Alwar: बाला किला, सरिस्का और घूमने की पूरी जानकारी
अगर दिल्ली या जयपुर की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेकर ऐसी जगह जाना चाहते हैं, जहाँ एक ही ट्रिप में आपको पुराना इतिहास, पहाड़, जंगल, मंदिर और वाइल्डलाइफ सब देखने को मिल जाए, तो Alwar का नाम आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए। राजस्थान का यह शहर सिर्फ अपने पुराने महलों और किलों के लिए ही नहीं, बल्कि अरावली की पहाड़ियों और सरिस्का के जंगलों के लिए भी जाना जाता है। Alwar की खास बात यह है कि यहाँ घूमने के लिए आपको सिर्फ एक तरह का अनुभव नहीं मिलता। एक तरफ पहाड़ी के ऊपर बना बाला किला है, जिसकी दीवारें कई सदियों पुरानी घटनाओं की गवाह रही हैं, तो दूसरी तरफ सरिस्का के घने जंगल हैं, जहाँ सफारी के दौरान बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल और मोर जैसे वन्यजीव देखने का मौका मिल सकता है। अगर आपको ऐसी जगहें पसंद हैं जहाँ घूमने के साथ-साथ उनके पीछे छिपी बातें जानने में भी मजा आता है, तो Alwar आपको निराश नहीं करेगा। यहाँ बाला किले से जुड़ी शहजादा सलीम की कहानी है, दारा शिकोह की कैद का किस्सा है, पुराने जलाशय हैं और लॉर्ड विक्टर नाम के एक कुत्ते से जुड़ी दिलचस्प लोककथा भी सुनने को मिलती है। तो चलिए, इस पूरे सफर को थोड़ा करीब से जानते हैं और समझते हैं कि बाला किला और सरिस्का मिलकर Alwar को एक यादगार वीकेंड डेस्टिनेशन क्यों बनाते हैं। अरावली की चोटी पर खड़ा बाला किला आखिर कितना पुराना है? बाला किला Alwar की पहचान माने जाने वाले सबसे पुराने ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। अरावली की पहाड़ियों के ऊपरी हिस्से में बना यह किला शहर के ऊपर से काफी दूर तक का शानदार नजारा दिखाता है। किले की शुरुआती नींव को 928 ईस्वी से जोड़ा जाता है और इसके निर्माण व पुनर्निर्माण में अलग-अलग दौर के शासकों की भूमिका रही। समय के साथ इस किले पर अलग-अलग राजवंशों और शासकों का प्रभाव रहा। निकुंभ राजपूतों से लेकर खानजादा, पठान, मुगल, मराठा और जाट शासकों तक, इस किले ने सत्ता के कई दौर देखे। बाद में अलवर राज्य के संस्थापक महाराव राजा प्रताप सिंह का भी इससे संबंध रहा। यही वजह है कि Alwar का बाला किला सिर्फ एक पुरानी इमारत नहीं लगता। इसकी दीवारों और रास्तों से गुजरते हुए आपको इतिहास के अलग-अलग दौर एक साथ दिखाई देते हैं। अकबर और शहजादा सलीम का बाला किले से क्या कनेक्शन था? बाला किले से जुड़ी सबसे चर्चित ऐतिहासिक बात शहजादा सलीम से संबंधित है। इतिहास से जुड़े विवरणों में बताया जाता है कि अकबर के बेटे सलीम को एक समय के लिए इस इलाके में रखा गया था और इसी वजह से किले में मौजूद एक भवन को आज सलीम महल के नाम से जाना जाता है। सलीम वही शहजादा थे जो आगे चलकर मुगल सम्राट जहांगीर बने। यानी जिस किले को आज लोग घूमने और इतिहास देखने के लिए आते हैं, वह कभी मुगल शाही परिवार की घटनाओं से भी जुड़ा हुआ था। इसके अलावा बाबर और दारा शिकोह से जुड़े किस्से भी बाला