हनुमानगढ़ के बड़ोपल गांव में बने 30 से ज्यादा अस्थायी टापू, कैंपिंग और बर्ड वॉचिंग का बढ़ा क्रेज हनुमानगढ़, राजस्थान की पहचान अब सिर्फ रेगिस्तान तक सीमित नहीं रही। हनुमानगढ़ जिले का बड़ोपल गांव इन दिनों प्रकृति के एक अनोखे नज़ारे के कारण चर्चा में है। बरसात के बाद जब क्षेत्र में जमा पानी धीरे-धीरे सूखता है, तो रेत और पानी के मेल से कई अस्थायी टापू उभर आते हैं। यही टापू अब पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बन चुके हैं। Badopal Lake
बरसात के बाद उभरे प्राकृतिक टापू
स्थानीय जानकारी के अनुसार, बड़ोपल और उसके आसपास के इलाके में अब तक 30 से अधिक प्राकृतिक टापू बन चुके हैं। चारों ओर पानी से घिरे ये टापू देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं। सर्दियों के मौसम में यहां का नज़ारा और भी मनमोहक हो जाता है, जिसके चलते पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

Badopal Lake-कैंपिंग और बोटिंग के लिए उमड़ रही भीड़
इन दिनों बड़ोपल गांव कैंपिंग, बोटिंग और नेचर टूरिज्म के लिए उभरता हुआ हॉटस्पॉट बन गया है। खासकर सर्द मौसम में बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं और टापुओं पर कैंप लगाकर प्रकृति का आनंद ले रहे हैं।
250 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का बसेरा
पानी की भरपूर उपलब्धता के कारण यह इलाका प्रवासी पक्षियों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बन गया है। बताया जा रहा है कि यहां 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे जा चुके हैं। सर्दियों में साइबेरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से पक्षियों के झुंड बड़ोपल पहुंचते हैं, जिससे यह क्षेत्र बर्ड वॉचिंग के लिए भी मशहूर हो रहा है।

स्थानीय लोगों को मिल रहा रोज़गार
पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से गांव के लोगों को भी फायदा हो रहा है। नाव संचालन, कैंपिंग सुविधाएं, गाइड और स्थानीय सेवाओं के जरिए ग्रामीणों को रोज़गार के नए अवसर मिल रहे हैं। पर्यटन मानचित्र पर उभरता बड़ोपल प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और पक्षियों की चहचहाहट के कारण बड़ोपल अब धीरे-धीरे राजस्थान के नए पर्यटन स्थलों में अपनी जगह बना रहा है। यह इलाका साबित करता है कि राजस्थान की धरती पर कुदरत के रंग हर मौसम में अलग कहानी कहते हैं।

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