दौसा जिले का आलुदा गांव, जहां तैयार हुआ था 1947 में फहराया गया ऐतिहासिक राष्ट्रीय ध्वज
देशभर में आज़ादी का अमृत महोत्सव बड़े हर्षोल्लास और देशभक्ति के रंग में मनाया जा रहा है। राजस्थान के दौसा जिले में भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अनेक सांस्कृतिक और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लेकिन जिले के लोगों के लिए 15 अगस्त का दिन इसलिए खास है, क्योंकि दौसा का एक छोटा सा गांव आलुदा आज़ाद भारत के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। दरअसल, वर्ष 1947 में आज़ादी के बाद दिल्ली के लाल किले पर फहराया गया पहला तिरंगा झंडा राजस्थान के दौसा जिले के आलुदा गांव में ही बनकर तैयार हुआ था। यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस पर यह गांव और पूरा जिला गर्व से भर उठता है। rajasthan-aluda-village-first-tricolor-red-fort
खादी उद्योग से जुड़ा है आलुदा गांव का गौरवशाली इतिहास
आलुदा गांव का नाम देशभर में खादी ग्रामोद्योग के कारण जाना जाता है। यहां वर्षों से खादी कपड़े का काम होता आ रहा है। वर्तमान समय में दौसा जिले में खादी से जुड़ा कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच चुका है, जिससे हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है।
बिना मोलभाव के बिकता है खादी का तिरंगा
खादी कपड़े से बना तिरंगा न केवल देखने में बेहद आकर्षक होता है, बल्कि यह स्वदेशी, आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक भी है। यही कारण है कि ग्राहक बिना किसी मोलभाव के खुशी-खुशी खादी का तिरंगा खरीदते हैं।
किसने बनाया था लाल किले पर फहराया गया पहला तिरंगा?
बताया जाता है कि 1947 में लाल किले पर फहराया गया पहला तिरंगा आलुदा गांव के स्थानीय निवासी चौथमल बुनकर द्वारा हाथ से बुनकर तैयार किया गया था, जिसे बाद में दिल्ली भेजा गया। आज भी आलुदा गांव खादी उद्योग, स्वदेशी सोच और देशभक्ति की भावना के साथ आज़ाद भारत की उस ऐतिहासिक विरासत को पूरी शान से संजोए हुए है।