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India की 6 सबसे ऊंची और Iconic मूर्तियां

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India को अगर करीब से देखा जाए, तो यह सिर्फ किलों, महलों, मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों का देश नहीं है। यहां आपको ऐसी आधुनिक और विशाल मूर्तियां भी देखने को मिलती हैं, जिन्हें देखकर आपको अपने देश की कला, इंजीनियरिंग और इतिहास पर गर्व महसूस होता है। पिछले कुछ वर्षों में India में कई ऐसी भव्य मूर्तियां बनाई गई हैं, जो अब देश के बड़े टूरिस्ट आकर्षणों में शामिल हो चुकी हैं। इनमें से कुछ मूर्तियां देश के महान नेताओं को समर्पित हैं, कुछ भगवान और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी हैं, तो कुछ भारत की प्राचीन कला और संस्कृति की कहानी बताती हैं। इन विशाल Statues की सबसे खास बात यह है कि इनके पीछे सिर्फ ऊंचाई का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि हर मूर्ति के पीछे एक इतिहास, एक विचार और एक बड़ी कहानी जुड़ी हुई है। अगर आप India में घूमने के लिए कुछ अलग जगहों की तलाश कर रहे हैं, तो इन 6 विशाल मूर्तियों को अपनी Travel List में जरूर शामिल कर सकते हैं। इन जगहों पर आपको शानदार वास्तुकला के साथ-साथ आसपास के खूबसूरत नजारे, स्थानीय संस्कृति और इतिहास को समझने का मौका भी मिलता है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, गुजरात India की सबसे प्रसिद्ध और दुनिया की सबसे ऊंची मूर्तियों में सबसे पहला नाम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का आता है। गुजरात के नर्मदा जिले में केवडिया के पास स्थित यह विशाल मूर्ति भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है। इस मूर्ति की ऊंचाई 182 मीटर है और इसी वजह से यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में जानी जाती है। इसे नर्मदा नदी के बीच साधु बेट नाम के एक छोटे से द्वीप पर बनाया गया है। सामने सरदार सरोवर बांध और चारों तरफ अरावली तथा आसपास के प्राकृतिक नजारे इस जगह को और खास बना देते हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सिर्फ एक मूर्ति नहीं है। यह उस व्यक्ति को श्रद्धांजलि है जिन्होंने आजाद India को एकजुट करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। सरदार पटेल ने देश की अलग-अलग रियासतों को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसी वजह से इस मूर्ति को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी माना जाता है। मूर्ति के अंदर एक Viewing Gallery भी बनाई गई है। यहां से पर्यटक नर्मदा घाटी और आसपास के क्षेत्र का शानदार नजारा देख सकते हैं। इसके अलावा इस पूरे क्षेत्र को एक बड़े टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया गया है। यहां म्यूजियम, गार्डन, Valley of Flowers और कई अन्य आकर्षण भी मौजूद हैं। अगर आप India में एक ऐसी जगह घूमना चाहते हैं जहां इतिहास, आधुनिक इंजीनियरिंग और प्रकृति एक साथ दिखाई दें, तो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी आपके लिए शानदार जगह हो सकती है। यहां पहुंचकर आपको अंदाजा होता है कि India में आज कितनी बड़ी और जटिल संरचनाएं तैयार की जा सकती हैं। आदियोगी शिव, तमिलनाडु अब चलते हैं South India की तरफ, जहां कोयंबटूर के पास वेल्लियांगिरी पहाड़ियों की तलहटी में आदियोगी शिव की विशाल प्रतिमा स्थित है। यह मूर्ति भगवान शिव को आदियोगी यानी योग के पहले गुरु के रूप में दर्शाती है। इस मूर्ति की ऊंचाई 112 फीट है। यह पूरी तरह से एक बस्ट प्रतिमा है, यानी इसमें भगवान शिव का चेहरा और शरीर का ऊपरी हिस्सा दिखाया गया है। 112 फीट की ऊंचाई को योग की उन 112 संभावनाओं से जोड़ा जाता है जिनके जरिए इंसान अपने जीवन को एक अलग स्तर तक ले जाने की कोशिश कर सकता है। आदियोगी शिव की मूर्ति का डिजाइन काफी अलग है। यह India की दूसरी कई पारंपरिक मूर्तियों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। इसका चेहरा शांत है और इसके पीछे पहाड़ों का वातावरण इसे बेहद प्रभावशाली बनाता है। शाम के समय यहां का माहौल और भी खूबसूरत हो जाता है। लाइट और साउंड शो के दौरान मूर्ति रोशनी से जगमगा उठती है और शिव तथा योग से जुड़ी कहानी को संगीत और प्रकाश के माध्यम से दिखाया जाता है। अगर आप India में आध्यात्मिकता और आधुनिक वास्तुकला का मेल देखना चाहते हैं, तो यह जगह आपको जरूर पसंद आएगी। यहां का वातावरण काफी शांत है और आसपास की पहाड़ियां इस पूरे अनुभव को और खास बना देती हैं। आदियोगी शिव की मूर्ति केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है। यह India की प्राचीन योग परंपरा को आधुनिक तरीके से लोगों तक पहुंचाने का एक प्रयास भी है। यही वजह है कि देश और विदेश से बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने के लिए आते हैं। तिरुवल्लुवर प्रतिमा, कन्याकुमारी India के सबसे खूबसूरत समुद्री इलाकों में से एक कन्याकुमारी में समुद्र के बीच स्थित तिरुवल्लुवर प्रतिमा भी देखने लायक है। यह मूर्ति महान तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर को समर्पित है। तिरुवल्लुवर ने तमिल साहित्य की महान रचना तिरुक्कुरल लिखी थी। इसी वजह से इस प्रतिमा की ऊंचाई भी बहुत खास तरीके से तय की गई है। इसकी कुल ऊंचाई 133 फीट है, जो तिरुक्कुरल के 133 अध्यायों को दर्शाती है। इसमें मुख्य मूर्ति 95 फीट ऊंची है और यह 38 फीट ऊंचे एक प्लेटफॉर्म पर खड़ी है। समुद्र के बीच चट्टानी द्वीप पर बनी यह प्रतिमा दूर से ही काफी प्रभावशाली दिखाई देती है। यहां पहुंचने के लिए पर्यटकों को नाव या फेरी का सहारा लेना पड़ता है। जैसे-जैसे नाव मूर्ति के करीब पहुंचती है, समुद्र के बीच खड़ी विशाल प्रतिमा का आकार और भी बड़ा दिखाई देने लगता है। India में ऐसी बहुत कम जगहें हैं जहां आपको समुद्र, साहित्य और विशाल वास्तुकला का ऐसा मेल देखने को मिलता है। कन्याकुमारी की यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह प्रतिमा एक खास आकर्षण है। अगर आप India की सांस्कृतिक विविधता को समझना चाहते हैं, तो तिरुवल्लुवर प्रतिमा आपके लिए एक बेहतरीन जगह है। यह बताती है कि देश की अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों की अपनी समृद्ध परंपराएं हैं। गोमतेश्वर प्रतिमा, श्रवणबेलगोला अब बात करते हैं India की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक विशाल मूर्तियों में से एक गोमतेश्वर प्रतिमा की। कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में स्थित यह मूर्ति भगवान बाहुबली को समर्पित है। यह प्रतिमा लगभग 57 फीट ऊंची है और इसे एक ही बड़े पत्थर को काटकर बनाया गया है। इसी वजह से इसे दुनिया की सबसे ऊंची मोनोलिथिक प्रतिमाओं