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नवाबों के शहर की खूबसूरत विरासत: लखनऊ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

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नवाबों के शहर के नाम से मशहूर शहर Lucknow को अपनी नजाकत और तहजीब से भरी संस्कृति के लिए जाना जाता है। अगर इतिहास की बात करें तो लखनऊ प्राचीन काल के अवध क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। लखनऊ हमेशा से ही एक बहुरंगी संस्कृतियों वाला शहर रहा है। यहां के नवाबों के तमीज, तहजीब और उनके कविता, संगीत और शाही व्यंजनों के प्रति प्रेम के कारण लखनऊ को नबाबी ठाठ-बाट का प्रतीक माना जाता है। इस शहर का इतिहास जितना खूबसूरत रहा है, इसका वर्तमान भी उतना ही खूबसूरत और प्रगतिशील है। आज के समय में इस शहर का काफी तेजी से विकास हो रहा है। लेकिन इस शहर की एक खासियत जो इसे दूसरे शहरों से अलग बनाती है वह यह है कि इस शहर ने विकास की राह पर चलते हुए भी अपनी संस्कृति को अपने अंदर सहेज कर रखा है। इस शहर के अंदर बहुत से ऐसे पर्यटन स्थल हैं जो देश हीं नहीं बल्कि दुनिया भर से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। आइए, जानते हैं लखनऊ के उन्हीं पर्यटन स्थलों के बारे में जो इस शहर पहचान है। बड़ा इमाम बाड़ा लखनऊ के सबसे फेमस टूरिस्ट स्पॉट में से एक बड़ा इमामबाड़ा का निर्माण नवाब आसफ़उद्दौला ने करवाया था। इसीलिए इस इमामबाड़े का दूसरा नाम आसफी इमामबाड़ा भी है। इसी इमामबाड़े के अंदर लखनऊ की सबसे प्रसिद्ध भूल भुलैया और बावड़ी भी है, जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कहा जाता है कि इमामबाड़े के भीतर बने इस भूलभुलैया के अंदर जाने के बाद सेम गेट से वापस आना बहुत हीं मुश्किल है। यहां के बावड़ी के बारे में बताया जाता है कि इस बावड़ी के अंदर बहुत सारा खजाना छुपा हुआ है। इस इमामबाड़े को बनाने का काम 1780 में शुरू हुआ और 1784 में जाकर इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ। यह जगह कोई मकबरा या मस्जिद नहीं है, लेकिन फिर भी लखनऊ के सबसे फेमस बिल्डिंग्स में से एक है। आप जब इमामबाड़े के भीतर जाएंगे तो यहां के आर्किटेक्चर को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। इमामबाड़े में 489 एक जैसे दिखने वाले दरवाजे हैं, जिनकी नक्काशी और खूबसूरती देखकर एक बार को आप भी ख्यालों की दुनिया में खो जायेंगे। बड़ा इमामबाड़ा मुगल आर्किटेक्चर का एक बेहतरीन उदाहरण है। बड़े इमामबाड़े में घूमने की टाइमिंग सुबह 6:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक की है। भारतीय पर्यटकों के लिए यहां का टिकट प्राइस ₹25 और विदेशियों के लिए टिकट प्राइस ₹300 है। ब्रिटिश रेजीडेंसी अंग्रेजों के जमाने में बनाई गई इस रेजीडेंसी में ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटिश एंप्लॉय रहा करते थे। यह रेजीडेंसी 35 एकड़ में फैली हुई है। जहां बहुत सारे बिल्डिंग्स हैं। जिसे पूरा मिला करके रेजीडेंसी का नाम दिया गया है। कहते हैं कि 1857 के विद्रोह में भारतीय लोगों ने इस रेजीडेंसी पर हमला कर दिया था। जिसमें 2000 अंग्रेजी सैनिक मारे गए थे। जिनकी कब्र इस