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दिल्ली का Bangla Sahib Gurudwara आखिर क्यों है सबसे ज़्यादा Visit की जाने वाली Religious Places में से एक?

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दिल्ली की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी के बीच अगर कोई जगह सुकून, सेवा और श्रद्धा का एहसास एक साथ कराती है, तो वो है Bangla Sahib Gurudwara। हर दिन यहां हज़ारों लोग आते हैं। कोई माथा टेकने, कोई Langar खाने, कोई सिर्फ कुछ पल की शांति महसूस करने। मज़े की बात ये है कि यहां सिर्फ Sikh community ही नहीं, बल्कि हर धर्म और हर उम्र के लोग बिना किसी भेदभाव के आते हैं। यही वजह है कि Bangla Sahib आज सिर्फ एक Gurudwara नहीं, बल्कि दिल्ली की पहचान बन चुका है। Bangla Sahib का इतिहास Bangla Sahib का इतिहास 17वीं सदी से जुड़ा हुआ है। पहले इस जगह पर Raja Jai Singh का एक बंगला हुआ करता था। बाद में Guru Har Krishan Ji, जो Sikh धर्म के आठवें Guru थे, कुछ समय के लिए यहीं ठहरे थे। उस दौर में दिल्ली में चेचक और हैजा जैसी बीमारियां फैली हुई थीं। Guru Har Krishan Ji ने बीमार लोगों की सेवा की और उन्हें पानी पिलाया। माना जाता है कि उनकी सेवा और आशीर्वाद से कई लोगों को राहत मिली। आज भी Gurudwara के अंदर मौजूद Sarovar का पानी श्रद्धालु पवित्र मानते हैं। यहां की सबसे बड़ी पहचान – Langar Bangla Sahib का Langar दुनिया भर में मशहूर है। यहां हर दिन हज़ारों लोगों को बिल्कुल मुफ्त खाना खिलाया जाता है। अमीर-गरीब, Local या Tourist, हर कोई एक ही लाइन में बैठकर खाना खाता है। खाना बनाने और परोसने का ज़्यादातर काम Volunteers यानी Sevadars करते हैं। यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि बराबरी और इंसानियत का सबसे खूबसूरत Example है। Sarovar का सुकून Gurudwara के बीचों-बीच बना बड़ा Sarovar यहां आने वालों को अलग ही सुकून देता है। लोग यहां बैठकर कुछ देर Meditation करते हैं। पानी में Gurudwara की Reflection शाम के वक्त बेहद खूबसूरत लगती है। Photography करने वालों के लिए भी ये Spot काफी पसंदीदा है। Architecture भी है कमाल Bangla Sahib का White Marble, Golden Dome और साफ-सुथरा परिसर हर किसी का ध्यान खींच लेता है। Golden Dome दूर से ही दिखाई देता है। रात में Lighting होने के बाद पूरा Gurudwara और भी शानदार लगता है। अंदर का माहौल इतना शांत होता है कि कुछ मिनट बैठते ही मन हल्का महसूस होने लगता है। हर धर्म के लोगों के लिए खुला है दरवाज़ा Bangla Sahib की सबसे खूबसूरत बात यही है कि यहां किसी से उसका धर्म नहीं पूछा जाता। हर कोई माथा टेक सकता है। Langar में बैठकर खाना खा सकता है। सेवा में हिस्सा ले सकता है। यही Inclusiveness इसे दिल्ली की सबसे खास Religious Places में शामिल करती है। यहां क्या-क्या देखें? Golden Dome Sarovar Langar Hall Main Prayer Hall Museum Library Nishan Sahib Visit करने का Best Time सुबह जल्दी जाएं, तब भीड़ कम रहती है और माहौल बेहद शांत होता है। शाम के वक्त Lighting और Reflection देखने लायक होती है। Gurpurab जैसे Festivals पर यहां अलग ही रौनक देखने को मिलती है, लेकिन भीड़ काफी ज़्यादा होती है। कैसे पहुंचे? सबसे आसान तरीका Metro है। नज़दीकी Metro Station Patel Chowk और Shivaji Stadium हैं। Auto, Cab और Bus से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। Five Colors of Travel Tips 1. सिर ढककर जाएं Gurudwara के अंदर Head Cover करना ज़रूरी होता है। अगर साथ में Scarf नहीं है, तो Entry पर मुफ्त में मिल जाता है। 