किले के इतिहास को और दिलचस्प बनाते हैं। हालांकि इन कहानियों से जुड़ी अलग-अलग स्थानीय और ऐतिहासिक व्याख्याएं मिलती हैं, इसलिए इन्हें सुनते समय लोककथा और प्रमाणित इतिहास के बीच अंतर समझना जरूरी है। बाला किले की बनावट देखकर समझ आता है कि यह सिर्फ महल नहीं था पहाड़ी पर बने किसी किले को देखकर सबसे पहले उसकी ऊंचाई और दीवारें ध्यान खींचती हैं, लेकिन बाला किले की खासियत इसकी पूरी सुरक्षा व्यवस्था और वास्तुकला में दिखाई देती है। यह किला लगभग 5 किलोमीटर लंबा बताया जाता है और पहाड़ी के काफी बड़े हिस्से में फैला हुआ है। किले में कई प्रवेश द्वार बनाए गए थे, जिनमें जय पोल, सूरज पोल, किशन पोल, चांद पोल, लक्ष्मण पोल और अंधेरी गेट प्रमुख माने जाते हैं। अलग-अलग हिस्सों में बने बुर्ज और दीवारों में बने छोटे-छोटे छेद उस समय की सैन्य व्यवस्था की झलक देते हैं। आज जब आप Alwar के बाला किले में घूमते हैं तो इन दीवारों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुराने समय में किसी पहाड़ी किले को सुरक्षित रखना कितना बड़ा काम रहा होगा। रानी महल से लेकर पुराने जलाशयों तक, किले के अंदर क्या देखें? बाला किले को सिर्फ बाहर से देखकर वापस आ जाना सही नहीं होगा। इसके अंदर मौजूद पुराने महल, जल स्रोत और अलग-अलग हिस्से इसकी कहानी को पूरा करते हैं। रानी महल या रनिवास किले के उन हिस्सों में से है जहाँ राजघराने की महिलाओं के रहने से जुड़ी बातें मिलती हैं। पुराने समय में झरोखे सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं होते थे। इनके जरिए महल की महिलाएं नीचे होने वाले उत्सव और गतिविधियों को देख सकती थीं। किले के आसपास पुराने जल स्रोत भी बनाए गए थे ताकि पहाड़ी पर रहने वाले लोगों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था बनी रहे। जय ताल डैम, सलीम सागर और सूरज कुंड जैसे जल स्रोत इसी पुराने जल प्रबंधन की याद दिलाते हैं। आज भले ही इनका इस्तेमाल पहले जैसा न होता हो, लेकिन इन जगहों को देखकर समझ आता है कि पहाड़ी किले में पानी की व्यवस्था कितनी जरूरी रही होगी। लॉर्ड विक्टर की कहानी: किले का सबसे अलग किस्सा बाला किले से जुड़ी कहानियों में लॉर्ड विक्टर का किस्सा सबसे अलग है। स्थानीय तौर पर सुनाई जाने वाली इस कहानी के मुताबिक, पुराने समय में किले में तोपों के परीक्षण के दौरान एक प्रशिक्षित कुत्ते का इस्तेमाल किया जाता था। कहानी के अनुसार लॉर्ड विक्टर को तोप की बत्ती में आग लगाने की ट्रेनिंग दी गई थी। आग लगाने के बाद वह पानी के कुंड की ओर भाग जाता था ताकि धमाके से बच सके। इसी वजह से उसका नाम किले की लोककथाओं में आज भी सुनने को मिलता है। इस कहानी के कई हिस्से लोककथा के रूप में बताए जाते हैं, इसलिए इसे पक्के ऐतिहासिक तथ्य की तरह नहीं बल्कि Alwar से जुड़ी एक पुरानी स्थानीय कहानी के रूप में देखना ज्यादा सही है। फिर भी किले की सैर के दौरान ऐसी बातें जगह को और दिलचस्प बना देती हैं। क्या बाला किले में रहस्यमयी आवाजें भी सुनाई देती थीं? बाला किले से