लखनऊ को ही क्यों कहा जाता है, नवाबों की नगरी? पढ़ो तो जानो!
लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी, एक ऐसी नगरी है जो इतिहास, संस्कृति और तहजीब के लिए जानी जाती है। गोमती नदी के किनारे बसी यह नगरी नवाबों की शान और अवध की विरासत को अपने सीने में समेटे हुए है। नवाबों के दौर से लेकर आज तक, लखनऊ ने अपनी मनमोहक छवि को बरकरार रखा है। यह शहर सुकून और सौंदर्य का प्रतीक है, जहां हर गली दास्तां सुनाती है। लखनऊ का इतिहास 18वीं सदी से शुरू होता है, जब अवध के नवाबों ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। नवाब आसफ उद दौला ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी बनवाई इमारतें, जैसे बड़ा इमामबाड़ा, आज भी शहर की शान हैं। गंगा- जमुनी संस्कृति लखनऊ की तहजीब पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां की गंगा जमुनी संस्कृति हिंदू और मुस्लिम परंपराओं का मनभावक मेल है। लोग एक दूसरे के त्यौहारों में बढ़चड़कर और उत्साह से हिस्सा लेते हैं। शहर की सडकों पर चलते हुए आप नवाबी दौर की खुशबू महसूस करेंगे। चौक की गलियां, हजरतगंज के बाजार और अमीनाबाद की रौनक लखनऊ को जन्नत जैसा बनाती हैं। यह शहर खाने, कपडों और कला का खजाना है। तहजीब और तमीज का यह शहर हर किसी को अपनी जुस्तजू में बांध लेता है। लखनऊ की खासियत उसकी सादगी और शान में है। यहां की बोली अवधी इतनी मीठी है कि हर बात मन को छू लेती है। यह शहर समय के साथ बदलता गया, लेकिन इसकी आत्मा आज भी वही है। ऐतिहासिक धरोहरों में नवाबी शान! लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरें इस नगरी को बेहद खास बनाती हैं। सबसे पहले बात करते हैं बडा इमामबाड़ा की। जो 1784 में नवाब आसफ उद दौला ने बनवाया था। यह इमारत इतनी विशाल है कि देखते ही मन में सम्मान जाग उठता है। इसका भूलभुलैया वाला हिस्सा पर्यटकों को घूमने पर मजबूर करता है। संकरी सीढियां और गलियारों से आपको महोब्बत हो जाएगी। ऊपर से गोमती नदी का नजारा आपको सुकून से भर देगा। पास में हुसैनाबाद क्लॉक टावर, जो भारत का सबसे ऊंचा घंटाघर है। 221 फीट ऊंचा यह टावर 1881 में बना था आपको देखने को मिलता है। इसकी गोथिक शैली और घंटियों की आवाज लखनऊ की हवा में अपनापन घोल देती है। रात में जब यह रोशनी से चमकता है, तो लगता है जैसे कोई जन्नत जमीन पर उतर आई हो। यहां का रूमी दरवाजा भी यहां की शान है। इसे तुर्की के एक दरवाजे से प्रेरणा लेकर बनवाया गया था। 60 फीट ऊंचा यह दरवाजा नवाबी कला का नमूना है। इसके पास ही छोटा इमामबाड़ा है, जिसमें खूबसूरत झाड फानूस और नक्काशी देखने लायक है। ये जगहें लखनऊ की नवाबी शान को महसूस कराती हैं। कैसरबाग महल इस नवाबों की नगरी में कैसरबाग महल नाम की एक और धरोहर है। इसे नवाब वाजिद अली शाह ने बनवाया था। हालांकि समय के साथ यह थोड़ा पुराना हो चुका है लेकिन इसकी भव्यता आज भी बरकरार है। और लखनऊ की ये धरोहरें इतिहास