बिहार के अंग क्षेत्र, विशेषकर भागलपुर, पूर्णिया और कटिहार में मनाया जाने वाला जितिया पर्व महिलाओं का प्रमुख त्यौहार है। यह भादो मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया से सप्तमी तक आयोजित होता है। जितिया बहन-भाई का रक्षा कवच है, जहां महिलाएं अपने भाइयों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति की कामना करती हैं।
पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, उसके बाद तीन दिनों का निर्जला व्रत रखा जाता है। महिलाएं नदी या तालाब में स्नान कर नीम, जामुन, कचरी, ककड़ी, तरबूज और कद्दू जैसे फलाहार ग्रहण करती हैं।

व्रत के दौरान ‘जिउआ’ नामक मिट्टी की प्रतिमा बनाई जाती है, जो भगवान विष्णु का प्रतीक है। महिलाएं नाव पर बैठकर गीत गाती हैं, जो पारिवारिक बंधनों की मजबूठी दर्शाते हैं। पर्व का समापन पारण से होता है, जहां प्रसाद के रूप में फल और मिठाई वितरित की जाती है। यह त्यौहार नारी शक्ति को समर्पित है, जो सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहित करता है। जितिया बिहारी संस्कृति की जीवंत परंपरा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। यह संस्कृति को सहेजना का एक अद्भुत उदाहरण है।
जितिया पर्व न सिर्फ बिहार की लिए महत्व रखता है बल्कि पूरे देश को जोड़ने का काम करता हूं।