2. Shoes बाहर उतारें जूते और Socks बाहर जमा कराएं और हाथ-पैर धोकर अंदर जाएं। 3. Silence Maintain करें Prayer Hall के अंदर धीरे बात करें और दूसरों की श्रद्धा का सम्मान करें। 4. Langar Miss मत करें अगर समय हो, तो Langar ज़रूर खाएं। यही Bangla Sahib की असली Spirit है। 5. Cleanliness का ध्यान रखें कूड़ा इधर-उधर न फेंकें और पूरे परिसर की सफाई बनाए रखने में सहयोग करें। Bangla Sahib सिर्फ एक Tourist Spot नहीं है। ये ऐसी जगह है जहां Service, Humanity और Faith एक साथ देखने को मिलते हैं। चाहे आप Spiritual Journey पर हों, Delhi Explore कर रहे हों या बस कुछ देर की Mental Peace चाहते हों, Bangla Sahib आपको खाली हाथ वापस नहीं भेजेगा। यहां की शांति, Langar की गर्मजोशी और लोगों की सेवा शायद वही एहसास है, जिसकी वजह से लाखों लोग बार-बार इस Gurudwara का रुख करते हैं।

Culture Delhi

Bangla Sahib Gurudwara Delhi

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गुरुद्वारा बंगला साहिब- दिल्ली का गोल्डन टेम्पल Five Colors of Travel दिल्ली के केंद्र में बसे कनॉट प्लेस में स्थित बंगला साहिब गुरुद्वारा यूँ तो कई मायनों में खास है। पर इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका उदार स्वभाव। जी हां, करीब साढ़े तीन सौ साल पुराना ये गुरुद्वारा सभी धर्मों के लोगों का खुले दिल और गर्मजोशी से स्वागत सत्कार करता है। इसका परिसर 24 घण्टे मुसाफिरों के लिए किसी घर की तरह खुला रहता है। संगमरमर ओर सोने के गुबंद से बनी गुरुद्वारे की अनोखी शैली, 24 घण्टे सेवा देने वाली भव्य रसोई, पवित्र जलाशय ये सब मिलकर इस गुरुद्वारे को और भी खास बनाते हैं। Gurudwara Bangla Sahib बंगला साहिब गुरुद्वारा परिसर गुरुद्वारे के परिसर में जाते ही सीढ़ियों के नीचे बनी नलियों से निकलता पानी खुद ही पैरों को साफ करने की क्षमता रखता है। सीढ़ियों पर चढ़ते हुए सामने अरदास स्थल है। शर्त बस इतनी है अंदर प्रवेश करने के बाद आपका सर ढका होना चाहिए वरना जगह-जगह खड़े सेवादारों की डांट आपको इत्मीनान से झेलनी पड़ सकती है। अरदास स्थल की भव्यता और शांति मोहित कर देने वाली है। सामने गुरु ग्रन्थ साहिब और उसके ऊपर लगा बड़ा-सा शाही झूमर अलौकिक अनुभव देता है और लगता है वाकई ये स्थल एक वक्त पर किसी राजा का महल रहा होगा। गुरु ग्रन्थ साहिब की परिक्रमा करते ही पिछले दरवाजे से हम बाहर निकले। एक तरफ कुंड का पवित्र जल दर्शनार्थियों को दिया जा रहा था तो दूसरी तरफ घी से बना हलवे का प्रसाद। सामने ही सुंदर जल कुंड है जो किसी भी श्रद्धालु को अपनी तरफ आने का आमन्त्रण देता है। तालाब के अंदर रंग-बिरंगी मछलियां इस तालाब की सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं और हां, खास बात ये यहां तस्वीरें खींचना सख्त मना है। अगर आप यहाँ गलती से तस्वीर लेते मिल गए तो सेवादारों के गुस्से का शिकार हो सकते हैं और मोबाइल छीनने का भी खतरा हो सकता है, तो सावधान रहिएगा। 