रेजीडेंसी के अंदर बनवायी गई है। रेजीडेंसी के अंदर आपको रेजीडेंसी कंपलेक्स, ट्रेजरी बिल्डिंग, रेजीडेंसी का म्यूजियम, किचन और रीजेंसी का मस्जिद देखने को मिलेगा। इस बिल्डिंग का निर्माण भी आसफ़उद्दौला ने करवाया था। आज के समय में यह बिल्डिंग लखनऊ के प्रसिद्ध दार्शनिक स्थलों में से एक है। यहां की एंट्री टिकट भारतीय लोगों के लिए ₹15 और विदेशियों के लिए ₹200 है। और यह जगह विजिटर्स के लिए सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुली रहती है छोटा इमामबाड़ा लखनऊ शहर में एक छोटा इमामबाड़ा भी है। जिसका निर्माण नवाब मोहम्मद अली ने करवाया था। जो उस समय अवध के नवाब थे। इस जगह को इमामबाड़ा हुसैनाबाद मुबारक के नाम से भी जाना जाता है। इस जगह पर आप को ताजमहल के दो प्रतिरूप देखने को मिलेंगे। जिनमें से पहला नवाब मोहम्मद अली की याद में बनवाया गया था और दूसरा उनकी बेटी प्रिंसेस जीनत के याद में बनवाया गया था। यह जगह एक धार्मिक जगह मानी जाती है। इसलिए यहां लड़कियों को अपना सर ढक कर रखना होता है और विजिटर्स को यहां अपने जूते उतार कर जाना होता है। छोटा इमामबाड़ा एक बेहतरीन आर्किटेक्चर वाला जगह है। इस जगह को पैलेस ऑफ़ लाइट के नाम से भी जाना जाता है। इसके अंदर शीशे की नक्काशी की गई है और जिसके कारण यहां एक दिया जलाने पर भी यहाँ चारों ओर सौ दिया के बराबर की रोशनी फैल जाती है। इस इमामबाड़े के भीतर लगे झूमरों को नवाब ने बेल्जियम से मंगवाए थे। इस इमामबाड़े की वास्तुकला भारतीय इस्लामिक और फारसी वास्तु कलाओं से मिलती-जुलती है। इस जगह के खुलने की टाइमिंग सुबह 6:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक की है। यहां का टिकट प्राइस भारतीयों के लिए ₹50 और विदेशियों के लिए ₹500 है। रूमी दरवाजा छोटा इमामबाड़ा और बड़े इमामबाड़े के बीच में स्थित इस दरवाजे को हम लखनऊ शहर का शान कह सकते हैं। यह दरवाजा 60 फीट ऊंचा है और इसकी निर्माण शैली अवधि वास्तु कला पर आधारित है। इस दरवाजे का निर्माण भी आसफ़उद्दौला ने करवाया था और इस दरवाजे को तुर्किश गेटवे के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि यह दरवाजा तुर्की के बाव-ए-हुमायूं गेटवे (जो कि इस्तानबुल में है) से मिलता जुलता है।रूमी दरवाजा को गौर से देखने पर इसमें दरवाजे के चारों ओर फूलों की नक्काशी देखने को मिलेगी। इस दरवाजे के ऊपर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां भी हैं, जिससे पता चलता है कि इस दरवाजे का निर्माण नजर रखने के लिए भी करवया गया था। दरवाजे के ऊपर एक छोटा सा गुंबद है जहां से आप चारों ओर झांक सकते हैं। यहां आने की कोई फीस नहीं है। आप रूमी दरवाजे को लखनऊ की सड़कों पर चलते-चलते भी बड़े आसानी से देख सकते हैं। हुसैनाबाद क्लॉक टावर लखनऊ के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों के लिस्ट में अगला नाम है हुसैनाबाद क्लॉक टावर का। जोकि इंडिया के सबसे लंबे क्लॉक टावरों में से एक है। कहते हैं इस क्लॉक टावर के घंटे और सुईयों को बनवाने के लिए लंदन से सामग्रियां मंगवाई गई थीं। इस क्लॉक टावर के पेंडुलम की लंबाई 14 फिट है। इस क्लॉक टावर का निर्माण रिचर्ड रॉक्सेल बेन ने करवाया था। इस क्लॉक टावर की