमने का कार्यक्रम बनाते हैं तो ज़हन में सबसे पहले नाम आता है, ताजमहल। इक़लौती ऐसी कविता जिसे संगमरमर से तराशा गया है। जिसका ऑरा कुछ ऐसा है कि सामने पाकर भी विश्वास कर पाना मुश्क़िल लगता है। बात कुछ ऐसी थी कि एक शाम जब परिवार के साथ बैठकर चाय का लुत्फ़ उठाया जा रहा था तो ख़्याल आया क्यूं न कहीं घूमने जाया जाए। आमतौर पर मध्यवर्गीय परिवारों में थोड़ा क्वालिटी टाइम बिताने के लिए ही हम कहीं आउट ऑफ़ स्टेशन जाते हैं। किसी ने सुझाया ताजमहल। तो इस सुझाव को फाइनल होने में जरा भी समय नहीं लगा। बस फिर क्या, यहीं से जाने की तैयारियां शुरू हुई और क्योंकि सफ़र लंबा था तो यकीनन मज़ा भी बहुत आने वाला था। खाने-पीने की चीज़ें सबसे पहले पैक की गई, साथ ही चाय का एक बड़ा थर्मस। यूं तो रास्ते में ढ़ेरों ढ़ाबों ने रूकने का इशारा दिया लेकिन जब रास्ता इतना आरामदायक हो तो कहां कहीं रूकने का दिल करता है। बस तमाम सफर के दौरान यमुना एक्सप्रेस वे के बिलकुल मिडल में ही एक जगह रुक कर अपने घर की बनी चाय का मजा लिया गया। एक प्याला चाय सारी थकान दूर भगाय। यमुना एक्सप्रेसवे से हम आगरा की तरफ बढ़ते जा रहे थे। क्या सुहाना सफ़र था। उगते सूरज को सलाम कर हम निकले और भरी दोपहरी में आगरा पहुंचे, जहां का तापमान उबाल मार रहा था। इतनी गर्मी कि कोई हद-हिसाब नहीं इसीलिए सबसे पहले हमने होटल बुक करना ज़्यादा बेहतर समझा। सोचा पहले थोड़ा आराम फ़रमा लिया जाए फिर निकलेंगे ताजमहल के दीदार के लिए। दो-तीन घंटे आराम कर हल्की शाम होते ही हमने ताजमहल जाने की तैयारी की। संकरी गलियों से होकर ट्र्ैफिक की जद्दोजहद से निकलकर आख़िरकार हम उस अविश्वसनीय मीनार के क्षेत्र में पहुंच गए। ताजमहल परिसर और ऊंट गाड़ी ताजमहल परिसर में प्रवेश करते ही ताज से लगभग एक डेढ़ किलोमीटर दूर आपको अपनी कार पार्क करनी पड़ेगी। प्रदूषण के मध्यनज़र पार्किंग क्षेत्र को परिसर से थोड़ा दूर बनाया गया है। अच्छी बात ये है कि पार्किंग से ताज तक पैदल जाने के अलावा आपको मिलेगी ऊंट गाड़ी। आप आराम से ऊंट गाड़ी की सवारी करते हुए टिकट खिड़की तक पहुँच सकते हैं।  हमने थोड़ा समय बचाते हुए ऊंट गाड़ी की सवारी का भी आनंद उठाया। जैसे ही ताज के पास पहुंचे महसूस हुआ जैसे मोहब्बत का नूर टपक रहा हो, वहां के हर एक पत्थर में, फूलों में, पत्तों में। जैसे रूहानियत का अलग ही जहां हो। सारी विशेष चीज़ें मानो एक ही थाली में परोस दी गईं हो। मुग़ल सम्राट शाहजहां के अरमानों को पूरा करता यह अद्भुत स्मारक बेग़म मुमताज़ के लिए बनाई गई अविश्वास्य इमारत जिसे हम मुमताज़ महल के नाम से भी जानते हैं। अकेले मक़बरे को बनने में क़रीब 11 वर्ष का समय लगा। ज़ाहिर है, इतनी ख़ूबसूरत इमारत जिसकी एक-एक ईंट अकल्पनीय कला की ग़वाही दे रही हों, चार दिन में तो बनकर तैयार हो नहीं सकती। इसीलिए समय तो लगना ही था और परिसर में मौजूद बाक़ी की इमारतों को भी तक़रीबन 21 से 22 वर्ष लगे। ताज को यमुना का स्पर्श ताजमहल केवल पर्यटक स्थल ही नहीं बल्क़ि कई प्रकार की कारीगरी का खज़ाना भी है। जैसे-जैसे आप इसके नज़दीक़ जाएंगे तो पाएंगे कि सिर्फ ताज ही नहीं, उसके आसपास बनाई गई सभी इमारतें अपने आप में बेमिसाल कारीगरी का नमूना है। वैसे यह झूठ नहीं है जिसे आर्किटेक्चर में दिलचस्पी है उसके लिए तो ताजमहल की यात्रा सोने की ख़दान से कम नहीं है। हिमालय की गोद से निकलती यमुना अपने 1370 कि.मी. के लंबे सफ़र में कई मोड़ और ठिकानों से होकर ग़ुज़रती है। उन्हीं ठिकानों में से एक है ताजमहल। वैसे शाहजहां ने भी क्या ख़ूब दिमाग़ दौड़ाया, सोचा अगर ताज को यमुना का स्पर्श मिल जाए तो क्या बात होगी, ताज की ख़ूबसूरती दोगुनी हो जाएगी और देखिए ऐसा ही हुआ। यमुना नदी पर ख़ासा ध्यान देते हुए मक़बरे तक जाने से पहले यह विशाल बालकनी बनाई गई है जहां खड़े होकर आप यमुना नदी को निहार सकते हैं और नदी की ओर से आने वाली ठंडी हवाएं आपको एकदम तरोताज़ा कर देती हैं। बेशक़ यह दृश्य आपको आश्चर्यचकित करने में ज़रा भी विफल नहीं होगा। ताजमहल को ग़ौर से देख लेने के बाद आपका दिल चाहेगा कि यहां बैठकर मन मोह लेने वाले गीत सुनते रहें और बस यहां की हवा में खो जाएं। कुछ ऐसा ही जादू है इस जगह में। दरवाज़ा ए रोज़ा बहरहाल, आइए इतिहास को थोड़ा खंगालते हुए मुग़लों के दौर में एक बार फिर चलते हैं और शुरूआत करते हैं दरवाज़ा ए रोज़ा से। आप जैसे ही ताजमहल के अंदर प्रवेश करते हैं तब आपको सबसे पहले दिखाई देता है एक विशाल दरवाज़ा जो दूर से ही ताज की अद्भुत झलक पेश करता है। ये इमारतें महज़ ख़ूबसूरती ही नहीं बल्क़ि मज़बूत इरादों की भी मिसाल क़ायम करती हैं। ताजमहल को अपने इतना नज़दीक पाना वाक़ई में सपने सा लग रहा था। ज़ाहिर है जिसे लोग देशभर से निहारने आते हैं, जिसकी सुंदरता की दुनियाभर में प्रशंसा की जाती है उससे भला हम कैसे अछूते रह जाते। दरवाज़ा ए रोज़ा ताजमहल परिसर के महत्वपूर्ण भागों में से एक है। जहां पहुंचने के लिए हमें कई पड़ाव पार करने होते हैं। वो कहते हैं ना किसी भी सुंदर चीज़