24 घंटे लंगर सेवा परिसर में आगे बढ़ने पर लंगर सेवा दिखी। इस लंगर के निस्वार्थ भाव से आसपास के सैंकड़ों-हज़ारों जरूरतमन्दों का पेट पलता है। श्रद्धालु भले ही इसे गुरु का प्रसाद समझते हों पर गरीब बेसहारा लोगों के लिए ये पोष्टिक भोजन किसी वरदान से कम नहीं। दाल और रोटी के इस लंगर में ज़ायक़ा उतना ही है जितना किसी मां के हाथ में होता है। आश्चर्य की बात तो ये है कि ये लंगर सेवा 24 घण्टे चलती है और तो और इसे बनाने के लिए किसी खास रसोइए को नहीं रखा गया है बल्कि सेवा भाव रखने वाले लोग खुद से पूरा भोजन तैयार करते हैं और परोसते भी हैं। यहाँ की सबसे खास बात यही कि किसी काम के लिए कोई किसी को आदेश नहीं देता बल्कि सब अपने इच्छा भाव से काम करते हैं। यही तो इस गुरुद्वारे को और भी अनोखा बनाता है। इस तरह का मैनेजमेंट बिना किसी नियंत्रण के, ये देखना हमारे लिए भी आश्चर्य से कम नहीं था। Gurudwara Bangla Sahib बंगला साहिब का इतिहास बंगला साहिब का इतिहास इसे और भी समृद्ध बनाता है। ऐसे तो दिल्ली में कई जाने पहचाने नामी गुरुद्वारे हैं लेकिन इनमें से सबसे खास है सिखों के आठवें गुरु श्री गुरु हरिकृष्ण जी से सम्बंधित ये स्थल। आज सिखों में बेहद पवित्र माने जाने वाला ये गुरुद्वारा बंगला साहिब 1664 के दौर में मिर्जा राजा जय सिंह का बंगला हुआ करता था। बात उन दिनों की है जब दिल्ली शहर में हैजा और चेचक की महामारी फैली हुई थी। तब गुरु साहिब ने यहां आकर हजारों लोगों की सेवा-सत्कार किया था। ऐसा माना जाता है कुंड के जल में अपने चरण डाल कर गुरु हरिकृष्ण ने जल को आरोग्य बनाया जिसके बाद इस जल को पीकर लोग रोगमुक्त होने लगे। मान्यता है कि गुरु साहिब ने ही यहां इस प्याऊ की शुरुआत की थी, जिसका जल आज लोग विदेशों तक ले जाते हैं। गुरुद्वारे के दूसरे छोर पर हमें एक म्यूजियम दिखा जो फिलहाल बन रहा है। कुछ समय बाद सिख धर्म को प्रदर्शित करने वाला ये म्यूजियम आम जनता के लिए भी खुल जाएगा। कहा जाता है यदि आप अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर को नहीं देख पाए तो इस गुरुद्वारे को देख लीजिए ये स्वर्ण मंदिर की एक छवि माना जाता है। इसे दिल्ली का गोल्डन टेम्पल भी कहा जाता है। इसके प्याज जैसे आकार के सोने के गुबंद और संगमरमर का परिसर आँखों को अपनी ओर खींच ही लेता है। दिल्ली में रह कर इस जगह नहीं आये तो क्या ही दिल्ली में रहना। बंगला साहिब गुरुद्वारा सिर्फ एक गुरुद्वारा नहीं बल्कि दिल्ली का एक प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट भी है। सेन्ट्रल दिल्ली का ये मशहूर गुरुद्वारा काफी बड़े एरिये में फैला हुआ है। यहां आने के लिए राजीव चौक मेट्रो सबसे पास पड़ेगा। मेट्रो से रिक्शा लेकर आसानी से बंगला साहिब गुरुद्वारे तक पहुंचा जा सकता है। इस गुरुद्वारे की सुंदर बनावट आपको दूर से ही नजर आने लगेगी। लेकिन जब भी यहाँ यहां आएं तो लंगर का लुत्फ़ जरूर उठाएं। Research by Nikki Rai Edited by Pardeep Kumar