की किताब के पन्ने जैसी हैं। जो आपको अतीत की गाथा सुनाती हैं। ये नवाबों की जुस्तजू और उनके शौक को दर्शाती हैं। सच तो यह है की लखनऊ घूमने वाले इन जगहों को देखे बिना अधूरे रहते हैं। इसलिए आप यदि यहां आते हैं तो इस बात का ध्यान रखें की यहां की हरेक जगह को इत्मीनान से घूमकर इस कलाकारी का लुत्फ उठाएं। लखनऊ के खानपान की दुनिया भर में मिसाल क्यों दी जाती है? लखनऊ के खाने को पूरी दुनिया भर में पसंद किया जाता है। यहां का हर व्यंजन मनमोहक है। इसके मशहूर होने की पीछे की कहानी यह है की नवाबों ने इस खाने को कला बनाया, और यह परंपरा आज भी ज्यों की त्यो कायम है। दरअसल, लखनऊ की गलियों में खाने की खुशबू आपको अपनी ओर खींचती है। अब हम बात करते हैं, कुछ जाने-माने, और मशहूर व्यंजनों की। इन सभी में सबसे पहले आता है, कबाब। टुंडे कबाब इतने नरम होते हैं कि मुंह में घुल जाते हैं। कहते हैं, एक नवाब के लिए जिनके दांत नहीं थे, यह कबाब बनाया गया था। इसके अलावा बिरयानी भी लखनऊ की शान में शरीक है। इदरीस की बिरयानी और वहिद की बिरयानी में चावल का हर दाना स्वाद से भरा होता है। साथ में मटन की खुशबू और मसालों का मेल इसे बेमिसाल बनाता है। अगर आप शाकाहारी हैं, तो लखनऊ में आपके लिए भी बहुत कुछ है। चटनी और दाल के साथ पराठे या पनीर की सब्जी का स्वाद यकीनन आपको दीवाना बना देगा। मिठाइयों में रसीले गुलाब जामुन और शाही टुकडा लखनऊ की खासियत हैं। अमीनाबाद के बाजार में मिठाई की दुकानें स्वाद की बहार ला देती हैं। यहां मलाई की गिलौरी और रबडी का स्वाद ऐसा है कि आप बार बार खाना चाहेंगे। चौक की गलियों में ठंडाई और कुल्फी का मजा ओय होए होए होए मजा आ जाता है। गर्मियों में एक गिलास ठंडाई सुकून देता है। लखनऊ का खाना सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि नवाबी तहजीब की कहानी है। यहां खाना बनाना और खाना दोनों ही कला है। हर व्यंजन में प्यार और मेहनत साफ साफ झलकती है। लखनऊ की तहजीब अब हम लखनऊ की तहजीब पर नजर डालते हैं। क्योंकि तहजीब का बेमिसाल रंग गंगा जमुनी संस्कृति लखनऊ की तहजीब दुनिया भर में मशहूर है। यह गंगा जमुनी संस्कृति का प्रतीक है, जहां हिंदू और मुस्लिम मिलकर रहते हैं। यह तहजीब लखनऊ को जन्नत बनाती है। लोग यहां एक दूसरे के त्यौहारों में बड़े उत्साह से हिस्सा लेते हैं। दीवाली हो या ईद, हर कोई मिलकर जश्न मनाता है। लखनऊ की बोली अवधी इतनी मीठी है कि हर बात मन को छू लेती है। लोग मेहमानों का स्वागत बडे प्यार से करते हैं। लखनऊ के नवाबों ने तहजीब को नया मुकाम दिया है। वे कला, संगीत और शायरी के शौकीन थे जो यह की पहचान मानी जाती है। आज भी लखनऊ में कवि सम्मेलन और मुशायरे होते रहते हैं। लखनऊ की चिकनकारी इसके अलावा लखनऊ चिकनकारी के लिए भी मशहूर है। यह कढाई इतनी बारीक है कि देखने पर मनमोहक लगती है। चौक और अमीनाबाद में चिकनकारी की दुकानें हर सैलानी को अपनी ओर खींचती हैं। साडी, कुर्ते और




