City of Thousand Temples, तमिलनाडु- जानिए इसके गौरवशाली अतीत और मंदिरों की कहानी
दक्षिण भारत के मंदिरों की बात हो और कांचीपुरम का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 70 किलोमीटर दूर बसा कांचीपुरम सदियों से श्रद्धा, शिल्पकला और आध्यात्मिक साधना का केंद्र रहा है। यही वजह है कि इसे “City of Thousand Temples” यानी “हजार मंदिरों का शहर” कहा जाता है। हालांकि आज यहां हजार मंदिर मौजूद नहीं हैं, लेकिन प्राचीन काल में इस नगर में असंख्य छोटे-बड़े मंदिरों का जाल फैला हुआ था। हर गली, हर मोहल्ले में कोई न कोई देवालय था। समय के साथ कई मंदिर नष्ट हो गए, पर जो बचे हैं, वे आज भी इस शहर के सुनहरे इतिहास की गवाही देते हैं। जब कांचीपुरम था दक्षिण का आध्यात्मिक केंद्र इतिहासकारों के अनुसार कांचीपुरम का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों और यात्रियों के वृत्तांतों में मिलता है। यह शहर कभी पल्लव, चोल और विजयनगर साम्राज्य की राजधानी रहा। विशेष रूप से पल्लव वंश के शासनकाल में यहां भव्य मंदिरों का निर्माण हुआ और द्रविड़ स्थापत्य कला को नई पहचान मिली। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने यात्रा-वृत्तांत में कांचीपुरम का उल्लेख किया है और इसे शिक्षा व धर्म का प्रमुख केंद्र बताया है। उस दौर में यह शहर न सिर्फ धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों का भी केंद्र था। कैलासनाथर मंदिर: पल्लव वास्तुकला की अद्भुत मिसाल कांचीपुरम के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है कैलासनाथर मंदिर। इसका निर्माण 8वीं शताब्दी में पल्लव राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह) ने करवाया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे द्रविड़ शैली की प्रारंभिक उत्कृष्ट कृति माना जाता है। बलुआ पत्थर से बने इस मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियां और नक्काशी आज भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। मंदिर परिसर में कई छोटे-छोटे शिवालय बने हैं, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। एकाम्बरेश्वरर मंदिर: पंचभूत स्थलों में से एक कांचीपुरम का एक और प्रमुख आकर्षण है एकाम्बरेश्वरर मंदिर। यह भगवान शिव के पंचभूत स्थलों में से एक है, जहां उन्हें पृथ्वी तत्व (पृथ्वी लिंग) के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है, हालांकि वर्तमान संरचना का विस्तार चोल और विजयनगर शासकों ने किया। मंदिर का विशाल गोपुरम और प्रांगण इसकी भव्यता को दर्शाते हैं। यहां स्थित प्राचीन आम का वृक्ष भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। कामाक्षी अम्मन मंदिर: शक्ति की दिव्य उपस्थिति कांचीपुरम शक्ति उपासना का भी प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित कामाक्षी अम्मन मंदिर देवी पार्वती के कामाक्षी रूप को समर्पित है। किंवदंती है कि देवी ने यहां तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। यह मंदिर शक्तिपीठों में विशेष स्थान रखता है और नवरात्रि के दौरान यहां भव्य उत्सव आयोजित होते हैं। मंदिर की स्वर्णमंडित संरचना और शांत वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक सुकून देता है। वरदराज पेरुमल मंदिर: वैष्णव परंपरा का केंद्र कांचीपुरम केवल शिव और शक्ति ही नहीं, बल्कि वैष्णव परंपरा का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। वरदराज पेरुमल मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक प्रमुख मंदिर है। यह मंदिर 12वीं शताब्दी में चोल वंश द्वारा विकसित किया गया और बाद में विजयनगर राजाओं ने इसका विस्तार किया। इसकी भव्य मूर्तियां, पत्थर के खंभों पर की गई नक्काशी और विशाल जलकुंड इसे खास बनाते हैं। हर 40 वर्ष में यहां “अथी वरदर” उत्सव मनाया जाता है, जिसे देखने लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। क्यों कहा गया ‘हजार मंदिरों का शहर’? कांचीपुरम को “City of Thousand Temples” कहे जाने के पीछे मुख्य कारण इसका प्राचीन धार्मिक महत्व है। एक समय यहां सैकड़ों बड़े और हजारों छोटे मंदिर थे। अलग-अलग राजवंशों ने अपने शासनकाल में यहां मंदिरों का निर्माण कराया। हालांकि आज सक्रिय मंदिरों की संख्या कम है, लेकिन जो मंदिर मौजूद हैं, वे स्थापत्य कला और धार्मिक परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। यही कारण है कि यह शहर आज भी दक्षिण भारत की आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है। कांचीपुरमरेशमी साड़ियों का शहर मंदिरों के अलावा कांचीपुरम अपनी प्रसिद्ध कांचीवरम सिल्क साड़ियों के लिए भी जाना जाता है। यहां की रेशमी साड़ियां अपने भारी बॉर्डर, चमकीले रंग और पारंपरिक डिजाइनों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। मंदिरों की नक्काशी और धार्मिक प्रतीक इन साड़ियों के डिजाइनों में भी झलकते हैं। कैसे पहुंचे कांचीपुरम? कांचीपुरम, तमिलनाडु के प्रमुख शहरों से सड़क और रेल मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है। निकटतम हवाई अड्डा चेन्नई में है। चेन्नई से सड़क मार्ग द्वारा करीब डेढ़ से दो घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, जब मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है। कांचीपुरम सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि सदियों की आस्था, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यहां के मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं, बल्कि इतिहास की खुली किताब हैं। “City of Thousand Temples” का खिताब इस शहर को यूं ही नहीं मिला। हर पत्थर, हर नक्काशी और हर प्राचीन कथा इस बात की गवाही देती है कि कांचीपुरम भारतीय सभ्यता की अनमोल धरोहरों में से एक है। अगर आप इतिहास, वास्तुकला और आध्यात्मिकता में रुचि रखते हैं, तो कांचीपुरम की यात्रा आपके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हो सकती है।




