Bakloh Travel Guide: बकलोह में घूमने की जगहें और इतिहास
कभी-कभी पहाड़ों पर जाने का मन सिर्फ इसलिए करता है कि कुछ दिन शहर के शोर से दूर रह सकें। सुबह उठें तो ठंडी हवा मिले, आसपास ऊँचे पेड़ हों और शाम को किसी शांत रास्ते पर टहलते हुए चाय पीने का मन करे। लेकिन जब शिमला, मनाली और डलहौजी जैसी जगहों पर पर्यटकों की भीड़ और गाड़ियों का शोर बढ़ जाता है, तो मन किसी ऐसी जगह को ढूँढने लगता है जहाँ कुछ पल आराम से बिताए जा सकें। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में बसा Bakloh ऐसी ही एक जगह है। यह कोई बड़ा टूरिस्ट हिल स्टेशन नहीं, बल्कि एक छोटा-सा कैंटोनमेंट टाउन है, जिसकी पहचान पुराने सैन्य इतिहास, गोरखा संस्कृति, चीड़ के पेड़ों और शांत पहाड़ी रास्तों से जुड़ी है। यहाँ आपको बड़े बाजारों और महंगे कैफे की भीड़ नहीं मिलेगी। इसके बजाय पुरानी इमारतें, छोटी दुकानें, मंदिर और पहाड़ों के खूबसूरत नज़ारे देखने को मिलेंगे। अगर आप अपनी अगली छुट्टी में किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहाँ घूमने के साथ थोड़ा सुकून भी मिले, तो Bakloh Travel Guide आपके काम आएगी। यहाँ जानिए बकलोह का इतिहास, घूमने की जगहें, मौसम, खाने-पीने के विकल्प और वहाँ पहुँचने का पूरा तरीका। बकलोह कहाँ है और यह जगह इतनी खास क्यों है? Bakloh हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित एक छोटा-सा पहाड़ी कस्बा है। यह अपनी सैन्य छावनी और गोरखा राइफल्स से जुड़े इतिहास के लिए जाना जाता है। आसपास चीड़ के पेड़, पहाड़ी ढलान और पुराने रास्ते इस जगह को बाकी लोकप्रिय हिल स्टेशनों से अलग बनाते हैं। यहाँ घूमने का मज़ा उन लोगों को ज्यादा आएगा जिन्हें शांत माहौल पसंद है। आप सुबह आराम से उठकर आसपास की सड़कों पर टहल सकते हैं, किसी छोटी दुकान पर चाय पी सकते हैं और बिना जल्दबाजी के पहाड़ों को निहार सकते हैं। Bakloh की खूबसूरती किसी बड़े टूरिस्ट स्पॉट जैसी चमक-दमक में नहीं, बल्कि इसके सादे और पुराने पहाड़ी माहौल में है। यह बात भी ध्यान रखने वाली है कि बकलोह एक सामान्य पर्यटन शहर नहीं, बल्कि सैन्य छावनी वाला इलाका है। इसलिए यहाँ घूमते समय स्थानीय नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। कुछ जगहों पर आम लोगों की आवाजाही सीमित हो सकती है। ऐसे में किसी भी मंदिर, मैदान या सैन्य क्षेत्र में जाने से पहले स्थानीय लोगों से जानकारी ले लेना बेहतर रहेगा। बकलोह का इतिहास: गोरखा राइफल्स से जुड़ी है इसकी पहचान Bakloh का इतिहास उन्नीसवीं सदी से जुड़ा है। ब्रिटिश शासन के दौरान इस इलाके को सैन्य छावनी के रूप में विकसित किया गया था। पहाड़ी मौसम और इसकी भौगोलिक स्थिति सेना के लिए उपयोगी मानी गई। बाद में यह जगह चौथी गोरखा राइफल्स से जुड़ी और लंबे समय तक रेजिमेंट का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनी रही। साल 1866 में चंबा के राजा से जमीन लेकर चौथी गोरखा रेजिमेंट को यहाँ स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद बकलोह गोरखा सैनिकों और उनके परिवारों के जीवन का अहम हिस्सा बन गया। समय के साथ यहाँ बाजार, धार्मिक स्थल और दूसरी जरूरी सुविधाएँ विकसित हुईं। आज भी इस इलाके की पहचान में गोरखा समुदाय और सेना से जुड़ा इतिहास साफ दिखाई देता है। बकलोह की पुरानी बस्तियों और बाजारों में घूमते हुए आपको इसके बीते दौर की झलक मिल सकती है। यहाँ के 1/4 बाजार और 2/4 बाजार जैसे नाम भी इसकी रेजिमेंटल पहचान से जुड़े हैं। इन जगहों पर रोजमर्रा की जरूरत का सामान मिलता है और स्थानीय जीवन को करीब से देखने का मौका भी मिलता है। आजादी के बाद सेना के केंद्र में बदलाव हुए, लेकिन Bakloh में गोरखा समुदाय की मौजूदगी बनी रही। यही वजह है कि यहाँ की संस्कृति, त्योहारों और खान-पान में नेपाली और पहाड़ी परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। बकलोह घूमने का सही समय कौन-सा है? Bakloh जाने से पहले मौसम का ध्यान रखना जरूरी है। यहाँ गर्मियों में मैदानी इलाकों के मुकाबले मौसम आमतौर पर राहत देने वाला रहता है, जबकि सर्दियों में सुबह और शाम अच्छी ठंड पड़ सकती है। बारिश के मौसम में पहाड़ों की हरियाली बढ़ जाती है, लेकिन सड़क पर सफर करते समय ज्यादा सावधानी रखनी पड़ती है। मार्च से जून: अगर आप आराम से घूमना चाहते हैं, तो गर्मियों का समय अच्छा विकल्प हो सकता है। इस दौरान आसपास के पहाड़ी रास्तों पर टहलना और दिन में घूमना ज्यादा आसान रहता है। शाम के लिए हल्की जैकेट साथ रखना अच्छा रहेगा। जुलाई से सितंबर: बारिश के बाद पहाड़ों पर हरियाली और धुंध का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। हालांकि, भारी बारिश होने पर रास्तों की स्थिति खराब हो सकती है। इसलिए निकलने से पहले मौसम और सड़क की जानकारी जरूर लें। अक्टूबर से फरवरी: इन महीनों में मौसम ठंडा हो जाता है। साफ दिन मिलने पर पहाड़ों के नज़ारे अच्छे दिख सकते हैं, लेकिन सुबह और रात के समय गर्म कपड़ों की जरूरत पड़ेगी। बकलोह में हर साल बर्फबारी होने की उम्मीद करके यात्रा न बनाएं, क्योंकि बर्फ पड़ना मौसम पर निर्भर करता है। अगर आप पहली बार Bakloh जा रहे हैं, तो अप्रैल से जून या अक्टूबर के आसपास का समय अपनी पसंद के अनुसार चुन सकते हैं। यात्रा की तारीख तय करने से पहले मौसम का ताजा हाल देख लेना बेहतर रहेगा। बकलोह में घूमने की जगहें, जहाँ कुछ वक्त आराम से बिता सकते हैं छोटा कस्बा होने के कारण Bakloh में बड़े पर्यटन स्थलों जैसी लंबी सूची नहीं है। फिर भी यहाँ कुछ ऐसी जगहें हैं जहाँ आप स्थानीय इतिहास, धार्मिक परंपराओं और आसपास की खूबसूरती को करीब से देख सकते हैं। ध्यान रहे कि कुछ जगहें सैन्य क्षेत्र के भीतर या उसके पास हो सकती हैं, इसलिए प्रवेश की अनुमति पहले पता कर लें। चिल्लामा हैलीपैड और बाबा लखदाता मंदिर चिल्लामा हैलीपैड के आसपास का इलाका खुले मैदान और पहाड़ी नज़ारों के लिए जाना जाता है। स्थानीय लोग यहाँ के आसपास घूमने और धार्मिक अवसरों पर आने की बात करते हैं। पास में बाबा लखदाता जी का मंदिर भी है। यदि आप इस जगह जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले यह जरूर पता कर लें कि उस दिन आम लोगों को प्रवेश की अनुमति है या नहीं। सैन्य गतिविधियों वाले स्थानों पर बिना