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जानिए भारत में लोकप्रिय बेहद ख़ास स्वाद, छः मुगलई डिशेस!

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भारत एक ऐसा देश है, जहां दुनिया की सबसे ज्यादा सांस्कृतिक विविधता है। रहन सहन, पहनावा और खान-पान में अव्वल दर्जे की भिन्नता है। हर कोई अपने ढंग से बना रहा है, खा रहा है क्योंकि सबका खाना खाने और बनाने का अंदाज अपना अपना है। लेकिन कुछ ऐसी रेसेपीज हैं, जो अधिकतर लोगों को पसंद हैं, जिनका स्वाद सबको भाता है। आज हम ऐसी ही कुछ चुनिंदा डिसेस की चर्चा करने वाले हैं। और आज की इस चर्चा का विषय है, लोकप्रिय और बेहद पसंद की जाने बाली छः मुगलई डिशेस। इसमें रंग, स्वाद और संस्कृति का मेल है। जब बात मुगलई खाने की आती है, तो मुंह में पानी आ जाता है दिमाग पर एक ऐसा खुमार चड़ता है जैसे सबको जहन्नुम जाने का चड़ा है। मुगलई खाना सिर्फ खाना नहीं, बल्कि एक शाही एहसास है। मुगल बादशाहों के रसोईघर से निकला यह खाना आज भी भारत में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। हर व्यंजन के पीछे एक कहानी छुपी होती है। ये डिशेस भी न सिर्फ स्वादिष्ट हैं, बल्कि इनके पीछे की कहानियां भी उतनी ही रोचक हैं। खैर, इस स्वाद की यात्रा पर निकलते हैं और जानते हैं कि ये डिशेस इतनी खास क्यों हैं। सबसे ज्यादा लोकप्रिय और लबाबदार बिरयानी है मुगलई खाने का ताज बिरयानी का नाम सुनते ही मन में एक शाही दावत की तस्वीर उभरती है। यह मुगलई खाने का सबसे चमकता सितारा है। बिरयानी सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि एक जुनून है। इसे बनाने की कला मुगल काल से चली आ रही है। बासमती चावल, मसाले, मांस या सब्जियां, और ढेर सारा प्यार यही बिरयानी की आत्मा है। इस ताज के कई रूप हैं जैसे हैदराबादी बिरयानी, लखनवी बिरयानी, कोलकाता स्टाइल, और अवधी। हर जगह का अपना खास अंदाज है। हैदराबादी बिरयानी में तीखे मसाले और दम की तकनीक का जादू है, तो लखनवी बिरयानी हल्की और सुगंधित होती है। इसे बनाते समय चावल और मांस को अलग-अलग पकाया जाता है, फिर धीमी आंच पर दम दिया जाता है असल में दम में दम है। मतलब असली जायका तभी मिलता है जब दम ठीक से दिया जाए। यही प्रक्रिया बिरयानी को उसका खास स्वाद देती है। लोग बिरयानी को रायते, मिर्ची का सालन या सलाद के साथ खाना पसंद करते हैं। चाहे शादी हो, त्योहार हो या कोई खास मौका, बिरयानी हर जगह छा जाती है। इसका स्वाद ऐसा है कि एक बार खाने के बाद लोग बार-बार इसे खाना चाहते हैं। अगर आपने अभी तक बिरयानी नहीं खाई, तो देर न करें। यह डिश आपके दिल और पेट दोनों को जीत लेगी। कबाब में वह काबिलियत है की एक बार चखते ही अपना मुरीद बना सकता है।   मुगलई खाने में कबाब का नाम न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। कबाब एक ऐसी डिश है, जो हर उम्र के लोगों को पसंद आती है। यह छोटे-छोटे टुकड़ों में बनाया जाता है, जो मुंह में रखते ही घुल जाते हैं। कबाब भी कई तरह के होते हैं जैसे सीख कबाब, शामी कबाब, गलौटी कबाब, और बोटी कबाब। हर कबाब का अपना अलग स्वाद और बनावट है। गलौटी कबाब लखनऊ की शान है। कहते हैं कि इसे नवाब वाजिद अली शाह के लिए बनाया जाता था, जिनके दांत कमजोर थे। इस कबाब को इतना नरम बनाया जाता है कि यह मुंह में घुल जाता है। इसे बनाने के लिए कीमा, पपीता, और कई तरह के मसालों का इस्तेमाल होता है। दूसरी तरफ, सीख कबाब को तंदूर में पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी जबरदस्त हो जाता है। कबाब को आमतौर पर हरी चटनी, प्याज के छल्ले, और नान या रोटी के साथ परोसा जाता है। यह स्टार्टर के रूप में भी खाया जाता है और मुख्य भोजन के साथ भी। कबाब की खासियत यह है कि यह हर मौके को खास बना देता है। चाहे घर पर मेहमान आए हों या रेस्तरां में दोस्तों के साथ डिनर, कबाब हमेशा सबका पसंदीदा रहता है। कोरमा ही तो है मलाईदार स्वाद का राजा कोरमा मुगलई खाने की एक ऐसी डिश है, जो अपने मलाईदार और हल्के स्वाद के लिए जानी जाती है। यह डिश मांस या सब्जियों को दही, क्रीम और बादाम या काजू के पेस्ट में पकाकर बनाई जाती है। कोरमा का स्वाद इतना मजेदार होता है कि यह तीखा नहीं लगता बल्कि एक मखमली एहसास देता है। मुगलई कोरमा में कई तरह के मसाले जैसे इलायची, दालचीनी और केसर का इस्तेमाल होता है। यह डिश धीमी आंच पर पकाई जाती है ताकि मांस या सब्जियां मसालों का स्वाद अच्छे से सोख लें। कोरमा को नान, पराठा या जीरा राइस के साथ खाया जाता है। शाही कोरमा और नवाबी कोरमा इसके दो सबसे मशहूर प्रकार हैं। कोरमा की खास बात यह है कि यह हर तरह के खाने वालों को पसंद आता है। अगर आपको तीखा खाना पसंद नहीं, तो कोरमा आपके लिए बिल्कुल सही है। इसका मलाईदार स्वाद और हल्की सुगंध हर किसी को अपना दीवाना बना देती है। अगली बार जब आप मुगलई खाना ऑर्डर करें, तो कोरमा जरूर आजमाएं। सबसे प्यारी, मुगलई निहारी! सुबह का शाही नाश्ता निहारी एक ऐसी डिश है, जो मुगलई खाने की गहराई को दर्शाती है। यह एक गाढ़ी और स्वादिष्ट ग्रेवी वाली डिश है, जिसे आमतौर पर गोश्त के साथ बनाया जाता है। निहारी को रात भर धीमी आंच पर पकाया जाता है ताकि मांस नरम हो जाए और मसालों का स्वाद उसमें पूरी तरह समा जाए। निहारी का इतिहास दिल्ली के मुगल दरबार से जुड़ा है। कहते हैं कि इसे सुबह के नाश्ते के लिए बनाया जाता था ताकि नवाबों को दिन भर के लिए ताकत मिले। आज भी पुरानी दिल्ली और लखनऊ में निहारी सुबह-सुबह खाई जाती है। इसे नान या शीरमाल के साथ परोसा जाता है। ऊपर से हरी धनिया, अदरक की पतली स्लाइस, और नींबू का रस डालकर इसका स्वाद और बढ़ जाता है। निहारी का स्वाद तीखा और मसालेदार होता है, लेकिन यह इतना भारी नहीं कि पेट पर बोझ लगे। अगर आप मांसाहारी हैं और मुगलई खाने के शौकीन हैं, तो निहारी आपके लिए एकदम सही डिश है। इसे खाने के बाद आप